संघ (आरएसएस) क़ा दुनिया में सुख,समृद्धि,शांति क़ा आवाहन


     
                राची के रातू मैदान में हजारो संघ के पूर्ण गणवेश धारी स्वयंसेवको को संघ के प.पु. सरसंघचालक मोहन भगवत ने संबोधित करते हुए कहा की यदि समस्यावो पर बोलना है तो पूरा समय इसी पर चला जायेगा ,समस्याओ के समाधान पर बोलना ठीक रहेगा अपने देश की जो समस्या है वह आतंकबाद, बेरोजगारी, घुसपैठ, पाकिस्तान और चीन ,पहले तो पाकिस्तान, चीन के बारे में जनता को बताना पड़ता था लेकिन अब जनता को यह सब पता है, चीन पर भरोसा करना कितना ठीक है यह उसने ही हिंदी-चीनी, भाई-भाई के नारे बाद आक्रमण करके बता दिया की वह भरोसे मंद नहीं है, पाकिस्तान का जो भारत बिरोध है वह हिन्दू बिरोध पर ही आधारित व निर्मित है, कैसे भरोसा किया जा सकता है, प्रतिदिन आतंकबादी हमले करना आई.एस.आई. के द्वारा फैक करेंसी भी भारत में भेजना, समस्याए बहुत है लेकिन समाधान क्या है--? तो समाधान एक ही वह यह की जब तक दुनिया में यह चलता रहेगा की मेरी ही भाषा को इश्वर समझता है मेरा ही वेश उसे पसंद है, मेरी ही पूजा पद्धति ठीक है, इसी को दुनिया को स्वीकार करना पड़ेगा, यानी मै ही ठीक हु, जब तक यह मान्यता रहेगी तब तक समस्या क़ा समाधान नहीं होगा. कुछ लोग बिशेष प्रकार क़ा पहनावा पहनकर वे क्या दिखाना चाहते है--? 
            एक तरफ सम्पूर्ण दुनिया में इस्लाम के नाम पर अरेबियन राष्ट्रबाद दूसरी तरफ अमेरिका पोप को माध्यम बनाकर अमेरिकन राष्ट्रबाद फ़ैलाने के लिए मखतब, मदरसा और चर्च सेवा के नाम पर अपनी -अपनी संस्कृति व राष्ट्रीयता को थोपने क़ा प्रयत्न चल रहा है। यही सभी समस्याओ की जड़ है। दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति किसी प्रकार की पूजा पद्धति क़ा बिरोध नहीं करती, बसुधैवकुटुम्बकम, प्रकृति के साथ चलना उसके साथ तादाम्य जीवन बनाकर जीवन जीने से, जो हमारी पूरानी परंपरा है, वही सभी समस्याओ क़ा समाधान है. इस नाते हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति क़ा संरक्षण संबर्धन के द्वारा ही सम्पूर्ण बिश्व में सुख समृधि और शांति मिल सकती है। भारत की सभी समस्याओ क़ा समाधान इसी में निहित है।

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