भारतरत्न नानाजी को शत-शत नमन

        आज पूरा देश नाना जी देशमुख को श्रद्धांजलि देते हुए उनके प्रति कृतज्ञता अर्पित कर रहा है। नाना जी का जन्म महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में कदोली क़स्बा में 11 अक्टूबर 1916 को चंडीकादास अमृतराव देशमुख के यहाँ हुआ था उनकी मृत्यु 27 फरवरी 2010 में चित्रकूट में हुई। वे प्रख्यात समाजसेवी थे। रा.स्व.स. को माध्यम बनाकर उन्होंने अपने आप को राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया यानी वे संघ के प्रचारक निकल गये । जो भी कार्य मिला उसे पूरे मनोयोग से पूरा करने का प्रयत्न किया। नानाजी को बाद में जनसंघ के काम के लिए भेजा गया लम्बे समय तक वे जनसंघ के संगठन मंत्री रहे। 1977 में जानता पार्टी बनने के पश्चात् उनको महामंत्री बनाया गया, उन्हें मोरारजी भाई देसाई अपने मंत्री मण्डल में शामिल करना चाहते थे लेकिन उम्र का हवाला देकर मंत्री बनने से इंकार कर दिया। उसके बाद उन्होंने दीनदयाल शोध संस्थान का गठन कर उसके माध्यम से समाज में अनेक सेवा कार्य शुरू किया। सर्वप्रथम गोण्डा का प्रकल्प, फिर चित्रकूट को केंद्र बनाकर पूरे देश में कई जिलों को गोंद लिया और स्वविकसित करने का काम शुरू कर दिया। तत्पश्चात उनको राज्यसभा भेजा गया। मा अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें अपने कार्यकाल में शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य और ग्रामीण स्वावलंबन के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान हेतु "पद्मभूषण" से सम्मानित किया गया। उसके पश्चात् नरेन्द्र मोदी सरकार ने उन्हें "भारतरत्न" से सम्मानित किया।

 "दीनदयाल शोध संस्थान" के द्वारा समाज के अन्तिम ब्यक्ति को ऊपर उठाने का जो कार्य उन्होंने किया। चाहे वह गोंडा का प्रकल्प हो अथवा चित्रकूट या देश के अन्य किसी भाग में सेवा का जो आदर्श रक्खा शोध किया । उससे पूरा देश उनका ऋणी रहेगा। 

         ऐसे महापुरुष को शत-शत नमन॥

एक टिप्पणी भेजें

2 टिप्पणियाँ

  1. ऐसे महान समाजसेवी और राजर्षि भारतभूमि में समय-समय पर अवतरित होते रहें, ईश्वर से यही प्रार्थना है।

    जवाब देंहटाएं
  2. नाना जी देशमुख जैसे को याद न करने वाली कलम गिरोहों को अपने अस्तित्व की खतरा होगी नाना जी तो सनातन वट वृक्ष के रूप में खड़े हैं।शत शत नमन

    जवाब देंहटाएं