महर्षि दयानंद सरस्वती -------------------!


शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

  •          स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म ऐसे समय हुवा जब भारतवर्ष गुलाम था. भारत माता ने समय- समय पर ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया जिन्होंने सनातन वैदिक हिंदू धर्म का संबर्धन किया। चाणक्य व आदि शंकराचार्य जिन्होंने भारतीय सांस्कृतिक भूभाग को राजनैतिक स्वरुप दिया और दुनिया को मानवता का आदर्श साशन प्रदान किया। आचार्य शंकर के पश्चात् स्वामी जी ही ऐसे संत थे जिन्होंने आर्यसमाज की स्थापना करके केवल वैदिक धर्म का प्रचार ही नही किया बल्कि समाज में ब्याप्त बुराईयों को समाप्त करने तथा अपने बिछुड़े हुए बंधुवो को पुनः स्वधर्म में लाने का आन्दोलन खड़ा किया। और समाज में यह विस्वास पैदा किया की जो बंधू ईसाई अथवा इस्लाम मत स्वीकार कर लिए है वह पुनः हिन्दू धर्म में सहर्ष वापस आ सकते है, आर्यसमाज के माध्यम से देश को संगठित ही नही तो देश आज़ादी हेतु समग्र भारत वर्ष में क्रांतिकारियों का गुरुकुल खड़ा कर दिया, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि १८५७ का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की मूल जड़ में स्वामी जी ही थे, असफलता के पश्चात् उन्होंने १८८५ में दीपावली के दिन आर्यसमाज की स्थापनाकी, आज उन्ही की देन है की हम खुली हवा में स्वास ले रहे है, ऐसे महापुरुष का जीवन हम भारतीयों के लिए प्रेरणास्पद है। जिससे भारत माता के देशभक्त सपूतो की श्रृखला बनी रहेगी।
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