धर्म विशेष

ऐसा क्या है सत्यार्थ प्रकाश में -------!


क्यों पढ़े सत्यार्थ प्रकाश -? ।।

ऐसा क्या है "स्वामी दयानंद सरस्वती" कृत "सत्यार्थ प्रकाश" मे कि
१- इसे पढ़ कर कर बड़े बड़े मौलवी भी आर्य (हिन्दू) बन गए जैसे वर्तमान में "महेन्द्रपाल आर्य" जो की बडोत में फारसी भाषा के विद्वान मौलवी थे आज जाकिर नायक भी इनसे डिबेट करने से कतराता है. 
2- इस पुस्तक को पढ़कर मोतिहारी (बिहार) प्रख्यात मौलाना पं जयप्रकाश आर्य बन जाते हैं जिनसे किसी भी मुल्ला मौलबी व् पादरी का शास्त्रार्थ करना संभव नहीं था .
३- जिसे पढ़ कर 'फरहाना ताज' दुबई छोड़ के भारत आगयी और मुस्लिमो में वैदिक धर्म का प्रचार कर रही है.
४- जिसे पढ़ कर "लाला लाजपत राय" ने वकालत छोड़ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में पूरा जीवन लगा दिया|
५- जिसे पढ़ कर 'राम प्रसाद बिस्मिल' जो की एक जमाने में बुरे व्यसनों में फसे थे सच्चे देश भक्त बन गए और 'चन्द्रशेखर आज़ाद' कहते है मेने पहली बार जीवन में स्वराज्य शब्द सत्यार्थ प्रकाश में पढ़ा|
६- जिसे पढ़ कर व्यसनी मांसाहारी 'मुंशीराम' बदल गए और सन्यासी "श्रद्धानन्द सरस्वती" बनकर अंग्रेजो की गोलियों के आगे सीना तान के खड़े हो गए और दिल्ली के जामा मस्जिद में वेद मन्त्र बोलकर 30,000 मुसलमानों को जुम्मे की नमाज पर  उनको सम्बोधित किये {विश्व के इतिहास में कभी भी किसी भी मुल्क में किसी भी मस्जिद में 1400 साल के इस्लामिक चरित्र में कहीं भी किसी काफिर अर्थात् मुस्लिमेतर् का प्रवचन नहीं हुवा है.
आगरा से मेरठ के बीच लगभग सवा तीन लाख मुसलमानो को शुद्धि आंदोलन से फिर से हिन्दू (आर्य) बनाया, 93,000 ईसाईयों को हिन्दू धर्म में वपा सलए आर्य बनाया, राजस्थान में मुसलमान हुए 'मलकाना राजपूत' में 'सवा लाख' मलकाना राजपूतों की वापसी हुई और 1 करोड विधर्मी आर्य बनने के लिये तैयार थे तभी अब्दुल रशीद नामी एक मतान्ध सिर -फिरे ने स्वामी जी की हत्या करदी !
७- जिसे पढ़ कर 'वीर सावरकर' ने कहा कि जब तक ये पुस्तक भारतीयो के पास है तब तक कोई विधर्मी अपने मत की शेखी नही बघार सकता | हिन्दू जाती की ठंडी रगो में उष्ण रक्त का संचार करने वाला ये ग्रन्थ ''सत्यार्थ प्रकाश'' अमर रहे |
८- जिसे पढ़ कर 'भगतसिह' के दादा 'अर्जुनसिंह' कट्टर आर्यसमाजी हो गए और अपने सब बेटो को देशभक्त बना गए और देश को भगत सिंह जेसा वीर दे गए | जो बचपन से ही सत्यार्थ प्रकाश के विचारो से प्रभावित था|
९- जीवन भर वैदिक विचार धारा को खुले रूप से स्वीकार ना करने वाले भारत रत्न "महामना मदनमोहन मालवीय" इसे पढ़ कर अंतिम समय ब्राह्मणों को इस ग्रन्थ को देकर कहते है की यही अब तुम्हे मार्ग दिखाएगा.
वास्तविकता यह है कि सत्यार्थ प्रकाश मानवता का ग्रन्थ ही नहीं तो भारतीय स्वतंत्रता का महामंत्र बनकर उभरा और भारत को नयी दिशा दी और घर वापसी का द्वार खोलकर इस ग्रन्थ ने भारत के नवनिर्माण कि भूमिका निभाई . 
१०- योगी आदित्यनाथ कहते है की जब भी किसी मुसलमान की सनातन धर्म में वापसी करानी होती है में उसे पढने के लिए सत्यार्थ प्रकाश देता हूँ ।।
तो मित्रो सोचिये ऐसा क्या है इस ग्रन्थ में यदि जानना चाहते हो तो सत्यार्थ प्रकाश जरूर एक बार पढ़ के देखो
                         "यह ग्रन्थ हमेसा मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा-----!"
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