धर्म विशेष

गृहमंत्री के सेकुलर विचार का दोष है वे समझ नहीं पा रहे है की वे मुसलमानों का हित नहीं कर रहे हैं-----!


गृहमंत्री       गृहमंत्री जी ने अनायास ही मुसलमानो के बारे मे नहीं बोला या पत्र लिखा है उन्होंने जानबूझ कर हिन्दू समाज को चिढाने का काम किया है अच्छा होता की वे यह पत्र मुसलमानों के नाम लिखते, हिन्दू तो स्वभावतः जियो और जीने दो मे विसवास रखता है वही अहिंसा परमोधरमह का पालन करता है चीटी को चारा देने के अतिरिक्त प्रत्येक जीव- जन्तु मे ईश्वर का वास का अनुभव, प्रत्येक वनस्पतियों मे औषधि सभी पेड़-पौधों को ईश्वर मान पूजा करता है इसलिए हिन्दू को शिक्षा देने की अवस्यकता नहीं है मानवता तो उसके जिंश में है, वह तो मुहम्मद को भी महापुरुष मानाने को तैयार बैठा है लेकिन क्या इस्लाम मतावलम्बी भगवान राम को महापुरुष मानेगे -? उदारता तो हिन्दू समाज को विरासत में मिली है, क्या मुसलमान भी इस तरफ हाथ बढायेगे--? इस समय जो भी सरकारें हैं अधिकांस सभी सेकुलर हैं वे सभी केवल मुसलमानों की ही चिंता कर रही हैं हिन्दू तो नंबर का नागरिक बन चुका है।
      गृहमंत्री जी जानबूझ कर हिन्दू समाज को बदनाम करना चाहते है उनको चाहिए की इस्लाम का धर्मग्रन्थ कुरान को पढ़े और मुसलमानों को समझाएं की जिस प्रकार हिन्दू उनकी बहन को बहन मानता है वैसा ही करें आज लव जिहाद के माध्यम से लाखों हिन्दू बहन बेटियों का धर्मान्तरण किया जा रहा है जिस गाव में १०० घर मुस्लमान है १० घर हिन्दू है उसकी बहन बेटियां सरेआम मुसलमान उठा ले रहा है जिसको हिन्दू महतारी मानता है उसे मुसलमान तरकारी मानता है एकता कैसे हो सकती है इसपर तो मुसलमानों को ही बिचार करना पड़ेगा, और गृहमंत्री जी मुसलमानों की सुरक्षा की गारंटी हिन्दू ही है न की पुलिस मुसलमानों को हिन्दू समाज के अन्दर विस्वास पैदा करना पड़ेगा हिन्दू अब मुसलमानों को अपने घर बैठना खरतनाक समझता है वह सोचता है की यह पाहले मित्रता करता है फिर हमारी बहन बेटियों को भगा ले जाता है.
      आज मुज़फ्फरनगर का दंगा क्यों हुआ हिन्दुओ को अपनी बहन बेटियों के सुरक्षा का हक़ नहीं है क्या--? इसलिए गृहमंत्री ने जो पत्र सभी गृह सचिवों को लिखा है उससे लगता है की सभी मुसलमान बड़े ही सज्जन हैं वास्तविकता यह है की सभी मुसलमान केवल गुंडा है वह कुरान को ही आदर्श मानता है कुरान कहता है की काफिरों की बहन बेटियों से जबरदस्ती जैसे भी हो निकाह करो तुम्हे जन्नत मिलेगी गृहमंत्री जी आपके बस का रोग नहीं है ये रुष के राष्ट्रपति ही कह सकते हैं की जिसे रुष में रहना है उन्हें यहाँ की संस्कृति को मानना ही पड़ेगा नहीं तो जिसे सरियात कानून चाहिए जहाँ शरियत कानून लागु हो वहां चले जायं, ये म्यांमार का धर्मगुरु ही कह सकता है की हम शांति से रहना चाहते हैं लेकिन पागल कुत्ते के साथ नहीं सो सकते, गृहमंत्री क्या चाहते हैं की जितने मुसलमान जेल में है उतने ही हिन्दू भी जेल में बंद कर दिए जायं विश्व के बहुत सारे देशों में जनसँख्या के अनुपात से अधिक मुसलमान जेल में हैं मुसलमान हिन्दू जैसा नहीं है उनके यहाँ बलात्कार, हिंसा,अपराध और अनैतिक काम इस्लामिक कार्य माना जाता है इसलिए भारतीय विचार और इस्लामिक विचार में बड़ा अंतर है इसलिए गृहमंत्री जी जरा पढलिख कर देश हित में विचार करीए नहीं तो इतिहास माफ़ नहीं करेगा.
       वास्तव में आपका दोष नहीं यह तो आपकी मानसिकता को दोष है आप भी जानते हैं की आप मुसलमानों का हित नहीं कर रहे है आप तो हिन्दू मुसलमानों को बाटने का काम कर रहें है क्यों की आप डंडे से हिन्दू समाज को नहीं दबा सकते ये तो मुसलमानों को विचार करना ही होगा की वे सेकुलर नेताओं के बहकावे में न आवें क्यों की हिन्दुओ से लड़कर उनके अस्तित्व को चुनौती देकर मेल-जोल नहीं किया जा सकता, हो सकता है हमारी बात गलत लग रही होगी लेकिन वास्तविकता यही है.
    सुशीलकुमार सिंदेजी कृपया मुसलमानों को टोपी पहनना बंद कीजिये वे सब आपको और आपके मिशन को समझते हैं.  

2 टिप्‍पणियां

lokendra singh ने कहा…

बढे अच्छे सवाल आपने उठाये हैं... वाकई हिन्दू दोयम दर्जे के नागरिक हो गए हैं... हिन्दुओं को भी सोचना होगा कि कब तक वे इस तरह अपना अपमान सहना चाहेंगे

सूबेदार जी पटना ने कहा…

हिन्दू तो अपने बच्चो को डाक्टर ,इंजीनियर, प्रोफेसर ही बनाना चाहता है न की हिन्दू यही इसकी बिडम्बना है एक दिन कहीं इसी चक्कर मे समाप्त न हो जय।