ये शान्ति पूर्ण प्रदर्शन है या आतंकवादी हमला?

क्या है इस्लाम?


आज विश्व में जो घटना क्रम आतंकवादी घटनाएं हो रही हैं कोई भी देश शायद अछूता रहा है इसलिए सारा विश्व सतर्कता पूर्वक व्यवहार करना शुरु किया है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री "मा अटल बिहारी वाजपेयी" ने 2003-4 में जब "अमेरिका" पर "मुस्लिम आतंकवादियों" ने हवाई जहाज से "व्हाइट हाउस" पर हमला किया था कहा था कि हम तो 'एक हजार वर्ष' से इस आतंकवाद को झेल रहे हैं आपको आज समझ में आ रहा है, वास्तविकता यह है कि इस्लाम में हिंसा, हत्या, बलात्कार, अपहरण और लूट के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है चाहे आप कुरान पढ़े अथवा हदीश सब मे यही है यदि कोई 'मुल्ला-मौलवी' इसे धर्म बताता है तो वह दुनिया को मूर्ख बना रहा है किसी भी धर्म का आईना उसके मानने वाले व्यक्ति के व्यवहार से होता है, आज सारा विश्व यह मान लिया है कि इस्लाम का पर्याय आतंकवाद है उसका एक और पहलू है कि किसी भी आतंकवादी घटना की निंदा किसी भी 'इस्लामिक स्कालर' अथवा मुल्ला मौलवी ने नहीं की, ऐसा नहीं कि 1994 में 'तालिबान अफगानिस्तान' में पैदा हुआ जिसके मुखिया "मुल्ला उमर" था जिसका मुख्यालय "कंधार" में था, वास्तविकता यह है कि जब से इस्लाम का जन्म हुआ तब से हिंसा, हत्या, बलात्कार करने की छूट, लूट का माल बाटना चाहे महिलाएं ही क्यों न हो, इस्लाम ने विश्व को कुछ दिया तो नहीं केवल "लासो के ढेर" खड़े किये "लाखों धर्मस्थल" तोड़े "लाखों करोणों पुस्तकों" को जलाया कोई भी इस्लाम मतावलम्बी यह नहीं बता सकता कि "इस्लाम" ने दुनिया को क्या दिया ?

भारत और इस्लाम

भारत में आध्यत्मिक प्रवाह ऐसा था कि प्रत्येक जीव में ईश्वर का अंश देखने का स्वभाव पशु-पक्षी' जीव-जंतु, पेड़-पौधे सभी मे ईश्वर का वास है सभी का संरक्षण मनुष्य को करना है प्रकृति का शोषण नहीं दोहन यह हमारा स्वभाव जब 712 में आतंकी 'मुहम्मद बिन कासिम' का हमला हुआ पश्चिम से आतंकी आने लगे यहाँ का समाज उन्हें समझ नहीं पाया उसने विचार किया कि हमारे समान यह भी कोई धर्म है वे नहीं समझे कि यह धर्म नहीं आतंकवादी गिरोह है ब्रम्हदेश से अरब तक तिब्बत से लेकर श्री लंका इंडोनेशिया तक का विशाल भूभाग भारतवर्ष था लेकिन इन आतताइयों ने बलात धर्मान्तरण कर हिन्दू जनसंख्या घटती गई ईरान इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश यानी जहाँ जहाँ हिन्दू घटता गया भारत काटता गया आज का वर्तमान भारत बचा हुआ भारत जिसे बचाने की चुनौती हमें स्वीकार करना है।

विश्व परिप्रेक्ष्य में इस्लाम

सारे विश्व में मुसलमानों को देख कर इनके नाम सुनकर लोग सतर्क हो रहे हैं अमेरिका में यह विस्वसनीय नहीं है अमेरिका ने अरब जैसे देशों को गुलामी की श्रेणी में रखा हुआ है जर्मनी, फ्रांस में बुरका पहिनने पर प्रतिवंध है मस्जिदों की जांच नई मस्जिद नहीं बना सकते यदि अलग से कोई छूट चाहिए तो देश छोड़ना पड़ेगा रशिया के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि यदि सरिया चाहिए तो जहाँ सरिया कानून हो वहां चले जाएं यहां तो रूसी कल्चर में रहना पड़ेगा कोई मस्जिद नहीं बन सकता कोई मदरसा नहीं हो सकता कोई इस्लामी आइडेंटिटी नहीं हो सकता, चीन ने तो एक कदम आगे चलकर यदि किसी के यहां कुरान पाया गया, कोई दाढ़ी रखी, नमाज पढ़ते पाया गया तो उसे सजा दी जाती है कोई रोजा नहीं रख सकता, कोई "हज यात्रा" नहीं कर सकता और अभी चीन ने मुसलमानों को "सिविलाइजेशन" करना शुरू किया है बड़े बड़े कम्युनिटी सेंटर बनाया है लाखों मुसलमानों को उसमे रखा है उन्हें उसमे भारती करते समय सुवर का सूप पीना अनिवार्य है उनकी महिलाओं के साथ कम्युनिस्ट पार्टी के कैडर रात्रि में रहते हैं उन्हें "सिविलाइज्ड" करते हैं विश्व का कोई इस्लामी देश बोलने की हिम्मत नहीं दिखता, जापान किसी भी मुसलमान को बीजा नहीं देता पुरानी मस्जिदों की मरम्मत नहीं नई बन नहीं सकती, इस्लाम के प्रति "इजरायल" का ब्यवहार जग जाहिर है।

रोहंगिया 

ये रोहंगिया मुसलमान कौन है इनकी वास्तविकता यह है कि इन्हें बंगाल से बर्मा में काम करने के लिए ले गए थे लेकिन ये कट्टर मुस्लिम यानी आतंकवादी हैं जिन्होंने बिगत दिनो "14 हजार बौद्ध और हिंदुओं" की हत्या कर दिया बौद्धों के बारे में सभी जानते हैं कि वे कितने अहिंसक हैं लेकिन अब बर्दास्त की सीमा पार हो गई एक संत जिराथु ने कहा कि कोई कितना भी बड़ा मानवतावादी हो लेकिन पागल कुत्ते के साथ नहीं रह सकता फिर क्या था-? वहाँ की सरकार ने नहीं समाज ने उन्हें देश से निकाल दिया, बड़ी बड़ी जहाजों पर वे प्रेम मुहब्बत वाले धर्म के अनुयायी देश अरब की ओर गए अरब की समुद्री सीमा में घुसने नहीं पाए तीन दिन पड़ाव डाले रहे पानी भी नहीं मिला अरब देश ने कहा कि हम केवल अरवी जिंश को स्वीकार करते हैं भारत में मनमोहन सोनिया सरकार थी इन्होंने इन आतंकियों को भारत में सरण दे दिया आज भारत में वे बिभिन्न आतंकी गतिविधियों में शामिल है देश में जो उग्र हिंसा हो रही है सब घुसपैठिये ही है।

भारत में CAB


सभी को पता है कि 15 अगस्त 1947 को देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था "वीर सावरकर, डॉ आंबेडकर, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी" यह चाहते थे कि जब बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ है तो भारत में कोई मुसलमान नहीं रहना चाहिए न ही पाकिस्तान में कोई हिन्दू लेकिन नेहरू गांधी की गलत नीतियों के कारण जनसंख्या के अदला बदली हुई जिसमें बीस लाख लोग मारे गए बड़ी संख्या में मुसलमान यहाँ रह गए वहाँ भी हिन्दू बच गए जब बटवारा हुआ भारत के अंदर 9%मुसलमान था पाकिस्तान में 23% हिन्दू था लेकिन आज पाकिस्तान में 3% हिन्दू बचा हुआ है बांग्लादेश में 7% बचा हुआ है वही भारत में जो मुसलमान 9% था वह बढ़कर आज 14% हो गया है तो 'पाकिस्तान' के 'बांग्लादेश' के हिन्दू कहाँ चले गए या तो उनकी हत्या कर दी गई अथवा वे भागकर किसी अन्य देश में चले गए या उनका धर्मान्तरण किया गया, आज देश में एक करोड़ से अधिक हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन शरणार्थी बनकर भारत में आया है विश्व में "56 इस्लामिक" देश है "ईसाईयों के 77 देश" है विश्व में हिंदुओं के लिए केवल भारत उनके लिये जो प्रताड़ित किये गए हैं उनके लिए भारत सरकार ने यह 'नागरिकता का बिल' लायी है उन्हें नागरिकता देनी है।

नागरिक संसोधन बिल का प्रभाव

देश भर में बिना समझे वामपंथी, कांग्रेसी और समाजवादियों के नेतृत्व में मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया है जो शान्ति पूर्ण प्रदर्शन न होकर हिंसक प्रदर्शन है दसियों ट्रेनों, सैकडों बसों और हज़ारों बाहनों को आग के हवाले किया गया है भारत व हिन्दुओ के विरोध में नारे लगाए गए केवल पुलिस पर हमला नहीं हुआ है जगह जगह पर हिन्दू समाज को निशाना वनाया गया है वास्तव में ये समझ नहीं रहे हैं यदि एक अरब हिन्दू समाज खड़ा हो जाएगा तब क्या होगा हिंदुओं को कायर समझने की भूल नहीं करनी चाहिए यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि हिन्दू समाज व भारत के ऊपर आतंकवादी हमला है।

बिल का विरोध नहीं दलितों का विरोध

देश बंटवारे के समय दलितों के दो नेता थे एक "डॉ आंबेडकर" दूसरे "डॉ योगेंद्र मंडल" दोनोँ के विचारों में बहुत अंतर था "डॉ आंबेडकर" कहते थे कि हमारे समाज में भेद भाव है छुवा-छूत है लेकिन हम उसे आपस में बैठकर दूर करेगे हम भारत में रहेंगे और किसी भी दलित को पाकिस्तान नहीं जाना चाहिए दूसरे तरफ "डॉ योगेंद्र मंडल" कहते थे कि "इस्लाम" प्रेम- मुहब्बत का धर्म है सभी दलितों को पाकिस्तान जाना चाहिए "अम्बेडकर" कहते थे कि मुसलमानों का प्रेम मुहब्बत केवल मुसलमानों के लिए है "योगेंद्र मण्डल" उनकी एक नहीं सुनी करोड़ों दलितों को लेकर वे पाकिस्तान चले गए आज पाकिस्तान में जो हिन्दू पीड़ित हैं दुखी है जो भागकर आया है लगभग सभी दलित है, तीन वर्ष बाद "योगेंद्र मण्डल" भागकर 'कोलकाता' आ गए वही मर गए लेकिन करोड़ों दलितों को राक्षसों के जबड़े में छोड़ दिया आज जो बिल नरेंद्र मोदी सरकार ने लाया है वह उन्ही दलित पीड़ित गरीबों के लिए है ये सब "नागरिक बिल" का विरोध नहीं कर रहे बल्कि "दलितों" का विरोध कर रहे हैं।

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