संत झूलेलाल के अवतरण के कारण-----!


शनिवार, 28 जून 2014

     
          संत झुलेलाल का ऐसे समय अवतरण हुआ जब हिन्दू समाज मुस्लिम आक्रांताओं से त्राहि-त्राहि कर रहा था मंदिर ढहाए जा रहे थे हिंदुओं को गुलाम बना अरब की बाज़ारों मे बेचा जाता हिन्दू महिलाओं का बलात हरण तो सामान्य बात हो गयी थी ऐसे लगता था हिन्दू अस्तित्व खतरे मे पड़ गया -- कौन बचाएगा और कैसे बचेगा यह मानवतावादी धर्म यह प्रत्येक मनुष्य के मन मे थी, नौ सौ साल पहले की बात है लाहौर शहर नष्ट होकर मुस्लिम शहर बन चुका था मकरखान नामक अहंकारी मुस्लिम शासक था जिसने हिन्दुओ का जीना दूभर कर रखा था बलात धर्मांतरण जो असह्य था मरखखान ने फरमान जारी किया या तो सभी हिन्दू इस्लाम स्वीकार ले या आराधना करते हुए अपने ईश्वर को प्रकट कारें इस आदेश से हिन्दू कंपित हो गया तभी किसी ने सुझाव दिया की सिंधु सागर तट पर भगवान की आराधना की जाय सभी दरियासाह की आराधना मे सागर पर हिन्दू समाज अपार जैसे उमड़ पड़ा या तो मरेगे या तरेगे अपने आराध्य को पाएगे यह संकल्प झाझ, मजीरा इत्यादि वाद्य यंत्र लेकर हिन्दू समुदाय सिंधु तट पर खड़ा, विद्वान पंडितों ने वरुण देवता की पूजा शुरू की तब-तक सिंधु जल मे अजीब सी हलचल हुई आकाशवाणी हुई तुम सभी श्रद्धालु अपने-अपने घर जावो तुम्हारा संकट दूर करने मै नरसपुर मे जन्म लेने वाला हूँ इस आकाशवाणी सुन सभी हर्ष से नाच उठे ठक्कर रत्नराय के यहाँ,जो अपने गाव के अग्रगणी ब्यक्ति थे ऐसे समय मे वर्ष प्रतिपदा के दिन झुलेलाल का जन्म हुआ सारा गाव, हिन्दू समाज आनंद उत्सव मनाने लगा और यह समाचार मरखखान के यहाँ तक पहुच गया ।
          नबाब ने अपने मंत्री को गुलाब की पंखुड़ियों मे जहर लगा उस बालक की हत्या हेतु भेजा, जब वजीर रत्नराय के यहाँ पहुचा तो बालक एक दृष्टि से वजीर को देखता रहा देखते-देखते वह एक घड़ी का जन्म लिया बालक दस वर्षीय दिखाई देने लगा वह आश्चर्यकित हो उठा इतना ही नहीं वह वयस्क और फिर सफ़ेद दाढ़ी- मुछ वाला बूढ़ा हो गया, वजीर की परेशानी बढ़ गयी परेशान हो गया रत्नराय से कहा इस दिब्य  बालक को नबाब अपने घर देखना चाहते हैं, पिता ने छमा याचना करते हुए कहा इतने छोटे बालक को कैसे मै ले चालूगा मै एक महीने मे लेकर आवुगा इधर यह सब हो ही रहा था की मरखसह ने देखा की हजारों की सेना के साथ सागर से वह बालक चला आ रहा है वह भय से काँप गया छमा याचना करने लगा फिर कहा हे वरुण अवतार आप यहा से चले जायिए मै यह सब अत्याचार बंद कर दूगा मै कभी कोई अनाचार नहीं करुगा, हे अवतारी औलिया मैंने आपको बुलाया था न की सेना को कृपया आप शांति हो जाय तब-तक सारी सेना सहित सब कुछ समाप्त हो गया, वजीर जब दरवार पहुचा तो नबाब ने कहा की तू भले ही आज आया परंतु वह बालक तो सेना सहित कल रात्री मे ही यहा आ चुका था साह की बात सुन वह आश्चर्य चकित पूछा की तब क्या हुआ सरकार ! साह ने बताया की वह किसी के रोकने से नहीं रुका वह क्या था समझ मे नहीं आया।
        वे वरुणदेव के अवतार थे उन्होने हिन्दू समाज पर होते अत्याचार से मुक्ति दिलाई इस्लामिक सासन भयाक्रांत हो गया अत्याचार बंद हो गए वे हिन्दू रक्षक होकर पूजित हो बढ़ते हुए धर्मांतरण, इस्लामी करण को रोका अश्वारूढ़ हो उन्होने हिन्दू समाज को उपदेश दे वे त्रिशूल गाड़ स्वर्ग को चले गए, जब हिन्दू समाज के लोगो को पता चला तो सभी जन भागकर आए देखते-देखते जहां त्रिशूल गड़ा था वहाँ सागर हो गया यह चमत्कार देख जय झुलेलाल का भक्ति गान करने लगे और वह स्थान तीर्थस्थान बन गया ।        
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