कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी.-1


बुधवार, 10 मार्च 2010

               सात सौ ईशा पूर्ब यवन सम्राट शिकंदर ने भारत पर हमला किया .उसने विश्व विजय क़ा सपना देखा था। उस समय भारत शंस्क्रितिक व धार्मिक रूप से एक था इराक ,अफगानिस्तान से लेकर बर्मा तक भारत की शान्स्कृतिक शीमा थी। लेकिन राजनैतिक रूप में छोटे -२ राज्यों में बटा था ,सिकंदर क़ा मुकाबला जहा केके नरेश पोरश व अन्य गण प्रमुख बीरता पुर्बक कर रहे थे वही तक्षशिला नरेश अम्भी आपसी कलह के नाते स्वं समर्पण कर दिया । वह सिन्धु तो पार कर लिया लेकिन आगे बढ़ नहीं सका ,जहा चन्द्रगुप्त के नेतृत्व में सारे राजा व सैनिक इक्कठा हो रहे थे वही चाणक्य के नेतृत्व में भारत के सभी गुरुकुलो के माध्यम से सम्पूर्ण समाज को जगाया जा रहा था , सिकंदर के बाद सैल्युकस को भी वापस अपनी लड़की देकर जाना पड़ा .क्यों की हमारी जो सांस्कृतिक सीमा थी वह राजनैतिक सीमा के रूप में बदल चुकी थी ।
           १५०० बर्ष पश्चात् पश्चिम से मुस्लिमो क़ा आक्रमण लुटेरो के रूप होने लगा ,तबतक भारत की एकता बनी न रह सकी भारत छोटे- २ राज्यों में टूट चूका था, आपसी फुट क़ा लाभ उठाकर ,शासन करना उनके लिए आसन हो गया। कुरान और तलवार के बल पर शांति क़ा उपदेश देने वाले कुरान ने करोंनो हिंदुवो की जन ली ,हत्या हिंसा व बलात्कार जिनका पेशा था,ऐसे धर्मांध मुस्लिम अक्रंतावो ने पूरे भारत के मैथ , मंदिरों को तोडना शुरू कर दिया । कहा जब कुरान में सभी बाते लिखी हुई है तो और किसी पुस्तक की क्या आवस्यकता --? नालंदा, तक्षशिला जैसे तमाम पुस्तकालयों को जला कर खाक कर दिया .जब खुदा मस्जिद में रहता है तो किसी और धार्मिक स्थानों की क्या आवस्यकता--? हजारो -हजार मंदिरों को तोड़ डाला कृष्ण जन्मभूमि ,राम जन्मभूमि ,अयोध्या मथुरा कशी तथा अन्य स्थानों के मंदिरों को खत्म कर दिया। लाखो हिन्दुओ क़ा बलिदान ,[चौहत्तर मन यज्ञोपवित तौले है किसने याद मुझे ,दस कोटि यवन भारत भू किस बहती हुए है याद मुझे ] पूरे भारत को थर्रा देने वाली पाशविक शासन के बिच में हिन्दू खड़ा रहा।
              कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी---- इतने जुल्म होने पर भी हम डिगे नहीं , जहा पर मुसलमान गया पूरे के पूरे मुल्क क़ा इस्लामीकरण कर लिया ,लेकिन भारत में ऐसा नहीं हो सका ,हमारे पुर्बजो जहा हिन्दू सिरोमणि प्रिथ्बिराज चौहान ,रना प्रताप,शिवा जी समभा जी गुरु गोविन्द सिंह, बीरबंदा बैरागी, विरसा मुंडा तक संघर्ष व बलिदान चलता रहा तो दूसरी तरफ गुरुनानक देव , रामानंदाचार्य, कबीर, तुलसीदास, सूरदास, रामानुजाचार्य, समर्थ गुरुराम दास, स्वामी रामतीर्थ, प्रणवानंद, शंकरदेव, बिवेकानंद इत्यादि संतो ने अध्यात्मिक चेतना का संचार कर समाज में आत्म विस्वास पैदा किया ,वही चैतन्य महाप्रभु, महर्षि दयानंद सरीके संतो ने जो हमारे समाज से बाहर चले गए थे उन्हें वापस लाने क़ा कार्य किया। सम्पूर्ण भारतवर्ष १२०० वर्षो तक संघर्ष करता रहा ,लेकिन अपने समाज व् क्षत्रित्व गुण को बचा कर रखा।
           आज चारो तरफ से किसी न किसी प्रकार क़ा बहाना बनाकर हिन्दुओं के ऊपर हमला करना उसकी बहन, बेटी को भगा कर ले जाना अपने ही देश में हिन्दू अपमानित होकर जीने के लिए मजबूर है। सेकुलर के नाम पर हन्दू क़ा बिरोध करना एक फैशन बन गया है ,आज कोई भी राजनैतिक दल हिन्दुओं के पक्ष खड़ा होने की स्थिति में नहीं है। हम हिन्दुओं को अपनी लड़ाई स्वयं पड़ेगी, इस्लाम कोई धर्म नहीं है.यह केवल आतंक बादियो क़ा गिरोह है, कुरान कोई ग्रन्थ नहीं है यह केवल दुनिया में आतंक फ़ैलाने वाली किताब है ,जब तक ये दोनों रहेगे दुनिया जलती रहेगी. आइये कुछ सोचे कुछ करे। अपने-२ समय पर समाज को बचाने क़ा कार्य हमारे पुर्बजो ने किया है आज हमें करना है।
[उठो चुनौती को स्वीकारो युवको आज हमारी बारी . ]
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