कहीं आडवानी की महत्वाकांक्षा भारत पर भारी न पड़ जाय ------!

            लालकृष्ण आडवानी किसी परिचय के कोई मोहताज नहीं है कहा जाता है जितनी रथ यात्राये उन्होंने की है, जितनी बार भारत माता की परिक्रमा की है शायद भारत के किसी राजनेता ने नहीं की है, कानपूर जनसंघ का अधिवेशन अटल जी ने यह प्रस्ताव रखा की आडवानी जी को पार्टी का अध्यक्ष बनाना चाहिए क्यों की बलराज मधोक जी का नाम किसी भी प्रदेश ने प्रस्तावित नहीं किया था, आडवानी जी का नाम आठ प्रान्तों ने प्रस्ताव किया था अटल जी ने बात शुरू की तो आडवानी जी ने कहा की मै तो भाषण कर ही नहीं पाता कैसे अध्यक्ष बन सकता हू-? इस पर अटल जी ने कहा की दीनदयाल जी ही कौन से अच्छे बक्ता थे लेकिन पार्टी उनकी बात मानती थी इसका मतलब क्या था ---? कही न कही आडवानी जी के अन्दर अटल जी दीनदयाल जी को देखते थे, यह सत्य भी था जो आडवानी राष्ट्रबाद प्रखर प्रवक्ता, हिंदुत्व के प्रति आग्रही, तुष्टि करण में कोई विस्वास नहीं, समान नागरिक संहिता के प्रबल समर्थक, श्री रामरथ पर सवार होकर राम जन्मभूमि आन्दोलन को गती देने वाले, कश्मीर में धारा ३७० समाप्ति के आकांक्षी, अखंड भारत के स्वप्न द्रष्टा और इन सब को पूरा करने के लिए बीजेपी जैसी पार्टी को मजबूती देना ही नहीं तो दो से एक सौ छियासी सीट तक ले जाने वाले --------
              आज के आडवानी क्या वही है---? जिन्होंने बीजेपी के मुंबई के अधिवेशन में बिना किसी के राय के घोषणा की थी की पार्टी जब भी सत्ता में आयेगी तो अटल बिहारी वाजपेयी ही प्रधानमंत्री होगे, आज उन्हें क्या हो गया है ? लगता है उनपर उम्र का असर दिखाई दे रहा है वे अपनी बनायीं पार्टी पर भरोषा नहीं कर पा रहे है उन्हें नहीं लगता कि बीजेपी अकेले भी पूर्ण बहुमत ला सकती है जो पार्टी दो से १८६ ला सकती है वह नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में २७२ का आकड़ा पार क्यों नहीं सकती -? आडवानी अपनी बनायीं ही पार्टी में खोट क्यों देख रहे है --? उनके बनाये नेता -कार्यकर्ता उनके विस्वसनीय क्यों नहीं-? वे यह जानते है की देश के जो भी सर्वे आ रहे है वे सभी नरेन्द्र मोदी के पक्ष में है दूर-दूर तक कोई भी उन्हें छू नहीं पा रहा है पूरा देश नरेन्द्र मोदी के नाम पर उबाल पर है देश को उन पर भरोषा है, आज़ादी के पश्चात् वे पहले नेता है जिन्हें भारत की जनता सर- आखो पर बिठा रही है आम हिन्दू जनमानस नरेन्द्र मोदी की तरफ देख रहा है विशेषकर बिहार में तो मोदी नाम की लहर सी है जितने सर्वे आये है उनमे नितीश कुमार कही टिकते ही नहीं है लेकिन नितीश का नाम सुशील मोदी के द्वारा उछलवाना -ये बिहार की जनता के साथ छल है, सुशील मोदी क्या पार्टी के प्रवक्ता है--? अभी हरियाणा ( सूरज कुण्ड ) के अधिवेशन में बार-बार NDA  को बढ़ाने के लिए बीजेपी को धर्मनिरपेक्ष साबित करना होगा यानी क्या--? बीजेपी आज तक धर्मनिरपेक्ष नहीं थी या है नहीं--! यदि बीजेपी सेकुलर नहीं है तो चुनाव आयोग कैसे इस सांप्रदायिक पार्टी को मान्यता देता है, बीजेपी तो धर्मनिरपेक्ष है क्यों की उसके नेता आडवानी है, लगता है आडवानी जी संघ से उब गए है वे चाहते है की बीजेपी संघ से अपने को अलग कर ले या तो वे प्रधानमंत्री बनने को लेकर ब्यग्र है या कन्फ्यूज है यदि सेकुलर को ही वोट देना है तो बीजेपी से जादे सेकुलर तो कांग्रेस है !
              लगता है आडवानी जी पर उम्र का असर तो है ही सत्ता मोह से वे ऊपर उठ नहीं पा रहे है उनका सत्ता मोह केवल बीजेपी को ही नहीं समाप्त करेगा वह भारतवर्ष को हानि पहुचने वाला भी होगा, कौन नहीं जनता बीजेपी हिंदुत्व निष्ठ वाली पार्टी है जिसे सेकुलर रहना हो वे पार्टी को छोड़कर कही जा सकते है आज भारत को बचाने आवस्यकता है वह हिंदुत्व के रास्ते से ही बच सकता है, सेकुलर के नाम पर जो देशद्रोह हो रहा है उसमे आडवानी जी भी सामिल है, जो कांग्रेस आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी हुई है उसके मनोबल को बढ़ाना गुजरात में बिरोधियो को हथियार देना लगातार मोदी के ऊपर पार्टी द्वारा हमला करवाकर गुजरात चुनाव को प्रभावित करने का प्रयत्न करना, मनरेगा की तारीफ करके वे क्या कहना चाहते है -? मनरेगा के माध्यम से पूरी जनता को भ्रष्ट बनाना ही जिसका उद्देश्य ---कांग्रेस -राजनेता, ब्युरोकेसी और मनेरगा के माध्यम से आम जनता को भ्रष्ट बना रही है आखिर आडवानी क्या कहना चाहते है की सोनिया पार्टी साफ सुथरी है ?  उन्हें लग रहा है की प्रधानमंत्री की कुर्शी उनकी ही गोद में आ रही है उन्होंने लगता पढना-लिखना भी बंद कर दिया ये सब सूचनाये उन्हें कौन देता है और बीजेपी के बिरोध में उनसे बोलवाता है ? क्या वे गुजरात में पार्टी को हराना चाहते है ? लेकिन ऐसा नहीं होगा गुजरात बीजेपी नरेन्द्रमोदी के नेतृत्व में भारी बहुमत से जीतेगी और वहां की जनता मोदी को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देख रही है इस नाते उनकी जीत और भी पक्की होती दिख रही है वहां कोई पार्टी है ही नहीं लेकिन वे आडवानी को अच्छे नहीं लग रहे है आडवानी ने जो घर बनाया उसे स्वयं ही समाप्त करना चाहते है स्वयं ही अपने मुख में कालिख पोतना चाहते है.
            आज़ादी के पश्चात् भारत में विजन वाला इतना लोकप्रिय जन नेता कोई हुआ ही नहीं जो भारत की आम जनता का स्वाभाविक नेता हो, बीजेपी में नरेन्द्र मोदी के कद का कोई नेता नहीं है चाहे सुषमा स्वराज हो या अरुण जेतली, राजनाथ हो या अडवानी कोई कही भी दूर-दूर तक नरेन्द्र मोदी तक नहीं पहुच पा रहे है लेकिन लगता है की भारत को दुर्भाग्यशाली बनाना चाहते है आडवानी जी, संघ के मिशन को पूरा करने में रोड़ा अटका रहे है,  इस समय भारत के वे एकमेव जन नेता है मोदी, कुछ लोग यह दलील दे रहे है की यदि नरेन्द्र मोदी का नाम आयेगा तो मुसलमान वोट नहीं देगा आखिर बीजेपी को कब मुसलमान वोट दिया है ? यदि कोई इस्लाम मतावलंबी बीजेपी को ओट देता है तो वह मुसलमान ही नहीं यहाँ तक मुख़्तार अब्बास नकबी और सहनवाज हुसेन भी बीजेपी को वोट नहीं करते, ये सभी बीजेपी के फ्यूज बल्ब के अतिरिक्त कुछ भी नहीं, ये ISI  के एजेंट है उसी की योजना से लव जेहाद में सामिल होकर इन लोगो ने हिन्दू लडकियों से निकाह किया है, फ़िल्मी खान बंधुओ के साथ सामिल है, यह हमारे हिन्दुओ  ऊपर एक बड़ा तमाचा है बीजेपी कि तरफ से इन्हें टीवी. चैनलों पर इन्हें भेजना हिन्दुओ के सम्मान को ठेस पहुचाना है और बीजेपी के ओट बैंक को समाप्त करना है, समय रहते बीजेपी यदि नहीं चेती तो इतना भ्रष्टाचार में डूबी हुई कांग्रेस को हराना बड़ा ही मुस्किल होगा भारत के सामने केवल एक ही बिकल्प है वह नरेन्द्र मोदी जो भारत को भारत बना सकता है उनके कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है जिनके पास एक दृष्टिकोण है वे संघ विचार को मनसा, वाचा, कर्मणा स्वीकार करते है और गुजरात में उन्होंने करके दिखाया भी है वे भारत की आकांक्षा पूरी करने वाले नेता होगे विश्व पटल पर भारत - भारत के रूप में खड़ा होगा फिर कोई पाकिस्तान हमें धमकाएगा नहीं, कोई बंगलादेश घुसपैठिये नहीं भेजेगा, कोई चीन हमें आखे नहीं दिखायेगा आतंकवादियो की हिम्मत नहीं होगी की हमारे संसद और मुंबई जैसे हमले करेगे, हम स्वाभिमान के साथ जी सकेगे .
सूबेदार सिंह 
पटना 

टिप्पणी पोस्ट करें

1 टिप्पणियां