हिन्दुओ को बार-बार अपमानित करना ही उद्देश्य


गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

         हिन्दुओ को लगातार अपमानित करने क़ा फैसन चल पड़ा है जब किसी को कोई प्रसिद्धि प्राप्त करना होता है तो उसके निशाने पर हिन्दू ही होता है. एम्.ऍफ़.हुसेन को भी भारत माता क़ा नंगा चित्र बनाना पड़ता है या हिन्दुओ को और भी अपमानित करने हेतु सरस्वती माता जो विद्या की देवी है उनका भी नंगा चित्र बनाया. इतना ही नहीं प्रधानमंत्री की बेटी जो तथाकथित इतिहासकार भी है ने लिखा की सीताजी के लक्ष्मणजी के साथ नाजायज सम्बन्ध थे, हनुमान एक बन्दर था जो बहुत ही कामुक था इसमें परेसान होने की कोई बात नहीं है क्योंकी सेकुलर क़ा अर्थ हिन्दूधर्म व भारतीय संस्कृति क़ा बिरोध करना--? बामपंथी सरकार से अलग होने पर भी उच्चतम शैक्षिक शंस्थानो से उन्हें हटाया नहीं गया है हिन्दू बिरोध करना ही उनका प्रथम कर्तब्य है, बामपंथियो को कोई भी भारतीय ,राष्ट्रीयता परक सामग्री अच्छी नहीं लगती, अभी हाल में सर्बोच्च न्यायालय ने एक फैसले मे कहा है की शादी से पहले लड़की, लड़का एक साथ रह सकते है, नजीर के तौर पर जज महोदय ने भगवान कृष्ण और राधा क़ा उदहारण दिया है, यह क्या है- ? न्यायलय से लेकर नेता,बिधर्मी सभी हिन्दू समाज का अपमान करने में जुटे है, हिन्दुओ के धैर्य की कब तक परीक्षा ली जाएगी, हुसेन ने मुहम्मद क़ा तो अभी-तक कोई भी नंगा चित्र बनाकर अपने कला क़ा प्रदर्शन किया।  
           सभी जानते है अयोध्या मे भगवान श्रीराम पैदा हुए थे, प्रमाण भी मिल गया, लेकिन किसी जज की हिम्मत नहीं हुई की जन्मभूमि के पक्ष में फैसला दे सके, लेकिन इन जज महोदय ने बड़ी ही आसानी यह कह दिया की राधा, कृष्ण एक साथ रहते थे, कोई भी ब्यक्ति कितना बड़ा क्यों न हो जाय वह सर्बग्य नहीं होता प्रधानमंत्री, उच्चन्यायालय क़ा जज, कलाकार अथवा उच्च डिग्री प्राप्त करने से कोई बड़ा विद्वान नहीं हो जाता, हमको लगता है की जज महोदय को धार्मिक ग्रन्थ पढने की आवस्यकता है, श्रीकृष्ण के बारे में जाने, उनके मुकुट में मोर क़ा पंख लगा है क्यों ? क्यों की वे योगेश्वर थे ? उनपर आरोप लगाना समस्त हिन्दू समाज क़ा अपमान है--! क्या वे मुहम्मद या इशु के बारे में ऐसा बोल सकते है ? उन्हें हिन्दू समाज से माफ़ी मगनी चाहिए और सबसे निबेदन है की हिन्दू समाज की धैर्य की परीक्षा न ले।
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