धर्म विशेष

का पर करूँ सिंगार पिया मोर आंधर----------!



      ''बिहार बीजेपी'' कुछ और ही है लगता है की इसका बीजेपी से कोई संबंध ही नहीं है जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय परामपरा का पालन कर न तो रोज़ा इफ्तार दिया न ही किसी इफ्तार निमंत्रण को स्वीकार किया, वहीं ''बिहार बीजेपी'' नेता इस्लामी टोपी पहन रोज़ा इफ्तार कर हिन्दू निष्ठ कार्यकर्ताओं को अपमानित करने का प्रयास किया, इतना ही नहीं नरेंद्र मोदी नहीं-! नितीश पीएम मेटीरियल हैं बोलकर नितीश को परमोट करते रहे, जब पूरा देश हिन्दुत्व के रंग मे रगा है तब भी बिहार बीजेपी पर कोई असर नहीं है, उन्हें सेकुलर होने में गर्व महसूस हो रहा है जबकि बिहार धर्मांतरण और लव जेहाद का केंद्र बना हुआ है लेकिन कोई भी बीजेपी नेता हिम्मत नहीं जुटा पा रहा कि वह हिन्दुत्व के इस मुद्दे पर बोल सके! राष्ट्रवादी, हिन्दू क्या करे------! 
         यहाँ (बिहार) बीजेपी सात वर्ष तक सत्ता मे भागीदार रही विचार के लिए क्या किया ! तो पता चलेगा की कुछ नहीं हाँ इतना जरूर हुआ वैशाली जिले के एक प्रखण्ड केंद्र पर बीजेपी की बैठक थी उस समय जो संगठन मंत्री थे उन्होने दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद पर बोलते हुए कहा की समाज के अंतिम ब्यक्ति तक को हमे ऊपर उठाना है पीछे बैठा एक ग्रामीण कार्यकर्ता खड़ा होकर कहा, अपने बहुत अच्छी बाते की एक बीजेपी के नेता तो बहुत गरीब थे उनके पास एक छोटी सी गोमती थी अब हज़ार करोण की पार्टी हो गयी है (भ्रष्टाचार को बढ़ावा ) संगठन मंत्री नाराज हो डाटने लगे आखिर करते भी क्या-? बीजेपी के एक नेता ने बृद्धा पेंशन की घोषणा मदर टेरसा के नाम पर की उन्हें सीता, गार्गी याद नहीं क्या करें उन्हे भी तो घर मे रहना पड़ता है! इतना ही नहीं आरा मे ''गो बधशाला'' खुलवाना चाहते थे प्रबल बिरोध के कारण नहीं कर सके फिर अररिया मे गिरिराज सिंह (तत्कालीन पशुपालन मंत्री) को आगे कर एक बड़ा पशु बधशाला खुलवाया। 
         जब आंदोलन शुरू हुआ और जोर पकड़ने लगा तो बीजेपी के एक नेता अपने बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा की जैसे आपके लिए मछली, हरी सब्जी तरकारी है उसी प्रकार गाय भी मुसलमानो के लिए तरकारी है, बीजेपी बिहार के एक बड़े नेता तो लव -जेहाद के प्रेरणा श्रोत ही हैं, एक अन्य नेता जो अपने को संघ का स्वयंसेवक भी कहते है, उनका सभी बड़े अधिकारियों से भी अच्छा संबंध रहता है पहले बिधायक थे अब वे संसद है जिले के स्वयंसेवकों को प्रताड़ित करना, अपने घर पर ही पशु बाज़ार लगवाना, वहाँ से ट्रक द्वारा बंगलादेश के लिए गायें तस्करी कराना यह अच्छा ब्यापार है, अभी-अभी 257 गायें पटना मे पकड़ी गयी हैं कहते है कि उस बाज़ार से भी गायें थी, बेगुसराय के एक नेता जो संघ अथवा बीजेपी के कार्यकर्ताओं पर लगातार गोली चलते रहे या बिरोध करते रहे उनकी छबि बामपंथी है पता नहीं किसकी सुझाव पर अमितशाह उस नेता को अखिल भारतीय सचिव बना दिया आज भी वे संघ के लिए सरदर्द बने हुए हैं, एक केंद्रीय मंत्री को मिला साठ -गाठ कर बरौनी रिफायनरी मे ठेकेदारी बामपंथियों को कैसे मिले अब पक्का हो गया, सत्ता चाहे जिसकी लेकिन बेगुसराय की सत्ता बामपंथियों की ही रहेगी, बीजेपी की वास्तविकता यह है, आये दिन ऐसे बयान जिससे बीजेपी के प्रतिवद्ध वोटरों का मन दुखी हो, उनका अपमान हो जैसे वे (लालू+नितीश) भय के कारन बीजेपी को वोट देंने को मजबूर हैं ! वे अन्य किसी दल को वोट तो नहीं देंगे लेकिन कहीं यह बीजेपी का प्रतिबद्ध वोटर सिथिल न पड़ जाय जिसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ सकता है, लव जेहाद के मुद्दे पर पूज्य योगी आदित्यनाथ का बिरोध करना महगा भी पड़ सकता है क्योंकि मुसलमान तो वोट देने से रहे कहीं हिन्दु प्रतिवद्ध वोटर भी सिथिल पड़ गया तो क्या होगा? हिन्दू समाज क्या करे ? और क्या करे बीजेपी का ईमानदार कार्यकर्ता-----!
         बीजेपी का हजारों -लाखों कार्यकर्ता राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत है हिंदुत्व की आंधी में कार्यकर्ता हताश- निराश उसे रास्ता नहीं मिल रहा क्योंकि ये जो भी नेता हैं भ्रष्टाचार मे लिप्त और हिन्दू बिरोधी है करनी -कथनी बड़ा अंतर दिखाई देता है, जब सत्ता मे आएगे तो इन्हे कार्यकर्ता नहीं दिखाई देगा, हिन्दू विचार नहीं सभी सेकुलर हो हिन्दुत्व का बिरोध करेगे कत्ल खाने खुलवाना, दुर्गाजी, सरस्वती जी की मूर्तियों के विसर्जन पर हमला करवाना, राजगीरि के अधिक मास के मेले मे साधू-संतों की जमीन को मुस्लिम कब्रिस्तान मे परिणित करवाना यही सब करते हैं, बीजेपी कार्यकर्ता की सोच कुछ इस प्रकार हो रहा है-----
         का पर करूँ सिंगार पिया मोर आंधर -----!      

कोई टिप्पणी नहीं