धर्म विशेष

भगवान श्री कृष्ण का अलौकिक ब्यक्तित्व और अद्भुत नेतृत्व -जन्म दिन पर हार्दिक बधाई---------.

      
          प्रिय बंधुओ हम सभी भगवान कृष्ण के बारे में जितना जानते है वे कैसे थे- क्या थे -----? यहाँ समेट पाना बड़ा ही कठिन है कई पुराण, उपनिषदों और हजारो लोक साहित्यों में श्री कृष्ण के चरित्र का वर्णन है फिर भी लगता की अधुरा ही है क्यों ? वे जब जेल में जन्म लेते है बचपन अपने माँ के गोंद नहीं तो यशोदा माँ के यहाँ लालन- पालन होता है, बचपन में वे माँ के प्यार को नहीं पाते उनको पिता का सरक्षण स्नेह भी नहीं मिलता, उनका कैसा बहु-आयामी चरित्र है दूध पीते- पीते पूतना के प्राण को पी जाते है, बचपन में वे ग्वाल-बाल के साथ खेलते -खेलते बड़े- बड़े राक्षसों को मार डालते ही नहीं कालिया दह में कालिया नाग को यमुना छोड़ने को बाध्य करते है, वे बचपन में मथुरा आकर कंस जैसे आत-ताई को समाप्त करते हैं। 
        उनका ब्यक्तित्व कैसा है वे राजा नहीं बनते राजा बनाते हैं, कुछ न होते हुए भी वे सबकुछ है, वे महाभारत के शांति दूत है और पांडवो के विस्वास पात्र भी है पूरे आर्याबर्त में कहाँ नहीं हैं वे, यह असंभव ही नहीं वे सब जगह नायक की भूमिका में है वे रणक्षोड़ भी है द्वारिका नगरी को बसाते भी है लेकिन वे राजा नहीं है, वे महाभारत के अकेले नायक है युधिष्ठिर के यज्ञ में अग्रपूजा के लिए वही उपयुक्त पात्र पाए जाते हैं, अपने अनोखा ब्यक्तित्व से वे भगवान ही नहीं तो जहाँ भगवान श्रीराम जी १२-कलाओ के अवतार थे वही श्री कृष्ण १६ कलाओ के अवतार हैं, उन्होंने गीता में धर्म की परिभाषा भी की उसे समग्र विकाश की प्रक्रिया भी बताया वहां सांख्यहै, योग है, कर्म है, ज्ञान है, भक्ति है, सन्यास है, ध्यान है, अक्षर- ब्रम्हायोग है, राजयोग है और उसका प्रतिनिधि विश्वरूप दर्शन है, वे प्रकृति पुरुष विबेचन हैं, देव-आसुरी सम्पदा हैं और मोक्ष के वर्णन हैं, वे अब कह रहे हैं यही सनातन धर्म है -'एष धर्मः सनातनः' और वे अर्जुन को बिधर्मियो का बध के लिए प्रेरित करते है आज हम उनके इस सन्देश को भूल गए हैं और बिधर्मियो का सम्मान कर रहे है, आज जम्मू-कश्मीर और असम समस्या का समाधान भी भगवान के इसी वाक्य में है वे जोर देकर कहते है, ''सर्वधर्म परित्यज्यम मामेकंशरणम ब्रज'' तुम सभी धर्मो को छोडकर मेरी शरण में आओ मै तुम्हे मुक्ति प्रदान करुगा चिंता मत कर, यही सन्देश उनको भगवान होने का सबूत भी है। 
        उनकी आठ पटरानी है लेकिन मुख्य रूपसे सत्यभामा और रुक्मणी लेकिन माना जाय तो केवल और केवल रुक्मणी वैसे तो उन्होंने तो १६ हज़ार एक सौ आठ को अपना नाम दिया वो भी किसलिए उन नारियो के सम्मान के लिए ऐसा ब्यक्तित्व है श्री कृष्ण----! जिसे कही बांधा नहीं जा सकता उन्हें एक स्थान पर समाहित नहीं किया जा सकता वे सर्बांग है, सर्वशक्तिशाली भी, वे सम्पूर्ण धरती के नेता भी और मार्गदर्शक भी आज उनका जन्म दिन है हमें उनसे प्रेरणा लेकर देश और हिन्दू समाज की रक्षा का ब्रत लेंना चाहिये जिससे मानवता की रक्षा हो सके।    
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