अयोध्या-अयोध्या----और अयोध्या-----? एकै साधे सब सधै --


शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

         एकै साधे सब सधै जैसी कहावत है हमें उस पर बिचार करने की जरुरत है १९८० --८७  क़ा समय था अखबारों में बराबर निकलता अलीगढ, मुरादाबाद, मेरठ, रामपुर, भागलपुर, हैदराबाद, अहमदाबाद, इतने मारे इतने घायल स्थिति तनाव पूर्ण किन्तु शांति ---इसी से अखबार पटा रहता था ये मै बचपन से पढ़ रहा हू जिस नगर में देखो वही दंगे सेकुलर सरकारे, सेकुलर मिडिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क़े ऊपर आरोप लगा अपना काम तमाम करती मुसलमानों से वोट की खेती आराम से होती, मुसलमान है कैसा ---? सेकुलरिस्ट तो उसको मुर्ख समझते है, बहकावे में आता है अगर उसे भारत की परंपरा यहाँ क़े रीती- रिवाज यहाँ की पूजा पद्धति अच्छी नहीं लगती तो उसे पहले ही पाकिस्तान चले जाना चाहिए था ! यदि नहीं गया तो यहाँ लड़कर भारतीय संस्कृति को ख़त्म तो नहीं कर सकता आखिर ये मुसलमान कौन है -? ये तो उन्ही की संताने है जिनको जोर -जबरदस्ती या इनकी बहन बेटियों को तुर्क जो विदेशी आक्रान्ता थे बलात्कार किया ये डरकर मुसलमान हो गए ---! हिन्दुओ क़े अन्दर तो राणाप्रताप, शिवा जी, बन्दा बैरागी, गुरु गोविन्द सिंह, क़ा रक्त प्रवाहित हो रहा है, हम सभी को पता है की अंतिम मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफ़र तो केवल दिल्ली क़ा शासक रह गया था हिन्दुओ ने सम्पूर्ण भारत पर पुनः वापसी कर ली थी. दंगा तो भारत में हमेसा से होता रहा अहमदाबाद में तो दीवारों को पुताया ही नहीं जाता था क्योंकि दंगे होगे ही आग लगेगी फिर दीवारे काली होगी यह सभी को पता रहता था, इतना ही नहीं एक बार मुहम्मद साहब क़ा बाल हज़रत बल मस्जिद (घाटी कश्मीर ) से गायब हो गया दंगा हैदराबाद जैसे स्थानों पर शुरू हो गया बाद में बाल मिल भी गया जाच हुई पता चला कि यही वह बाल है। 
        हिन्दू झेलता रहा एक बार आरिफ मुहम्मद खान जो प्रगतिशील मुसलमान माने जाते है माननीय रज्जू भैया से मिलने आये उनसे कहा कि हिन्दू मुसलमान बड़ा-छोटा भाई है रज्जू भैया ने सहज ही उत्तर दिया यदि छोटा भाई गलती करता है तो बड़े भाई को दो चाटा लगाने  क़ा अधिकार तो होता है ----! भारतीय राष्ट्र करवट लेने लगा, देश आज़ादी क़े समय लोकमान्य तिलक ने गणेश उत्सव क़े माध्यम से हिन्दू समाज जागरण किया था उसी तर्ज पर भगवान श्री रामजन्मभूमि  ७४वी मुक्ति आन्दोलन शुरू हुआ यह १९८५ में श्रीराम जानकी रथयात्रा क़े रूप में हुआ सीतामढ़ी से अयोध्या फिर लखनऊ में विशाल धर्म सभा क़े रूप में परणित हुआ धीरे -धीरे जनजागरण प्रदेश ही नहीं देश ब्यापी हो गया, उत्तर प्रदेश क़े तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने कहा कि परिंदा पर नहीं मार सकता इस बयान ने आग में घी क़ा काम किया १९८९ नवम्बर-दिसंबर क़ा समय सौभाग्य से मै उस समय प्रयाग में जिला प्रचारक था ऐसा आन्दोलन न भूतो न भविष्यति पूरा देश अयोध्या कि तरफ बढ़ता हुआ सेकुलरिस्ट चाहे जो कहे पूरे देश में दंगे बंद हो गए कही कोई दंगा नहीं जब राष्ट्रबादी जागते है तो अराजकता अपने-आप बंद हो जाती है जो आ रहे थे  वे क्या बोल रहे थे  यह नहीं पता जैसे गगरी में कंकड़ डालकर हिलाने पर आवाज़ होती उसी प्रकार आवाज़ आती -- लेकिन सभी क़ा एक ही लक्ष्य था अयोध्या, सरकार ने सभी रास्ते बंद कर दिए लोग खेत खलिहान होते हुए चले गाव क़े लोगो ने रास्ता बनाया महिलाओ ने पैदल चलकर आने वाले कारसेवको की सेवा हेतु गरम पानी से उनके पैर धोते--- कि ये राम भक्त है अद्भुत दृश्य था । 
        परिंदा पर नहीं मार सकता----!
        पूरे प्रदेश को जेल में परिणित कर दिया गया था लगभग २० लाख हिन्दू जेल यात्री हुये लाखो कारसेवक अयोध्या पंहुच ढाचे पर चोट  किया, परिंदा ने पर मारा, आन्दोलन तीव्र होता गया हिन्दू समाज क़ा विस्वास बढ़ता गया वह दिन भी आया जब मा.आडवानी जी  ने रथ यात्रा शुरू की हिन्दू उद्देलित हो गया रथयात्रा बिहार पहुची थी कि लालू यादव ने श्री आडवानी जी को गिरफ्तार कर किया उसने पूरे देश को और आंदोलित कर दिया, हम सभी जानते है कि जो गुलामी क़ा ढाचा था वह भारतीय जानता ने केवल गिराया ही नहीं तो उसके मलवे सहित सब ईट उठा ले गए और उसी स्थान पर जहा भगवान बिराजमान थे वही श्रीराम क़ा मंदिर बनाया गया अब भब्य मंदिर क़ा निर्माण होना बाकी है मै कारसेवा क़े पहले जन्मभूमि गया था, केंद्रीय पुलिस बल क़ा पहरा था बड़ी ही चेकिंग थी उस स्थान पर एक जगह मैंने बालू क़ा एक ढेर देखा पूछा की ये बालू कहा से आया केंद्रीय फोर्ष क़े लोगो ने बताया की जब कारसेवक आयेगे तो मंदिर क़े लिए बालू तो चाहिए, आखिर हम पुलिस वाले भी तो हिन्दू है, पुलिस के लोग सरयू जी स्नान क़े जाते तो अपनी पैंट क़े दोनों जेब में बालू भर कर लाते ये वही बालू है, राम क़े प्रति श्रद्धा की पराकाष्ठा है पूर्ब प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी क़े अनुसार ये ढांचा गिराना राष्ट्र जागरण क़ा प्रगटीकरण था। 
           मैंने जिस बात की शुरुवात किया था कि दंगे कब तक, जब तक हिन्दू यानी राष्ट्रबादी ताकते सोती रहती है हिन्दू जगा दंगे बंद हो गए, आज उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात या अन्य स्थानों पर अब वैसे दंगे नहीं होते लेकिन सेकुलरिस्टो क़ा दर्द बढ़ता जा रहा है उन्हें तो दंगे चाहिए कांग्रेश तो बिना दंगे क़े रह ही नहीं सकती वह तो उसका ब्यापार है ------- रहा कश्मीर क़ा सवाल ! यदि भारत खड़ा हो गया तो कश्मीर अपने-आप ठीक हो जायेगा उन्हें केवल यह पता हो जाय कि हमारे साथ देश द्रोहियों क़े समान ब्यवहार होने वाला है, कश्मीरी मुसलमानों को भारत क़ा केवल रुपया अच्छा लगता है भारत अच्छा नहीं लगता तो वे भारत छोड़कर जा सकते है ! लेकिन भारत कश्मीर नहीं छोड़ेगा ! मुसलमानों क़े लगभग ५६ देश है दुनिया सबसे बड़ा आतंकबादी देश फिलिस्तीन सभी मुसलमान क्यों नही सहयोग कर पा रहे है ? यदि कश्मीरी इस मुगालते में कि विश्व मुस्लिम समुदाय उनकी मदद करेगा यह उनकी गलत फहमी है ये कौम आपस में लड़ने वाली कौम है इरान- इराक, अफगानिस्तान -पाकिस्तान शिया-सुन्नी बहाई-कादियानी ये लड़कर मरने वाली कौम है, कम से कम भारत कश्मीर को फिलिस्तीन नहीं बनाने देगा। 
         भारत की सभी समस्याओ क़ा समाधान राम मंदिर में निहित है भगवान राम इस देश क़े राष्ट्र पुरुष है उन्ही क़े माध्यम से समाज खड़ा होगा मंदिर बनाने से हिन्दुओ क़ा स्वाभिमान जागेगा पूरा भारत खड़ा हो जायेगा भारतीय राष्ट्र जब खड़ा हो जायेगा, अपने आप आतंकबाद ख़त्म हो जायेगा जैसे शरीर जब कमजोर होती है तो अनेक बीमारी होती है उसी प्रकार राष्ट्र कमजोर होनेपर अलगावबाद आतंकबाद पैदा होता है भारत और भारतीय नेतृत्व मजबूती से खड़ा होने पर कश्मीरी आतंकबाद, अलगाव बादी भाग जायेगे, यह सभी को पता है कि वहा मंदिर था-है और मंदिर बनेगा, हिन्दू न तो मक्का न तो मदीना में मंदिर बनाने जा रहे है ये तो अयोध्या है अयोध्या इसे स्वीकार करना ही पड़ेगा, आखिर वे कौन लोग है जो फैसला टलवाना चाहते है, सेकुलर ताकते चाहती है कि निर्णय न हो नहीं तो उनकी खेती बंद हो जाएगी, उत्तर प्रदेश को तो युद्ध क़ा मैदान बना रखा है जब की कोई तनाव नहीं लेकिन केंद्र व राज्य सरकार तनाव पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है ।  
           राम मंदिर बनाने से एक मजबूत राष्ट्र क़ा सन्देश जायेगा ढाचा गिराने वाले कोई पण्डे पुजारी या साधू संत नहीं थे वे सभी भारतीय नवजवान थे जो कालेज में पढने वाले जो जींस पहिनते थे बड़े-बड़े बाल रखते थे अब भी समय है 'मुसलमान' हिन्दुओ से मंदिर बनाने क़ा पहल करे आखिर मुसलमानों को भी अपने अपमान क़ा बदला मंदिर बनवा कर लेना चाहिए क्यों कि उन्हें किस प्रकार मुसलमान बनाया गया वे जानते है कम से कम मुसलमानों को अपना रिश्ता बाबर से नहीं जोड़ना चाहिए नहीं तो हिन्दू मुसलमानों क़े प्रति वैसा ही ब्यवहार करेगे जैसा मुसलमान हिन्दुओ क़े साथ कर रहे है, सेकुलर क़ा अर्थ होता है बेधरम ये कैथोलिक सोनिया, मनमोहन, चितंबरम, ममता, सीताराम एचुरी, लालू, मुलायम कोई भी बामपंथी, सेकुलिरिस्ट न तो भारत क़े हितैसी है न ही मुसलमानों क़े वे तो केवल वोट क़े सौदागर है इसलिए देश भक्ति क़ा परिचय देते हुए मुसलमानों को चाहिए कि वे हिन्दुओ क़े साथ खड़े हो जाय, राम मंदिर तो है ही किसी में ताकत नहीं कि मूर्ति वहा से हटा सके मंदिर तो भब्य बनेगा ही कोई उसे रोक नहीं सकता थोडा  अवरोध हो सकता है।     
                
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