धर्म विशेष

उर्दू अखबार या पाकिस्तानी. मानवाधिकार बादी या आतंकबादी

       मैंने अखबार में पाकिस्ताननामा पढ़ा जिसमे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से बिशेष जाच दल ने जो पूछताछ की है उसके बारे में है .इन अखबारों को उर्दू,मुस्लिम या पाकिस्तानी अखबार कहा जाय.इन्हें तो पाकिस्तानी ही कहना उचित रहेगा.ये सारे अखबार बड़े उत्साहित है ,वास्तव में ये वे लोग है जो संबिधान को नहीं मानते,मोदी तो संबैधानिक मुख्यमंत्री है । शायद उन्हें पता नहीं,उर्दू अखबारों की भाषा पाकिस्तान की भाषा है। दिवंगत कांग्रेस नेता एहसान जाफरी को दंगइयो ने आखिर निशाना क्यों बनाया ,यह सभी को पता है की कांग्रेस में ऐसे तमाम लोगो को पाल रक्खा जाता है जो देश में दंगा फसाद करा सके वास्तव में जाफरी ऐसे लोगो में थे,मै यह नहीं कहता की एहसान जाफरी ने पछले कितनो दंगो में कितने हिन्दुओ क़ा नुकसान किया था लेकिन यह तो सत्य है की आखिर जाफरी को ही निशाना क्यों बनाया यह तो जाच क़ा बिषय है। वैसे कांग्रेस के पचास वर्ष के शासन में पचास हज़ार दंगा हुवा है जिनमे हजारो जाने गयी है करोनो क़ा नुकसान हुवा है इसकी जाच क्यों नहीं जो स्वयं नंगे है उन्हें शर्म नाम की कोई चीज नहीं.गोधरा में जलाये गए लोग मनुष्य नहीं थे क्या। इस पर चर्चा क्यों नहीं।
       वास्तव में गुजरात में जो लोग खुराफात कर रहे है वे कोई देश के हितैसी नहीं ,उन्हें भारत को बदनाम करना ही मात्र उद्देश्य तीस्ता जावेद जो अपना नाम बदल कर हिन्दुओ को गुमराह करने क़ा प्रयत्न कर रही है। आज उनके विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो गया है।उनके बैंक खातो व अन्य क्रिया कलापों जाच होनी चाहिए। और उनपर जानता को गुमराह करने के लिए देश द्रोह क़ा मुकदमा होना चाहिए।
१-सुप्रीम कोर्ट में पेश याचिका में नरोदा मामले के एक मुख्या गवाह नानुमिया मालिक ने कहा की शादी सुदा मदीना के साथ दंगइयो ने बलात्कार किया.एस.आई .टी.विशेष जाच दल को मालिक ने बताया की मदीना के साथ बलात्कार क़ा आरोप तीस्ता जावेद के कहने पर लगाया।
२-आठ वर्षो से मानवाधिकार कार्यकर्ता ,नरोदा पटिया मामले के पीड़ित आरोप लगा रहे थे की दंगइयो ने गर्भवती कौसर बनो क़ा पेट फाड़ दिया .इसी मामले में कौसर के शव क़ा पोस्मार्टम करने वाले डा.कनोडिया कहते हैकि उसकी मौत दंगो के दौरान जलने से हुई और उसका गर्भ सही हालत में था।
३-गुलबर्ग मामले में एस,आई टी.के करीब बीस गवाहों के बयां लिए थे ,जो पहले टैप किये हुए थे ,जिसपर एस.आई.टी.ने आपत्ति की.अब मुस्लिम गवाह अपना बयां बीडियो टेप किया जाने से इंकार करते है.एस.आई.टी.की ओर से रिकार्ड किये बयां पहले से तैयार बयानों से मेल नहीं खाते।
        तीस्ता जावेद अन्य मानवाधिकार बादियो की पोल कुल गई है.भारत,गुजरात और हिन्दुओ को बदनाम करने के अलावा और कुछ नहीं,इस मुहीम में बिदेशी सोनिया,कांग्रेस ,बामपंथी सभी सामिल है.जब की गुजरात ही नहीं सम्पूर्ण हिन्दू समाज नरेन्द्र मोदी के साथ खड़ा है।वास्तव में हिन्दुओ के सहिशुनता क़ा मखौल उड़ाया जा रहा है.

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