धर्म विशेष

भारत के लिए नेपाल कहीं बणवा- नल तो नहीं बनता जा रहा है------?

          एक दिन इसी नवम्बर में रक्सौल में अपने एक कार्यकर्ता के यहाँ बैठा था उन्होंने बड़ी चिंता ब्यक्त की कहा की इतनी अधिक ट्रको की संख्या इतना खाद्य सामग्री और इन्फ्रा स्टक्चर के सामानों (सरिया,सीमेंट, स्टील के अन्य सामान) की खपत है क्या -? आखिर नेपाल की जनसंख्या ही क्या है-? दो करोण सत्तर लाख, लगभग आधी आवादी तो भारत में रोजी-रोटी कमाते खाते है यह भी उनका एक घर है किसी भारतीय को कोई ऐतराज नहीं, मैंने एक अपने प्रचारक जीवन की एक घटना बताई में नेपालगंज के संघ शिक्षा वर्ग में गया था समारोप मेरा बौद्धिक था मैंने अपने भाषण में कहा की नेपाल में इतना चावल पैदा होता था की वह बिहार व भारत के अन्य राज्य में जाता था आज उत्पादन कम हो गया है क्या -? नहीं उत्पादन बढा है तो कहाँ जाता है ये चावल, गेहूं पता चला की यह चावल खासा (तिब्बत ) बार्डर से काठमांडू होता हुआ तिब्बत (चीन) पहुच रहा है मैंने दार्चुला जिले की घटना बताई वह पर भेड़ी चराने वाले १०० की झुण्ड में भेड़ी पर ५-५, १०-१० किलो चावल एक-एक भेड़ी पर रखकर सीमा पर कराते है, एक-एक झुण्ड एक-एक ट्रक चावल पार कर देते है ऐसे दार्चुला, बैतडी व अन्य जिलो से यह अवैध उद्द्योग चलता रहता है यह भी चाइना की चाल है मेरे बौद्धिक के पश्चात् कुछ लोगो को यह बात अच्छी नहीं लगी उन्हें लगा की नेपाल में चीन का बिरोध यानी मावोबादी का बिरोध, मैंने अपने उस कार्यकर्ता को यह बताने का प्रयत्न किया की ये सुनियोजित षण्यंत्र भारत के खिलाफ है चाइना तिब्बत को हड़प तो लिया लेकिन उसकी खाद्य आपूर्ति व अन्य सामग्री की पूर्ति नहीं कर सकता वह सक्षम नहीं है क्यों की केवल तिब्बत में रेल लाइने बिछा देने से काम नहीं चलेगा विजिंग से जब कोई सामग्री चलती है तो उसका खर्चा अधिक और उचाई अधिक होने के करण तरल पदार्थ जम जाता है यानी वर्फ बन जाने की संभावना रहती है इस नाते चीन के बस की बात नहीं जो तिब्बत में सब सामग्री उपलब्ध करा सके इसके लिए नेपाल का उपयोग कर नंबर दो के रास्ते भारत से नेपाल आयात कर चीन में पहुचना यही ब्यापार इस समय जोरो पर है.
         बचपन में रात्रि में जब हम सोते तो हमारी माँ कोई न कोई कहानी सुनती एक दिन बताया की समुद्र में पानी न घटता है न बढ़ता है क्यों की उसमे एक बणवा नल है जो वर्षात अथवा नदियों का पानी हो वह बणवा नल के रास्ते कहाँ जाता है पता नहीं चलता--? आज वही हाल भारत के लिए नेपाल में लागू होती है नेपाल में कोई सामग्री भारत से जाती है तो किसी को कोई कष्ट नहीं क्यों की नेपाल हमारा सहोदर भाई है हम उसकी सहायता करेगे ही करना भी चाहिए लेकिन अगर चीन को कोई चाल है तो भारत को सावधान होना पड़ेगा , भारत सीमा से २२ द्वारो से हजारो ट्रक, कंटेनर नेपाल में प्रवेश करते है आखिर क्या यह खपत नेपाल में है या कुछ और होता है नेपाल भारत के लिए क्या है कहीं ये भारत के लिए बणवा नल तो नहीं साबित हो रहा है, नेपाल में जो मोनार्की राष्ट्रबाद यानी भारत बिरोध यही राष्ट्रीयता मावोबादियो ने भी अपनाया हम भारत से अलग, विश्व पटल पर दिखाने की होड़ में भारत बिरोध कहीं-न कहीं हिन्दू बिरोध के रूप में प्रकट होकर आत्मघाती हो गया, एक तरफ इसका पूरा लाभ पाकिस्तान ने उठाया ISI के मध्यम से नेपाल रास्ते फैक करेंसी भेजकर भारतीय अर्थ ब्यवस्था को खोखला करने का प्रयत्न, दूसरी तरफ चीन ने खाद्य सामग्री के अतिरिक्त बहुत सारे कच्चे सामान अवैध तरीके से तिब्बत लाकर भारतीय अर्थ ब्यवस्था को बर्बाद करने का प्रयास कर रहा है भारतीय सीमा से प्रति दिन हज़ारों ट्रक सामान कहाँ जाता है-? कुछ पता नहीं चलता इसकी जाँच होनी चाहिए भारत सरकार यदि समय रहते नहीं चैतन्य हुई तो इसका परिणाम भारत के हित में नहीं होगा.