धर्म विशेष

हिन्दुओ को बिधर्मियो (मुसलमानों,ईसाईयों) पर दया करने की आवस्यकता.

 प्रधानमंत्री ए नियम है उसी में आप लोगों को रहना है तो रहिये नहीं तो हमारा देश छोड़कर ज नहीं कह सकता है या तो अमेरिका की सेना है या मित्र देशो के द्वारा मारा जा रहा है या अमेरिका का गुलाम है, केवल भारत में ही मुसलमानों को सेकुलर नेता दामाद के सामान पाल रहे है लेकिन ''बकरी की माँ कब-तक खैर मनाएगी'' इन आतंकबादियो से एक न एक दिन हिन्दुओ को  में हुआ, मरने पर कब्रिस्तान में दफनाया गया मुझे मुक्ति नहीं मिली   आज मै हिन्दुओ से अपील करना चाहता हू की कोई भी मुसलमान अथवा ईसाई बाहर से नहीं ये सबके सब भारतीय ही है इनके पूर्बज सभी हिन्दुओ की ही संतान रहे है, इन्हें अपनाकर शुद्ध कर इन पर दया करना पुण्य का भागी होना है, मै कल्याण मासिक पत्रिका गोरखपुर (उ.प्र.) में प्रकाशित हनुमान प्रसाद पोद्दार के जीवन की घटना का वर्णन कर रहा हू, हनुमान प्रसाद पोद्दार मुंबई में एक प्राइवेट फार्म में नौकरी करते थे वे नियमित घूमने जातेजमीन में गाण दिया जाता है उन्हें मुक्ति नहीं मिलती सभी को प्रेत योनी में रहना पड़ता है पोद्दार जी के पूछने पर उसने बताया मुसलमान और ईसाई दोनों को शांति नहीं मिलती इनकी आत्माए बड़ी ही कष्टमय रहती है, आपसे प्रार्थना है की मेरा कब्रिस्तान मुम्बई में इस स्थान में है यदि मेरी कबर से एक हड्डी का टुकड़ा निकल कर गंगा जी में डाल दे तो मुझे मुक्ति मिल जाएगी, हनुमान प्रसाद जी ने उसकी हड्डी कब्रिस्तान से निकालकर प्रयाग संगम में ड़ाल देते है दुबारा वह आत्मा उनसे नहीं मिली उसे मुक्ति मिल गयी, इस घटना ने हनुमान प्रसाद पोद्दार का जीवन ही बदल दिया और वे सन्यासी बन गीता प्रेस की स्थापनाकर हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा, सस्ता साहित्य केंद्र खड़ाकर सनातन हिन्दू धर्म के प्रचार-प्रसार से अमर हो गए, आज उनकी गणना भारत के महापुरुषों में की जाती है. 
       एक गैर सरकारी संगठन के सर्वे के अनुसार अलीगढ वि.वि., जामिया वि.वि. दिल्ली और हैदराबाद उस्मानिया वि.वि.में मुसलमान लड़कियां इस्लामिक परंपरा से संतुष्ट नहीं है 60% लडकिया हिन्दू लडको से विबाह करना चाहती है, एक घटना का मै वर्णन करना चाहता हू मुंबई में एक मुस्लिम नवजवान पति-पत्नी बड़े प्रेम से रहते थे वे एक दुसरे से बहुत ही प्रेम करते थे एक रात को आपस में बिबाद हुआ गुस्से में आकर उस नवजवान ने तीन बार तलाक-तलाक बोल दिया बाद में ध्यान आया की बहुत बड़ी गलती हो गयी क्या करे--? उसकी पत्नी ने कहा की किसी ने सुना ही नहीं यहाँ तो हम दोनों के अलावा कोई नहीं लेकिन उस नवजवान ने कहा की खुदा तो सुन ही रहा था, वह पड़ोस के एक परिचित मौलबी से अपनी रात बीती बताई उस मुल्ले ने कहा की अब तो उस लड़की की किसी दुसरे से निकाह कराना वह उसके साथ रहकर आयेगी फिर वह तलाक दे, उसके बाद आप उससे निकाह कर सकते है उसने सोचा की इस बूढ़े मौलबी से अच्छा ब्यक्ति कहाँ मिलेगा उसने मुल्ला जी से निकाह करा दी दुसरे दिन जब उस मुल्ले से वह नवजवान मिला तो उसने कहा की मै तुम्हारी तरह कोई मूर्ख थोड़े ही हू जो सुन्दर बेगम को तलाक दू, आये दिन ऐसी घटनाये होती रहने से अपनी जीवन सुरक्षित हेतु हिन्दू लडको से ये विबाह चाहती है इस पर भी हिन्दू लडको को बिचार कर उनसे विबाह करना चाहिए.   
          मै हिन्दुओ से निवेदन करना चाहता हू कि इन पर दया नहीं अपने कर्तब्य का पालन करो सारे विश्व में इनकी पहचान आतंकबादी के नाते हो रही है ये दुनिया मारे भी जा रहे है ये सभी हमारे पुर्बजो की संताने है इन्हें अपने धर्म में यानी हिन्दू बनाकर इनके पुर्बजो की आत्माओ को शांति प्रदान कराये, क्या आपको अपने पुर्बजो की संतानों पर दया नहीं आती---? आप तो हमेशा दयालु रहे है आइये इन सभी भूले-भटके लोगो पर दया कर अपने घर में वापस लाकर पुण्य के भागी बने.
सूबेदार सिंह 
पटना 
                     

1 टिप्पणी

lokendra singh ने कहा…

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