धर्म विशेष

हरिहरनाथ मुक्तिनाथ यात्रा पर बरवस स्वर फूटे-------!

हरिहर धरा में पावन यह धाम हो रहा है,
गजपर कृपा के कारण हरिनाम हो रहा है..
         श्रीक्षेत्र में जब इक दिन गज जलबिहार में था,
         सुख में रहा था पूरित वह गज श्रृंगार में था ,
         गजराज का मनोरम आराम हो रहा है.
          गज पर कृपा-------------------------1
खल वृत्ति ग्राह ने तो सोचा आहार आया,
गजराज के चरण को मुह में पकड़ दबाया,
छूटने का सब उपक्रम नाकाम हो रहा है.
गजपर कृपा-------------------------2  
             करुनायी भाव से जब गज ने पुकारा हरि को,
             सब काम छोड़ धाये करने विनाश अरि को,
             चीरा था चक्र नक्र अब गुण-गान हो रहा है.
              गजपर कृपा----------------------------3
गज मुक्त तो हुआ ही मिली मोक्ष भी मगर को,
था यहाँ कौनहारा यह तय नहीं समर को ,
शुभ धर्म यह सनातन अभिराम हो रहा है.
गजपर कृपा-----------------------------4
        --------जय श्रीराम ------- 

1 टिप्पणी

vandana gupta ने कहा…

वाह वाह कितना सुन्दर चित्रण किया है आनन्द आ गया