धर्म विशेष

बीजेपी का अंतर दर्शन --------------------------!

 बीजेपी सरकार----!
         जब-जब बीजेपी सत्ता मे आती है वह अपने कार्यकर्ताओं को भूल जाती है यह बात ठीक है की उसका दृष्टिकोण राष्ट्रवादी है लेकिन कार्यकर्ता दुखी होता है इसलिए नहीं कि सत्ता मे उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है बल्कि वह दुखी होता है जब कोई मंत्री कार्यकर्ताओंको छोड़ अपने परिवार, रिसतेदार नहीं तो अपनी जाती से ऊपर नहीं उठ पाता, क्या बीजेपी के नेता सत्ता सुख, केवल और केवल स्वयं ही भोगना चाहते हैं जबकि दूसरे पार्टी के लोग जब सत्ता मे आते हैं तो वे अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं को एक सप्ताह के अंदर सभी राजनैतिक नियुक्तियाँ कर देते हैं वहीं बीजेपी सत्ता मे आए हुए 9 महीने बीत गए सभी स्थानों पर कांग्रेस और वामपंथी लोग सरकार मे बैठे सरकार के काम मे बाधक बने हुए हैं, इन्हे कहीं पर अपने विचार के लोग दिखाई नहीं दे रहे हैं बिहार मे जो नेता हैं जब वे सत्ता मे थे तो अलीगढ़ मुविबि तथा पशु बधशाला खुलवाया, अभी से ही किसी भी पार्टी से आए हुए लोगों का टिकट कनफर्म कर दिये हैं फिर कार्यकर्ता काम क्यों करे-? जो राजनैतिक नियुक्ति हो भी रही है वह कुछ नेताओं के रिसतेदारों के अतिरिक्त किसी की नहीं। 
        तो क्या अकेले मोदी जी ही सरकार चलाएगे, कुछ मंत्री, कुछ संसद या देश भर के लाखों कार्यकर्ता अभी तो लग रहा है कि सरकार कुछ लोग चला रहे हैं यदि सरकार चाहे तो सभी मंत्रालयों मे लाखों कार्यकर्तों को नियुक्त कर सरकार व विचार के पक्ष देश को मोड़ा जा सकता है, कम से कम ब्यूरोकेट द्वारा यह संभव नहीं भारतीय ब्यूरोकेट को भारतीयता अथवा हिन्दुत्व या देश दे कोई मतलब नहीं वह तो सरकार को बदनाम कर पैसा कमाने के अलावा कुछ नहीं करेगे, केंद्र सरकार को चाहिए कि अपने कार्यकर्ताओं पर विसवास कर सत्ता मे उनकी भागीदारी सुनिश्चित करे, नहीं तो न देश न विचार कोई काम नहीं! केवल प्रधानमंत्री अकेले कुछ नहीं कर सकते कार्यकर्ताओं की सत्ता मे भागीदारी ही प्रधानमंत्री की असली सफलता होगी जो देश और पार्टी दोनों का हित करेगे।
       सरकार को अपने काम करने की अवस्यकता है संघ विचार परिवार का काम अहर्निश चलने वाला है हम किसी भी कीमत पर मदर टेरसा के सेवा को उचित नहीं मान सकते अगर वह धर्मांतरण नहीं कराती अथवा चर्च मतांतरण नहीं करता तो आज देश मे तीन करोण ईसाई कहाँ से हो जाते-? अब मतांतरण का खेल बंद होना चाहिए नोबुल पुरस्कार भारत भक्तों को नहीं मिलता अमेरिका मूर्ख इतना देश नहीं ! अमर्त्यसेन को नोबुल मिला उसका धन कहाँ गया ? है किसी के पास इसका उत्तर ?  

1 टिप्पणी

बेनामी ने कहा…

Satya vachan