धर्म विशेष

बिहार बीजेपी का भविष्य ------------!

        भारत में पहली बार भारतीय जनता ने सीधे प्रधानमंत्री चुना है यह चुनाव ऐसा लग रहा था की जैसे अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव हो नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार भी उसी तरीके से किया भारतीय जानता ने बीजेपी की अपेक्षा से अधिक सीट (सांसद) देकर मोदी जी को भारत भाग्य बिधाता बना दिया वे सफल भी हैं एक-एक काम जहाँ भ्रष्टाचार की जड़ें थी समाप्त करना, आईएएस की फिजूल खर्ची रोकना, दूरदर्शन को बढ़ावा देना, अपने नेताओं पर अंकुश लगाना यह तमाम कार्य केवल बीजेपी के कार्यकर्ता ही नहीं पूरा देश प्रशंसा कर रहा है, १५ अगस्त का लालकिले के भाषण ने तो जैसे विश्व के सभी भारतीय शुभचिंतकों को मोह लिया हो, लेकिन बीजेपी नेतृत्व को बिहार के बारे में भी विचार करना होगा की जो लोग AMU खोलवाने के जिम्मेदार हैं, जिन लोगो ने पशुबध शाला खुलवाने का काम किया है, जिन्होंने निर्दोष लोगो को भागलपुर दंगे का दोषी करार कराया है, जिन लोगों ने बांग्लादेशी घुसपैठियों की वकालत की है, ABVP के कार्य्रकर्ताओं को पिटवाया है, NDA सरकार में बीजेपी के हीरो नरेंद्र मोदी नहीं तो नितीश PM मेटीरियल हैं फिर वही, जनता देखना नहीं चाहती इस पर नेतृत्व को ध्यान देने की आवस्यकता है। 
        बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व को यह ध्यान रखना होगा की उसका वोटर सवर्ण, ब्यापारी, पिछड़ा और दलित सभी है कहीं पिछड़ों के चक्कर मे औरों से हाथ न धोना पड़े, बीजेपी को संगठन का कार्यकर्ता और जमीनी नेता नहीं चाहिए मैनेजर चाहिए यहाँ स्वर्गीय कैलासपति मिश्र को गाली दिलवाने हेतु एक नेता को आगे किया गया वे नितीश सरकार मे मंत्री भी बने लेकिन जब उनका कद बढ्ने लगा तो एक उसी जाती के दूसरे नेता को प्रदेश महामंत्री बना उसे बेज्जत कराया, सीपी ठाकुर जैसे कद्दावर नेता के लिए रजनीश जैसे मोहरे का प्रयोग किया गया क्योंकि सीपी ठाकुर जमीनी नेता हैं, जब गोपाल नारायण सिंह बीजेपी बिहार प्रदेश अध्यक्ष बने उन्होने प्रदेश का दौरा शुरू किया पार्टी खड़ी कर दी कार्यकर्ताओं मे बहुत लोकप्रिय हो गए वे अपनी जाती के ही नहीं जनता मे भी लोकप्रिय होने लेगे और हैं उन्हे भी बड़ी योजना बद्ध तरीके से एयरपोर्ट मे टायलट पेपर पर स्तीफ़ा ले लिया गया और उनके बिकल्प के रूप मे एक दूसरे उन्हीं की जाती के नेता जो यथास्थित वादी थे उनको अध्यक्ष बनाया, अब बिहार नेता बिहीन, जमीनी नेता बिहीन, दांत विहीन नेता के अतिरिक्त कुछ नहीं, ये नेता रोड सो तो कर सकते हैं लेकिन जन सभा नहीं कर सकते, बिहार मे जो निष्ठावान कार्यकर्ता और नेता थे वे अपनी इज्जत बचाने हेतु घर बैठने को मजबूर हैं यहाँ विचार और कार्यकर्ता का कोई महत्व भी नहीं है पिछले सरकार मे कार्यकर्ता सब देख चुके हैं। 
         बिहार बीजेपी का पतन उसी समय होना शुरू गया जब गोपाल नारायण सिंह से स्तीफ़ा लिया गया वास्तविकता यह है की गोपाल बाबू यदि स्तीफ़ा नहीं देते तो वे आज बड़े नेता होते लेकिन वे सजिस के शिकार हुए, किसी की हिम्मत नहीं थी की उनसे कोई जबर्दस्ती स्तीफ़ा लेता लेकिन वे सज्जन जो ठहरे, अब पार्टी एक ब्यक्ति के हाथ मे है वे ऐसे नेता है जो सभी लोकसभा, बिधानसभा का टिकट तय करते है, जातीय समीकरण खोजते हैं और यह प्रयत्न करते हैं की जो प्रत्यासी तय हो उसका बीजेपी और संघ से दूर-दूर का कोई संबंध न हो जिससे वह उनका आदमी होगा यदि संगठन का ब्यक्ति होगा तो हो सकता है की उनकी बात न माने, लेकिन दुर्भाग्य कैसा है जो यह सब निर्णय करता है उसके जाती का वोट एक भी प्रतिशत् नहीं है, जिस बिहार मे यह माना जाता है की आज भी यहाँ का वोटर जाति के नाम पर वोट देता है बीजेपी मे जो दल के नेता हैं उसके पास अपनी जाति का एक भी प्रतिशत वोट नहीं है क्या बिहारी मूर्ख हैं जो बिना जनाधार वाले, उनकी जाती से घृणा करने वाले, उन्हे हमेशा नीचा दिखाने वाले, उनको छलने वाले को वोट देगें -? 
         जो नेता नरेंद्र मोदी को बिहार आने से मना करते थे अच्छा नहीं मानते थे, नरेंद्र मोदी से घृणा करते थे, जो नितीश को पीएम मेटीरियल बता रहे थे, जिसे हिन्दुत्व से घृणा हो, जो गऊ माता को मुसलमानों की तरकारी बताते हों, जिन्हे बिहार मे बंगलादेशी घुसपैठिए दिखाई नहीं देते, जो पशु (गाय) बधशाला खुलवाते हों, जिसे अपने नेतृत्व पर विसवास नहीं, पीएम राष्ट्रपति के भी रोज़ा इफ्तार मे भी नहीं जाते, यहाँ टोपी लगा रोज़ा इफ्तार कर हिंदुओं को चिढ़ाना, इतना ही नहीं अंतरराष्ट्रीय साजिस के तहत मुंगेर मे मुनाजीर हसन जैसे कुख्यात को बीजेपी मे लाना जिससे बीजेपी की राष्ट्रवादी धार कमजोर हो सके जिससे हिंदू ऐग्रेसिव वोटिंग न करे, ये मुनाजिर हसन कौन है ? वास्तविकता यह है की इस्लाम वर्ल्ड और ईसाई वर्ल्ड एक सजिस के तहत बीजेपी की राष्ट्रवादी धार कमजोर करना चाहते हैं यह इसी योजना का एक हिस्सा है झारखंड मे सायमन मराण्डी जो कार्डिनल का आदमी है बीजेपी मे लाना ये सब एक अंतर्राष्ट्रीय योजना के तहत किया जा रहा है लेकिन यहाँ के नेताओ को तो संघ के विचार को नष्ट करना है इस नाते इन्हे यह करना ही है और वे ही हमारे बीजेपी के नेता हैं लोग यह समझ रहे थे की जब बीजेपी का नेतृत्व बदलेगा तो बिहार बीजेपी ठीक हो जाएगी लेकिन यह बीजेपी नितीश की छाया से मुक्त नहीं हो पा रही, अब बीजेपी के कार्यकर्ता निराश हो रहे हैं, अमरेन्द्र प्रताप सिंह, चन्द्र मोहन राय, सीपी ठाकुर, जनार्दन यादव, गोपालनरायन सिंह जैसे कद्दावर नेता उपेक्षा के शिकार बने हुए हैं, जिसका परिणाम अगले बिधान चुनाव पर पड़ सकता है। 
       एक निवेदन है की जब देश आज़ाद हुआ था एक मुस्लिम नेता ने संसद के अपने भाषण मे भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग की थी उसने कहा यदि भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं होता तो आने वाले समय मे कोई हिन्दू नहीं बचेगा क्योंकि मुसलमान धर्मांतरण मे विस्वास करता है हिन्दू यह बात समझता नहीं लेकिन नेहरू नहीं माने उसने कहा काश नेहरू जी ''कुरान'' पढे होते-------! आज बीजेपी नेतृत्व से निवेदन है की वे ''कुरान'' पढे और बीजेपी के कार्यकर्ताओं को पढ़ने को कहें यदि वे कुरान नहीं पढ़ सकते तो उन्हे स्वामी दयानन्द जी द्वारा लिखित ''सत्यार्थ प्रकाश'' का तेरहवाँ, चौदहवाँ समुल्लास पढ़ना चाहिए, बिहार बीजेपी यदि समय रहते नहीं चेता तो परिणाम अच्छे नहीं होगे, कोई अपने नौकर को टिकट देगा, कोई अपने रिस्तेदार तो कोई पूंजी- पति को, बीजेपी पार्टी कार्यकर्ताओं से दूर होती जा रही है जैसे आज कांग्रेस की हालत हो गयी है अभी बिधान सभा का दस स्थानो पर चुनाव हो रहा है जिसमे सायद ही किसी कार्यकर्ता को टिकट मिला हो, बीजेपी  और कार्यकर्ताओं के लिए यह चुनाव अच्छा संकेत नहीं दे रहा, बिधान सभा के आम चुनाव मे बीजेपी नेताओं का अहंकार पार्टी को हानि पहुंचा सकता है।        
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