कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना ----- रामबिलास पासवान


बुधवार, 19 मार्च 2014

       
        रामबिलास पासवान भारतीय राजनीती की वह कड़ी हैं जिन्हे समझना बड़ा ही कठिन है ये वही पासवान हैं जिन्हे लालूप्रसाद यादव ने बिना किसी बिधायक व बिना किसी शर्त के राज्यसभा में भेजा ये उनके नहीं हुए तो बीजेपी के क्या होगे यह तो संघ परिवार को समझना होगा ? रामबिलास वह जंतु हैं जिन्होंने अच्छी खासी अटल जी की सरकार से समर्थन वापस लिया था ये वही हैं जिन्होंने पानी पी-पीकर नरेंद्र मोदी को गली देते रहे हैं मुस्लिम वोट बैंक की राजनीती हेतु अपनी पार्टी के बैनर तले मिशनरियों से धन लेकर ईसाईकरण कराना हिन्दू समाज को गाली देना अपना कर्तब्य समझते थे, क्या ये नरेंद्र मोदी अथवा बीजेपी के लिए ईमानदार हैं ? ऐसा हो नहीं सकता कुत्ते की पूछ कभी सीधी नहीं हो सकती संघ परिवार के साथ जाना कोई न कोई कारण जरुर होगा.
         आइये हम इसका विश्लेषण करते हैं यह सभी को पता है की संघ परिवार समरसता में विस्वास करता है इसी का लाभ उठाना और धोखा देना अभी तक तो यही हुआ है उत्तर प्रदेश में जब मायावती के साथ समरसता के नाम पर समझौता हो रहा था तब कल्याण सिंह इसका बिरोध कर रहे थे किसी ने नहीं सुना बीजेपी के चाणक्यों ने कार्यर्ताओं की इक्षा के बिपरीत मायावती को मुख्यमंत्री बनाया उत्तरप्रदेश में आजतक पार्टी खड़ी नहीं हुई, हमने बीजू जनता दल से समझौता किया उसका परिणाम जो हुआ सभी जानते हैं हमने सबक नहीं सीखा बिहार में नितीस कुमार से समझौता जिसके पास केवल सात बिधायक थे हमने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया इतना ही नहीं बीजेपी के एक नेता अभी तक नितीश को PM मेटीरियल बता रहे थे अंत उसने अपमान पूर्बक निकाल बाहर फेंकदिया आखिर बीजेपी का नेतृत्व क्या करना चाहता है ? यहाँ प्रदेश का नेतृत्व बीजेपी के सिद्धांत और कार्यकर्ताओं के अनुरूप नहीं है.
         बीजेपी का मिशन २७२+ का पूरा न हो इसका पूरा प्रबंध कुछ लोग कर रहे हैं कहीं ये कदम उसी का एक हिसा तो नहीं ! अंत में रामबिलास यह कहें कि मोदी को छोड़कर किसी को प्रधानमंत्री बनाये तभी समर्थन या कुछ ऐसे लोगो को टिकट देना जो अंत में किसी और के नाम पर सहमत हों जो कुछ सेकुलर हों फिर बीजेपी के मिशन का क्या होगा बीजेपी को इसपर विचार करना चाहिए कि अस्तीन के सांप कहाँ छिपे हैं ? बीजेपी के कुछ नेता यह कह रहे हैं कि रामबिलास ५% वोट को सिफ्ट करने की छमता रखते है यह कितना सही होगा ! कार्यकर्ता इसके बिरोध में है बीजेपी वैसे ही प्रदेश में ३० सीट जीतने वाली थी अब इस समझौते के तहत केवल ३० सीट पर ही लड़ेगी फिर रामबिलास जैसों का खेल शुरू होगा वैसे रामबिलास इसमें माहिर है उनका अनुभव भी है वे मुख्यमंत्री बनने का भी सौदा कर सकते हैं उन्होंने देखा है कि नितीश कैसे मुख्यमंत्री बने हैं वे भी बहुत दिनों से बिहार के मुख्यमंत्री का सपना देख रहे हैं वे दलित के नाम पर सबसे योग्य मुख्यमंत्री बनाने की गुहार लगायेगे बीजेपी उन्हें मुख्यमंत्री बनाएगी भी क्योंकि बीजेपी को अपना ब्यक्ति अच्छा नहीं लगता बाहरी ही अच्छा लगता है उसके कई उदहारण मौजूद हैं फिर सुशील जी का क्या होगा ? फिर हमारा विचार ! बांग्लादेशी घुष्पैठ, अलीगढ मुस्लिम विश्व विद्यालय, गोरक्षा, इस्लामिक आतंकवाद, लव ज़ेहाद जैसे मुद्दो का क्या होगा-----?    
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