धर्म विशेष

तसलीमा नसरीन के स्थायी वीसा के विचार पर इतना हाय-तोबा क्यों-----?

      तसलीमा नसरीन के आवासीय वीजा पर ------------
      सेकुलर नेता उर्दू मीडिया हाय -तोबा मचाए हुए है ऐसा क्यों क्या यह इस्लामिक देश है जो हदीस और कुरान से चलेगा-? उर्दू टाइम्स ने कहा है की जस्टिस काटजू के घृणित चेहरे का नकाब हट गया है, काटजू ने कहा था तसलीमा नसरीन को भारत मे स्थायी वीसा देकर रहने की अनुमति देनी चाहिए, जब तसलीमा नसरीन गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह से मिली तो उन्होने स्थायी वीसा देने के लिए विचार से अवगत कराया, वह चाहे जब-तक भारत मे रह सकेगी फिर क्या था इस्लामिक मीडिया ने तो हाय-तोबा मचाना शुरू कर दिया सेकुलर नेताओं और उर्दू मीडिया का कहना है कि वह जब -तक जिंदा रहेगी तब-तक मुसलमानों के छाती पर मूंग की दाल दलती रहेगी, मोदी सरकार के रवैये से हमे कोई हैरानी नहीं है क्योंकि उनका वजूद मुसलमानो की दुश्मनी से तैयार हुआ है, उर्दू टाइम्स ने यहाँ तक कहा कि मोदी सरकार ने मुसलमानों के घाव पर नमक लगाने जैसा काम किया है, दैनिक उर्दू सहारा, उर्दू दैनिक सियासत ने लिखा है की मोदी सरकार मुसलमानों की भावनाओ के साथ खेलवाड़ कर रही है सभी बौखलाए हुए हैं, तसलीमा नसरीन को वीसा मिलना ही चाहिए उसे भारत मे स्थायी रहने की ब्यवस्था करनी चाहिये क्योंकि भारत एक मानतावादी लोकतान्त्रिक देश है जहां सभी विचारों व धर्मों के लोगो को रहने की स्वतन्त्रता है और पूरा देश तसलीमा के साथ है, जैसा तसलीमा ने कहा भारत मेरे घर जैसा है उसका स्वागत भी घर जैसा होना ही चाहिए भारत मे डॉ जाकिर नाईक जैसा देशद्रोही आतंकवादी रह सकता है तो तसलीमा नसरीन क्यों नहीं -?
       आखिर उर्दू अखबार और उर्दू मीडिया क्या चाहते है, मुसलमानों की मंशा क्या है ? वे कहते हैं कि मुसलमानों के भावनाओं का ख्याल सरकार नहीं रख पा रही है, वास्तविकता यह है कि मुसलमानों को अपने बारे मे विचार करना चाहिए जिस देश मे वे रहते हैं क्या उन्हे उस देश की जनता के भावनाओं का उन्हें ख्याल है ! हिन्दू समाज इनसे कितना पीड़ित है असम, बिहार सीमा, बंगाल, प उ प्र, झारखंड के सीमांचल और हैदरावाद के हिन्दुओ से पूछा जा सकता है, हिन्दू समाज की बहू-बेटियाँ लव जेहाद की शिकार हो रही हैं गाय जिसे हिन्दू माँ मानता है मुसलमान उसे जिद पूर्बक काटता है, हिन्दू समाज के देबी -देवताओं की मूर्तियों को तोड़ने मे जन्नत महसूस करता है, इसके बावजूद चीन जैसा भारत ने रोज़ा पर प्रतिबंध तो नहीं लगाया, फ्रांस जैसा मस्जिदों को नहीं तोड़ा, जर्मनी जैसा बुर्कों पर प्रतिबंध नहीं लगाया, जापान जैसा अरबी लिपि पर प्रतिबंध नहीं लगाया, जापान का प्रधानमंत्री किसी भी इस्लामिक देश का दौरा नहीं करता, रूश के राष्ट्रपति ने कहा यदि शरिया कानून चाहिए तो वे वहाँ जा सकते हैं जहां शरिया कानून है भारत ने तो ऐसा नहीं कहा, ऑस्ट्रेलिया जैसा वर्ताव ( प्रधानमंत्री ने कहा जिन्हे यहाँ की संस्कृति नहीं चाहिए वे तुरंत देश छोड़ सकते हैं) तो भारत ने नहीं किया, लेकिन भविष्य मे यदि मुसलमानों का ब्यवहार भारत देश जैसा नहीं हुआ और बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का ख्याल मुसलमानों ने नहीं रखा तो वह सब हो सकता है जो अन्य देशों में इनके साथ हो रहा है चाहे जिसकी सरकार हो।         

2 टिप्‍पणियां

बेनामी ने कहा…

ढोंगी सेकुलरिष्ट भारत का इस्लामी कारन करना चाहते हैं.

बेनामी ने कहा…

taslima nasrin ke andar ek bhartiya mahila ke gun hai we bharat me rahna chahiti hai to unhe sthayi visa milna hi chahiye we ghuspaithi to nahi !