धर्म विशेष

चक्रवर्ती सम्राट राजा विक्रमादित्य----------!

 कौन थे राजा वीर विक्रमादित्य.....?
---------------------------------------

 महाराज विक्रमादित्य के बारे में देश को लगभग न के बराबर ज्ञान है, जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था और स्वर्णिम काल लाया था-------!
राजा भृतहरि--!
-----------------
 उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन, जिनके तीन संताने थी सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती, उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य, बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ हुई, जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द, आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगल में चले गए, फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली, राजा भृतिहरी बड़े प्रतापी धर्मज्ञ राजा थे एक घटनाक्रम मे उन्होने अपने प्रिय भाई विक्रम को देश निकाला दे दिया जब उन्हे सब परिस्थिति का ज्ञान हुआ तो विक्रम को राजतिलक कर स्वयं गुरु गोरक्षनाथ के शिष्य बन सन्यासी होकर राज्य त्याग दिया ।
शंकराचार्य के कदम पर सम्राट पुष्यमित्र शुंग  
-------------------------------------------------
जब सम्राट अशोक ने अपनी हीन भावना को छुपने हेतु बोद्ध धर्म अपना लिया तो देश बौद्धधर्म राज्याश्रित हो गया समान्यतया जनता सनातन धर्म मतावलंबी और राजा बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था, उस काल में अयोध्या, मथुरा, काशी, कांची, अवन्तिका, हरिद्वार जैसे सभी सांस्कृतिक, धार्मिक स्थलों को ध्वस्त कर दिया गया, भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन शासक धर्म हो गया था, उस समय सभी सनातन धर्म के ग्रंथों को समाप्त करने का प्रयास किया गया वेद, उपनिषद, ब्राह्मण ग्रंथ, निघंटु, रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, सम्राट पुष्यमित्र शुंग ने इन ग्रन्थों को विभिन्न गुरुकुलों, वैदिक विद्वानों को माध्यम द्वारा खोज निकाला, वैदिक धर्म की पुनर्प्रतिष्ठा की ।
 सम्राट विक्रमादित्य ने वैदिक धर्म की पुनर्वापसी की
----------------------------------------------------------
 सम्राट विक्रमादित्य ने शैव, वैष्णव तथा सनातन धर्म के विभिन्न प्रकार के मन्दिरों की स्थापना कर यानी अयोध्या, मथुरा, काशी, माया, कांची, जनकपुर इत्यादि धर्मिक स्थलों पर मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया, इतना ही नहीं अयोध्या, मथुरा, काशी जैसे भारत के विभिन्न नष्ट हुए धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण कराया। विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास जिनहोने 'अभिज्ञान शाकुन्तलम्' लिखा जिसमे भारत का इतिहास है, अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे, हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि सन्यास लेकर राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया और वे स्वयं तपस्या करने चले गए, आज उन्ही के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है। 
भारत का स्वर्णिम काल
--------------------------
 महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म संस्कृति और देश को ही नही बचाया बल्कि उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम काल कहा जाता है, विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे, भारत में इतना सोना आ गया था कि विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे, भारतीय कालगणना जो आज वैज्ञानिक कालगणना सिद्ध हो चुकी है जिसे हम विक्रम संवत के नाते जानते हैं उसी को हिन्दू कैलंडर भी कहा जाता है जिसे सम्राट विक्रमदित्य ने स्थापित किया है, आज जो भी ज्योतिष काल गणना है जैसे, विक्रम सम्वंत, वार, तिथीयाँ, राशि, नक्षत्र, गोचर आदि सब उन्ही के आधार पर है, राजा विक्रमादित्य बहुत ही परिश्रमी, पराक्रमी, बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।
न्याय प्रिय सम्राट 
--------------------
सम्राट का न्याय मनुस्मृति के हिसाब से होता था कहते है जो उस सिंहासन पर बैठता था वह न्याय करने लगता था इसलिए आज भी न्याय की पर्यायवाची बन गया है विक्रमादित्य का सिंहासन, उनके बारे मे पूरे देश मे कई प्रकार की किवदंती फैली हुई है जैसे वैताल पचिसी या कहते हैं कि उनके पास ऐसे देवता थे जो तुरंत ही महल, नगर बना बसा देते थे, कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे विक्रमदित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे, न्याय व राज्य के कार्य सब धर्मशास्त्र के नियमो पर चलता था----!
              *विक्रमदित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है*!
एक टिप्पणी भेजें