धर्म विशेष

प्रचारक कर्मयोगी श्री राकेश कुमार जी के असमय निधन पर शोक संवेदना----!

           मेरे परम श्रद्धेय मित्र श्री बालमुकुंद जी का फोन ठीक 12 से कुछ ऊपर है वे फोन पर कुछ ठीक से बोल नहीं प रहे थे उन्होने कहा की बहुत दुखद समाचार है और वे बोले श्री राकेश जी का सड़क दुर्घटना मे मृत्यु हो गयी उनके साथ श्री अशोक प्रभाकर भी थे वे स्वस्थ है उनसे बहुत बात नहीं हो सकी मैंने अशोक जी से बात की मैंने पूछा की आप कैसे हैं ठीक हैं न-! उन्होने कहा अब ठीक होने से क्या मित्र तो चला गया-------! मेरे कमरे मे मा॰ दत्ता जी हैं उन्हे बैठक मे जाना है कैसे सूचित करू तब-तक वे बैठक मे चले गए लौट कर आने पर पूछा की आप सोये नहीं नीद कैसे आती मैंने कहा बहुत दुखद समाचार है फिर मैंने उन्हे इस दुखद समाचार से अवगत कराया वे स्तब्ध कुछ देर देखते रहे---! राकेश जी कोई 56 वर्ष के थे स्नातकोत्तर शिक्षा के पश्चात वे ''हिन्दवः सोधरा सर्वे न हिन्दू पतितो भवेत'' भारत माता ही आराध्य, दरिद्र नारायण की सेवा ही लक्ष्य मान संघ के प्रचारक निकले वे लुधियाना के पास पंजाब के रहने वाले थे बिभिन्न दायित्यों को का निर्वाहन करते हुए जम्मू कश्मीर जैसे कठिन प्रांत के प्रचारक बने, आठ वर्षों तक प्रांत प्रचारक रहे, उनके अंदर कभी राजनैतिक महत्वाकांक्षा नहीं थी किसी भी राजनेता से संपर्क स्थापित करना स्वभाव मे नहीं था कितना भी कठिन परिस्थित क्यों न हो वे हसते-खेलते समाधान करना स्वभाव मे था सादगी तो उन्हे देखते झलकती थी।  
        संगठन उनकी क्षमता देखते हुये भारतीय सीमा का काम दिया उन्होने बड़ी ही कुशलता से उन्होने अपने कार्य का निर्वहन किया बहुत ही अल्पसमय मे भारत के समुद्री सीमा से लेकर दुर्गम हिमालय तक संगठन खड़ा कर दिया उन्होने यह बताया की सीमा की रक्षा का कार्य केवल सैनिको का ही नहीं बल्कि समाज का भी है, एक अद्भुत कार्यक्रम के माध्यम (सरहद को प्रणाम)  से सेना के मनोबल बढ़ाने का काम किया हमारा सौभाग्य था की साथ काम करने का मौका मिला वे हमेशा हँसते मिलते उनकी याद हमे काम करने की प्रेरणा देगी आज 11 बजे वे जैसलमेर से पोखरण के लिए श्री अशोक प्रभाकर के साथ जा रहे थे अचानक गाड़ी कंट्रोल से बाहर हो गयी गाड़ी पलट गयी राकेश जी ने तो यह भी मौका नहीं दिया की उन्हे हास्पिटल ले जाया जा सके, उन्होने यह चरितार्थ किया ''तेरा वैभव अमर रहे माँ हम दिन चार रहे न रहे,'' उनका तत्काल देहांत हो गया अशोक जी को चोट आयी है एक कार्यकर्ता और भी हमने खोया संघ की बड़ी छति हुई जिसकी पूर्ति होना मुसकिल, भगवान उनकी आत्मा को शांति दे संघ परिवार धर्मजागरण समन्वय विभाग की तरफ से उनके परिवार को इस दुख सहन करने की क्षमता दे यह ईश्वर से यही प्रार्थना।   

1 टिप्पणी

बेनामी ने कहा…

कौन कहता है की वे चले गए! वे गए हैं जरूर इस नाते उन्हे विनम्र श्रद्धांजलि,लेकिन उनकी प्रतिज्ञा जो आजन्म भारत माता की सेवा का उसका क्या होगा वे फिर जन्म लेगे और संघ के प्रचारक बन हिन्दू समाज और भारत माता की सेवा करेगे।