धर्म विशेष

क्या बीजेपी अपनी गलतियों को स्वीकार करने को तैयार है -----?

क्या बीजेपी अपनी गलतियों को स्वीकार करने को तैयार है---!
            बिहार का चुनाव पुरे देश ही नहीं बल्कि विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है जैसा की प्रत्येक चुनाव के पश्चात नए विकल्प का सपना देखना सेकुलरों का स्वाभाव बन गया है उन्हें लगता है की बिहार ही पूरा देश है उन्हें यह पता नहीं की लोग पुनः लालू यादव से भयाक्रांत हो गए हैं एक बार फिर कुख्यात आतंकवादी सहाबुद्दीन से मिलने वालों की संख्या बढ़ी है, नितीश कुछ भी कहें आये दिन हिंसा हत्या का दौर शुरू हो गया है, अपहरण का उद्द्योग पुनः सिर पर चढ़कर बोलने लगा है, जो बिहारी एक बार पटना, मुजफ्फरपुर अथवा अन्य शहरों में अपने कामों के लेकर लौट आये थे वे पुनः बिहार से बाहर से जाने का बिकल्प खोज रहे हैं नितीश कुमार जिस कानून के राज्य की बात कर रहे हैं कहीं हिंसा, हत्या और अपहरण को क़ानूनी दर्ज तो नहीं देने वाले हैं, सीमांचल में खुशियों का दौर जारी है अब गो हत्या खुलेआम होगी कोई शिकायत करने की हम्मत नहीं करेगा, अब गरीब, वनबासियों की बहन बेटियों का खुलेआम मुस्लिम गुंडे अपहरण करेंगे, अल्पसंख्यक हिन्दुओं का जीना दूभर होगा जो थोड़ा सम्पन्न होंगे वे तो भागकर कहीं चले जायेगे लेकिन गरीब कहाँ जायेगे, वे अपनी बहन-बेटियों की इज्जत लूटते देखने को मजबूर होगे, यह क्षेत्र पाकिस्तान न होते हुए भी पाकिस्तान जैसा ही है । 
         लेकिन इसमे गलती किसकी है कौन ठेकेदार है हिन्दुओं के सुरक्षा की, आखिर हिन्दू किससे उम्मीद बांधे बैठा है, तो ध्यान में आता है की बीजेपी इसकी ठेकेदार है जो हमेसा राष्ट्रवाद की बात करती है जिससे विश्व भर के हिन्दुओं को बहुत उम्मीद भी है भारत के प्रधानमंत्री वर्तमान भारत और हिन्दू समाज के उम्मीद की एक किरण हैं, फिर ये चूक कहाँ और कैसे हुई ! कैसे बिहार में हिंदुत्व अपमानित हुआ जहाँ प्रधानमंत्री की सभा में लाखों लोग आते थे, इतना संसाधन, इतने कार्यकर्ता, इतना बड़ा संगठन आखिर बीजेपी पराजित क्यों हुई ?  
         ध्यान में आता है कि बीजेपी वोट लेते समय तो हिंदुत्व का राग अलापती है ३७० की बात करती है हिन्दुओं का वोट तो चाहती है लेकिन जब इसके नेता देवघर जाते हैं तो कार्यकर्ताओं के आग्रह करने पर भी वे भगवान के दर्शन नहीं करते तब कार्यकर्ता का मन कैसा होता है, कूड़े दान में पड़ा हुआ भागलपुर दंगे की फाइल पुनः निकलवाकर जिन्होंने हिन्दू समाज को बचाया था उन्हें मुकदमे में फंसा, जगह -जगह भाषण देना की मैंने सजा दिलाई भागलपुर लोकसभा भी हारे और विधान सभा भी, अररिया में पशु बधशाला कौन खुलवाया, कौन अपने कार्यकर्ताओं से कहा की जैसे मछली आपके लिए तरकारी वैसे ही मुसलमानों के लिए गाय भी तरकारी है गाय और मछली की बराबरी की जाती है क्या उन्हे हम चिन्हित करेगे, अलीगढ मुस्लिम विश्व विद्यालय खुलवाने में किसकी भूमिका है वह कौन नेता जो संगठन और पार्टी से अपने-आप को बड़ा समझता है, कौन हैं वे लोग जो संघ विचार के साथ बलात्कार कर रहे हैं ! इसका जिम्मेदार कौन है क्या संगठन अथवा पार्टी इस पर विचार करेगी ?
         आखिर बीजेपी को क्यों वोट चाहिए --! जिसके पास खाने को कुछ नहीं, रहने को घर नहीं, सूखे में फसल नहीं उसे स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन, डिजटल इंडिया, और मेकिंग इंडिया से क्या मतलब ? बिहार में सुखा पड़ा बीजेपी की केंद्र सरकार ने क्या किया क्यों चाहिए वोट ! दूर संचार विभाग तथा बीएसएनएल से सभी ऊब गए हैं बात नहीं हो सकती यहाँ चर्चा का विषय रहता है कि मंत्री ने प्राइवेट कंपनियों से घुस लेकर बीएसएनएल की सर्विस ख़राब कर रखी है, रेल मंत्रालय तो लगता है की भारत का हो न ठीक चुनाव के समय प्लेटफार्म टिकट २० रु हो गया, टिकट वापसी कितनी महगी ही गयी है क्या इसकी कल्पना है किसी को ? चुनाव हराने के लिए तो केवल कृषि, बीएसएनएल और रेल मंत्रालय ही पर्याप्त है और भारत के सबसे योग्य नेता जो चुनाव हारने और हराने के पश्चात भी मंत्री है लोगों का कहना है की वे ही सरकार चलाते हैं वे अटल बिहारी के प्रमोद महाजन हैं, जब तक बीजेपी को समाप्त नहीं कर लगे तब-तक दम नहीं लेंगे, वे फाइव स्टार कल्चर बीजेपी बनाने में लगे हुए हैं लेकिन क्या देश इसे स्वीकार करेगा !
         हमें लगता है बीजेपी में जमीनी नेताओं की कमी है अथवा उनकी कोई सुनता ही नहीं वे सब के सब अप्रासंगिक हो गए हैं बीजेपी को अपने स्थानीय कार्यकर्ताओं पर विस्वास नहीं रहा बाहर से कार्यकर्ता बुलाना स्थानीय कार्यकर्ताओं को उपेक्षित करना बिहार में पहली बार कार्यकर्तों को लगा की अब वे कार्यकर्ता नहीं बल्कि एक नौकर की भूमिका में है, क्या बीजेपी निर्णय करने का साहस दिखा पायेगी, जनाधार वाले नेताओं की पुंछ होगी यदि इन सब विषयों पर विचार नहीं होगा, तो पार्टी कांग्रेस के रास्ते पर बढ़ चली है जहाँ जीत का श्रेय तो सोनिया-राहुल को हार कि जिम्मेदारी सामूहिक होती है, ----विचारणीय है बीजेपी नेतृत्व के लिए-!              

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