धर्म विशेष

पितृ पक्ष अपने लिए अथवा पूर्वजों की संतानो के लिए भी-----------!

      
         अभी पितृ पक्ष का महिना शुरू हो गया है लाखों हिन्दू धर्मावलंबी अपने पूर्वजों के तर्पण हेतु ''गयातीर्थ'' मे आते हैं कहते हैं की भगवान श्रीराम भी यहाँ आए थे विश्व मे जहां भी हिन्दू रहता है वह चाहता है की एक बार गया जाकर अपने पूर्बजों का श्रद्ध कर्म करे ताकि उसके पूर्वज को स्वर्ग मे स्थान मिल सके, गया वह स्थान है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था यहीं कहते हैं कि 'गयासुर' को भगवान अपने पैर के तले दबाकर रखा हुआ है, यह वही स्थान है जहां भगवान विष्णु ने बामन स्वरूप धारण कर पृथ्बी ढाई कदम मे ही नाप दिया था उनका एक पैर यही पड़ा था ''विष्णुपाद'' मंदिर उसका प्रमाण है। 
       पित्रपक्ष के महत्व के बारे में मै एक सत्य कथा का वर्णन करता हूँ हम सभी ने हनुमान प्रसाद पोद्दार का नाम सुना ही होगा वे मुंबई मे एक किसी शेठ के यहाँ नौकरी करते थे, प्रतिदिन शायं वे समुद्र के किनारे चौपाटी घूमने जाया करते थे एक दिन उन्हे एक छाया दिखाई दी उसका आकार मनुष्य जैसा था बिना परवाह किए ये चलते रहे वापस अपने आवास पर आ गए, वे बराबर चौपाटी जाते उन्हे कभी-कभी वह आकृति दिखाई देती कुछ दिन बाद वह लगातार उनका पीछा करने लगी पोद्दार जी बड़े धार्मिक विचार के थे उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं लगता था एक दिन उन्होने उस छाया से पूछा कि मुझसे क्या चाहती है ? उसने बड़ी विनम्रता अपनी भाषा में बोला की मै ईसाई हूँ मेरी आत्मा बहुत कष्ट पा रही है मुझे शुद्ध पानी पीने को नहीं मिलता गंदे स्थान पर रहना पड़ता है जब पोद्दार जी ने कारन पूछा तो उसने बताया की जिनका दाह संस्कार नहीं होता, श्राद्ध कर्म नहीं होता, जिनको मिटटी में दफ़न कर दिया जाता है, उन्हें मुक्ति नहीं मिलती वह सभी प्रेतात्मा हो जाता है, उन्हें बडा ही दुःख भोगना पड़ता है, उसने बताया की जितने लोग चाहे इस्लाम अथवा ईसाई धर्म मानने वाले हों उन्हें कब्र में मुक्ति नहीं, बल्कि सभी प्रेतआत्मा हो जाती है, हनुमान प्रसाद पोद्दार ने उस पर दयाकर पूछा कि मै क्या कर सकता हूँ ? उस आत्मा ने कहा आपकी आत्मा बड़ी पवित्र है आप मेरा उद्धार कर सकते हैं उसने बताया कि मेरी कब्र मुंबई के इस कब्रिस्तान में है यदि मेरी हड्डी गंगाजी में चली जाय तो मुझे मुक्ति मिल जाएगी, पोद्दार जी ने उसके कब्रिस्तान से उसकी हड्डी निकल प्रयाग गंगा जी में तर्पण किया उस दिन से वह आत्मा उन्हें नहीं मिली मतलब उसे मुक्ति मिल गयी। 
         हनुमान प्रसाद पोद्दार को इससे प्रेरणा प्राप्त हुई उनका जीवन ही बदल गया, उन्होंने गोरखपुर में गीता प्रेस खोलकर हिन्दू धर्म के आध्यात्मिक प्रचार में अपना जीवन लगा दिया, मै अपने हिन्दू समाज के बंधुओं से यह कहना चाहता हूँ कि भारत में जो भी ईसाई और इस्लाम धर्म को मानने वाले हैं उन सभी के पूर्वज हिन्दू ही थे वे कब्रिस्तान में प्रेतात्मा बन कष्ट पा रहे हैं यदि हम हिन्दू समाज अपने बंद दरवाजे खोलकर उन्हें अपने घर पुनः वापस ले आएं यानी पुनः हिन्दू धर्म में ले आएं तो उन्हें ही नहीं उनके पूर्बजों को भी मुक्ति मिल जाएगी, इस कारन मानवता पर दयाकर, उन्हे अपनाकर सभी को उनके पूर्बजों के धर्म (हिन्दू धर्म) में वापसी कर पुण्य के भागी बने, यदि हिन्दू समाज इसके लिए आवाहन करता है तो केवल विधर्मियों का ही नहीं, हिन्दू धर्म का ही नहीं बल्कि भारत पुनः परम वैभव को प्राप्त होगा, क्योकि भारतीय धर्म ही भारतीय राष्ट्र का प्राण है।         
                      आइये हम धर्म जगाएं-------------------------------------!

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