धर्म विशेष

नेपाल क़े पूर्ब राजा को तराई व मंदिरों में क्यों श्रद्धा उमड़ आई है

          अभी-अभी नेपाल में जहा अस्थिरता  क़ा दौर चल ही रहा हो मानवता बिरोधी माओबादी संबिधान बनाने में बाधक बने हुए है वे किसी तरह बर्तमान सरकार को देखना नहीं चाहते क्यों कि इस समय माधव नेपाल से अच्छा कोई बिकल्प नहीं है प्रचंड कि हर चाल  क़ा जबाब वे ही दे सकते है जहा माओबादी ताकत [प्रचंड, बाबुराम, उपेन्द्र यादव]को छोड़कर सभी लोकतंत्र बादी एक है और नेपाल को अच्छे रास्ते पर ले जाना चाहते है.
       ऐसे समय में राजा देश कि न सोच कर अपनी गोटी सकने से बाज़ नहीं आ रहा वे आज तराई में नेपालगंज से लेकर बिराट नगर तक सक्रिय दिखाई देते है जिस राजबंश ने तराई क़े लोगो क़ा जीवन नरक कर दिया वे न तो सेना में नाटो किसी प्रशासन में ,किसी प्रमुख स्थान पर वे आज भी नहीं है ये राजा कि ही देन है उन्हें नेपाली नागरिक नहीं मानना, लोकतंत्र आने क़े बाद जहा तराई क़े लोगो कि उम्मीदे जागने लगी है , उन्हें ठगने क़ा प्रयत्न में राजा बाज़ नहीं अ रहा , सर्बाधिक  मठ ,मंदिर तराई में है जिनमे पर्याप्त धन सोने चादी कि मुर्तिया थी हजारो-हजार एकड़ जमीं थी राजा ने गुथी संस्थान बनाकर अधिकार कर लिया और सोना,चादी उठा ले गए , आज मंदिर क़े महंथो व पुजारियों को कोई अधिकार नहीं है राष्ट्र निर्माड कि दिशा जो मठ मंदिरों से होकर जाती थी वह बंद हो गयी,मंदिरों कि दुर्दसा शुरू हो गयी पश्चिम क़े नेपालगंज में एक पत्रकार पन्नालाल गुप्ता सहित कुछ संभ्रांत लोग अन्चलाधिश से मिलने गए कि प्रसिद्द शक्तिपीठ बगेस्वरी मंदिर में जो मुसलमान गन्दगी फेकते है उसे न फेके ,अन्चलाधिश न कहा कि मुसलमान राजा क़ा ब्यक्ति होता है आज से उनकी सिकायत नहीं होनी चाहिए ज्ञातब्य हो कि उस समय बिरेन्द्र राजा थे , ज्ञानेंद्र  तो मंदिरों की  मूर्तियों को चुराने व बेचने क़े मामले में ही चर्चित रहे है .
         लेकिन आज परिस्थित बदली है जो राजा संघ कार्यालय पर क्षापा इस नाते मरवाता हो क्यों कि संघ हिन्दू राष्ट्र व देश भक्ति कि बात करता हो वह राज़ भक्ति कि बात नहीं करता राजा व संघ क़े राष्ट्राबाद में अंतर था राजा क़ा राष्ट्राबाद यानि राजभक्ति व भारत बिरोध, संघ क़ा राष्ट्राबाद यानि नेपाली संस्कृति पर आधारित हिंदुत्वा आधारित राष्ट्रबाद संघ न  राष्ट्र जागरण अभियान लेकर राष्ट्र ब्यापी आन्दोलन लिया ,राजा को रास नहीं आया यह तो देश भक्ति पढ़ा रहा है और संघ कार्यालय पर तीन बार छापा मारा,
          आज राजा मंदिरों क़े माध्यम से हिन्दू बादी कार्यकर्ताओ से बात कर रहे है वे पहाड़ में न जाकर तराई में जा रहे है वे जानते है कि पहाड़ क़ा ब्यक्ति बुद्धिमान है और तराई क़ा मुर्ख है अब तराई क़े लोगो को समझ में अ गाया है कि राजा व माओबादी क़ा राष्ट्राबाद एक प्रकार क़ा ही है वे अब राजा की चाल में आने वाले नहीं है वहा लोगो क़ा मत है कि यदि राजा को आना है तो राजा को एक राजनितिक पार्टी बनाकर मैदान में उतरना चाहिए. राजदरबार न तो कभी हिन्दू समर्थक रहा न ही नेपाल क़े प्रति वफादार भारत बिरोध इतना था की भारत व नेपाल की सीमा पर मुसलमान बसाकर आइ.एस.आइ.क़ा जाल फैलाकर भारत क़ा सर दर्द कर दिया, फैक करेंसी में तो राजा क़े पुत्र पारस क़ा नाम चर्चा में है,राजा  ,माओबादी एक थाली क़े चट्टे- बट्टे है नेपाली जनता हिन्दू राष्ट्र चाहती है लेकिन वह  लोकतान्त्रिक न की राजाशाही .         

2 टिप्‍पणियां

सुनील दत्त ने कहा…

रोचक जानकारी

बेनामी ने कहा…

हमारे यहां एक कहावत है। " जितला के आगे, हारला के पीछे" । पुर्व मे हुई गल्तीयो को स्वीकार करे तथा भविष्य़ मे गल्ती न करने का संकल्प ले। सच्चे हृदय से हिन्दुत्व तथा सनातन धर्म रक्षा के लिए काम करेंगे ईश्वर अवश्य मदत करेंगे। जय सिया राम