धर्म विशेष

दंगाइयों का नहीं मानसिकता का दोष है--! क्या हम उस मानसिकता को समाप्त करने की इक्षा शक्ति रखते हैं---?

        
          आखिर दंगे होते क्यों है--? क्या हमने इसपर विचार किया अथवा करने का साहस कर सकते हैं-! अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्लू॰ बुश ने कहा कि हज़ार वर्ष तक भारत को इस्लाम ने रौदा (हिन्दू बहन-बेटियों से साथ बलात्कार) फिर भी भारतीय इस्लाम को समझ नहीं पाए, बंगला देशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा लगता है भारत की सेकुलर नीति हिन्दू समाज को समाप्त कर देगी उसका इतिहास को लिखने वाला कोई नहीं बचेगा--! यह कौन सी मानसिकता है और उसे कौन बढ़ावा दे रहे हैं इस पर विचार करने की आवस्यकता है.
         जब हम विचार करते हैं तो दिखाई पड़ता है की सारे के सारे इस्लामिक देश भी आतंकवाद से जूझ रहे हैं फिर यह विचार अवश्यक हो जाता है की आखिर दंगे क्यों ? इसका ग्रन्थ और प्रेरणा श्रोत क्या है ? बहुत गहराई से विचार करने से पता चलता है की ये तो कुरान और मुहम्मद ही इसका मूल श्रोत है क्योंकि एक हाथ में तलवार दुसरे हाथ में कुरान लेकर विश्व की बहुत सारी महान संस्कृतियाँ और देश समाप्त किया गए,  आज इस्लामिक देशों में कुरान की परिभाषा अपने -अपने हिसाब से कर रहे हैं इस्लामिक देशों को भी कुरान के आधार पर चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं प्रतिदिन आतंकवादी हामले में सैकड़ो निरीह मारे जा रहे हैं सभी इस्लाम मतावलंबी ही फिर भी दंगे क्यों ? लगता है की इस इस्लामिक आतंकवादी आंधी में अरबियन देश भी टूटने से नहीं बचेगे फिर अमेरिका को अपनी भूमिका भी तय करनी पड़ेगी.
           भारत में हमेसा सभी धर्मों का आदर रहा है फिर यहाँ दंगे क्यों ? इसे समझने की आवस्यकता है भारत हिन्दू मतावलंबी देश होने के कारन सभी का यहाँ सम्मान है पूजा करना व पूजा स्थल बनाने की छूट है लेकिन जब-जब हिन्दू समाज कमजोर हुआ है तब-तब दंगे ही नहीं हुए बल्कि देश भी टूट गया इस नाते कारण ढूढ़ना होगा की दंगे क्यों होते है तो दंगों की अपनी मानसिकता होती है, जब हम यह विचार करते हैं की केवल मेरा धर्म मेरा धार्मिक ग्रन्थ ही सही है-है उसी प्रेरणा से नालंदा-तक्षशिला जैसे विश्व विद्यालय जला दिए गए और हम देखते रहे, फिर मेरा ही धार्मिक स्थल पवित्र है यह कहकर हजारों मंदिरों को तोड़ डाला, मेरा अनुयायी ही सही है सैकड़ों करोण सनातन धर्मियों को अन्याय पुर्बक धर्म के नाम पर मार डाला.
           इस्लाम मतावलंबियों की आज भी वही मानसिकता बनी हुई है वे अब हिन्दू समाज को स्वीकार करने को तैयार नहीं वे अब हिन्दू समाज के साथ नहीं रहना चाहते वे हिन्दू समाज पर सासन करना तथा  आज भी जजिया कर चाहते हैं, इसलिए आये दिन हिन्दू बहन- बेटियों का अपरहण 'लव जिहाद' आम बात हो गयी है जहाँ मक्का में किसी हिन्दू को प्रवेश नहीं वही अयोध्या में श्रीरामजन्म भूमि पर बाबरी मस्जिद हिन्दू क्या करे ? वास्तव में इसकी जड़ में कुरान है जब-तक कुरान में संसोधन नहीं होगा तब-तक दंगे बंद नहीं होगे क्योंकी कुरान उनका धार्मिक ग्रन्थ और मुहम्मद उनका प्रेरणा श्रोत कुरान ने दुनिया को बाट कर रख दिया है या तो इस्लाम को स्वीकार करो अथवा स्वर्ग सिधारो इनका इतिहास तो यही बताता है।
          मुसलमान शरियत के अनुसार इस्लामी राज्य ब्यवस्था स्थापित करना चाहता है क्योकि 'इस्लाम एक धर्म प्रेरित मुहम्मदीय राजनैतिक आंदोलन है कुरान जिसका दर्शन, पैगंबर मुहम्मद जिसका आदर्श, हदीश जिसका आचरण शास्त्र, जिहाद जिसका कार्यप्रणाली, मुसलमान जिसके सैनिक, मदरसे जिसके प्रशिक्षण केंद्र, गैर- मुस्लिम राज्य जिसकी युद्ध भूमि और विश्व इस्लामी साम्राज्य स्थापित करना जिसका अंतिम उद्देश्य है'। इसलिए इस्लाम के आने के पश्चात आतंकवादी इस्लामी जिहाद पहले अरेबिया और फिर सारे विश्व मे जारी है।   
         क्या हम इसके लिए तैयार हैं ? क्योंकि मुहम्मद को आदर्श नहीं माना जा सकता उनके कर्म सभ्य समाज के लिए स्वीकार नहीं, कुरान बिना संसोधन के भारतीय ग्रन्थ नहीं हो सकता कुरान को गीता, उपनिषद  के सामान मानवता का ग्रन्थ बनाना पड़ेगा, यदि यही कुरान भारत में रही तो दंगे होते ही रहेगे और भारत बटेगा भी कोई भी उसे रोक नहीं सकता, सेकुलर के नाम पर देशद्रोही कदम, सेकुलर, कुरान और इस्लाम की प्रबृति ही यही है लगता है की हमारी नियति भी.  
             एक और बात इन सबके लिए हिन्दू समाज भी कम दोषी नहीं है जब-जब हिंदुसमाज ताकतवर हुआ है तब-तब भारत मजबूत हुआ और दंगे आतंकवाद की घटनाएँ भी कम हुई इसलिए इसका सबसे अच्छा निदान हिन्दू समाज का ताकतवर होना यानी हिन्दू समाज का संगठित होना यही सर्वोत्तम मार्ग है इसलिये हिन्दू समाज का शक्ति उपासना ही इन सबका एक मात्र इलाज है। 

2 टिप्‍पणियां

PITAMBER DUTT SHARMA ने कहा…

BAHUT SUNDAR LIKHA HAI JI AAPNE !! MAIN ISE APNE BLOG PAR SHARE KAR RAHA HOON ( SAABHAAR ) !! APNE MITR KAA SAMAJH KAR !! THANKS !!

सूबेदार जी पटना ने कहा…

पीताम्बर जी आपकी प्रतिकृया बहुत अच्छी है सभी का इलाज हिन्दू समाज का संगठन ही है ।
इस्लाम के नियम-कानून मे परिवर्तन आवस्यक है कुरान को राजनैतिक पुस्तक न मानकर उसे धार्मिक ग्रंथ बनाने की जरूरत है जिससे मानवता सुरक्षित रहे।