
हिन्दू अपने घर मे ही शरणार्थी--!
देश का जब विभाजन हुआ था तब जिन्ना ने पाकिस्तानी संसद मे कहा था कि पाकिस्तान सेकुलर स्टेट रहेगा। आगे उन्होने कहा कि भारत के हिन्दू जैसा ब्यवहार मुसलमानों के साथ करेगे वैसा ही पाकिस्तान मे हिन्दुओ के साथ होगा। सब कुछ बदल गया जहां भारत मे मुसलमानों की संख्या विभाजन के समय 3 करोंड़ थी पश्चिमी पाकिस्तान मे हिंदुओ की संख्या एक करोण, पूर्वी पाकिस्तान मे 1.5 करोड़ थी। जहाँ वर्तमान समय मे भारत मे मुसलमानों कि संख्या 16 करोड़ है वही पाकिस्तान मे हिंदुओं की संख्या घटकर 10 लाख और बंगलादेश मे केवल 70 लाख बची हुई है। आखिर वे कहाँ चले गए ? या तो मतांतरित हो गए, मार दिए गए अथवा कहीं पलायन कर गए, आज स्थान-स्थान पर हजारो की संख्या में हिन्दू समाज अपने ही देश में शरणार्थी बनने को मजबूर है।आज विचार करना है जब हिन्दू विश्व मे कहीं भी सताया जाएगा वह कहाँ जाएगा--? उसके लिए तो अयोध्या, मथुरा, काशी यहीं है भारत उसका स्वाभाविक घर है। जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव मे प्रचार के समय असम की एक जनसभा मे कहा था कि विश्व के सभी हिन्दुओ का भारत मे स्वागत है यदि वे परेशान होते हैं तो वे भारत मे शरणार्थी नहीं हैं भारत उनका घर है उन्हे नागरिकता देनी चाहिए। कैसा दुर्भाग्य है कि भारत मे लगभग 1.20000 हिन्दू पाकिस्तान से आए हुए है यूपीए सरकार उन्हे भगा रही थी वे गए नहीं कई स्थानो पर वे हैं अपने देश मे वे पाकिस्तानी बन कर रह रहे हैं।
भारत हिन्दुओ का स्वाभाविक घर
पाकिस्तान के सिंध विश्वविद्यालय से MA प्रजापति कहते हैं, ''मै हिन्दू हूँ, लेकिन भारत में पाकिस्तानी हूँ, मेरा जीवन पाकिस्तान में नरक हो गया था। क्योंकि मुझे अपनी हिन्दू पहचान छुपानी पड़ती थी, लेकिन अब हिंदुस्तान में भी मेरी जिंदगी अँधेरी है क्योंकि मुझे यह छुपाना पड़ रहा है की मै पाकिस्तानी हूँ।'' प्रजापति के जीवन की विडम्बना उन जैसे हज़ारों पाकिस्तानी हिन्दुओं की है जो सताए जाने पर हिन्दू बहुल भारत में अपना घर समझ भागकर आये लेकिन यहाँ भी उन्हें दुत्कार और संदिग्ध निगाहें ही हासिल हुई। पाकिस्तान में हिन्दू सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं, पाकिस्तान की कुल १८ करोड़ की आवादी में उनकी तादात १.६ % ही हैं पाकिस्तान में हिंद्दुओं की कुल आवादी का ९५% आवादी उसके दक्षिणी राज्यों पंजाब और सिंध में निवास करती है। उनका पिछले समय एक बड़े हिस्से का पलायन पिछले साल कुम्भ मेले के समय जब ४८९ हिन्दू तीर्थ के लिए सिंध से दिल्ली आये उन्हें एक हिन्दू परोपकारी श्री नाहर सिंह दक्षिण दिल्ली के ब्रिजवासन में आश्रय दिया।दिल्ली के एक समाजसेवी श्री अरुण चावला ने कुछ शरणार्थी शिबिरों के बारे में बताया कुम्भ के बहाने भारत में आये हुए हिन्दू जहागीर नगर और आदर्श नगर के बीच रोड ५७ पर कुल ४८० हिन्दू रहने को मजबूर हुए। वहीँ सेक्टर ११ में 325 लोग रहने को मजबूर हुए हैं दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार उन्हें भगाने पर उतारू थी। हिन्दू हैं इस कारण इन्हे यहाँ रहने का अधिकार नहीं लेकिन अरुण चावला जैसे सामाजिक लोग भी हैं । दिल्ली के धर्मजागरण कार्यकर्ताओं ने उन्हें भोजन आवास हेतु तिरपाल इत्यादि की ब्यवस्था की लेकिन यह कितना दिन! वहां के संघ के कार्यकर्ताओं ने कुछ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये आज वे ठेला इत्यादि लगा अपना जीवन यापन कर रहे हैं वे अब पाकिस्तान नहीं जाना चाहते वे अब इस पुण्य भूमि में ही मरना चाहते हैं । वे कहते हैं कि वहां हमारी इज्जत सुरक्षित नहीं है जब चाहे कोई भी मुस्लिम नौजवान हमारी इज्जत लूटता है हम देखते रहते हैं हम कुछ कर नहीं सकते। पाकिस्तानी सरकार भी उन्हीं आतंकवादियों के साथ रहती है क्योंकि इस्लाम में सब जायज है। मै दिल्ली प्रवास के दौरान इन शिविरों में गया वे कितने दुखी हैं, हम उसका वर्णन नहीं कर सकते !