धर्म विशेष

सुदर्शन जी बोले तो पूरा देश निहाल , लेकिन मैडम इटली के कारिंदे परेशान.


          वोह क्या हो गया सोनिया के गुर्गे क्यों हाय -तोबा मचा रहे है ? देखा सडको पर कुछ कांग्रेसी नारे लगा रहे है मैंने कुछ कांग्रेसियों से पूछा उन्हें पता ही नहीं लेकिन सब सामिल है जानकारी नहीं तब भी नारा लगा रहे ---- पता चला की सोनिया मैडम को खुश करना है इसलिए संघ का विरोध करना है क्यों किसलिए यह सब पता नहीं धीरे-धीरे काना फूसी हुई अरे कोई संघ के कोई  सुदर्शन जी है उन्होंने सोनिया के बारे में उनकी असलियत बताई है तो एक ने कहा की तो परेशानी कहाँ है आखिर सुदर्शन जी तो संघ के है झूठ तो नहीं बोलेगे, बात तो कुछ न कुछ तो होगी यदि गलत बोले तो उन पर मुक़दमा करना चाहिए----- चुप ये क्या बोला वह तो जो बोले है बिलकुल सही बोले है मुक़दमा में तो वे फस जाएगी इस नाते केवल हल्ला मचाकर संघियों को डराना ही है देखते-देखते अंत में जो वे चाहते थे वही बयान संघ की तरफ से आ भी गया .
तो एक ने पूछा की आखिर क्या बोले सुदर्शन जी ये तो बताओ--? एक कांग्रेसी ने कहा कि महारानी का पुराना इतिहास ---जिसमे सोनिया का असली नाम अंटोनिया है न कि सोनिया २७ अप्रैल १९८३ को भारत में इटली का राजदूत द्वारा गृहमंत्री को लिखे गए पत्र में यह स्पष्ट होता है और यह पत्र सार्बजनिक नहीं किया गया, उनके जन्म प्रमाण पत्र में भी सोनिया का नाम अनातोनिया ही लिखा है, सोनिया का जन्म ओब्रस्सानो में नहीं हुआ जैसा कि संसद बनने पर लोकसभा में दिए बायोडाटा में दावा किया गया था उनके जन्म प्रमाण पत्र में लुसियाना लिखा है, सोनिया दसवी से अधिक नहीं पढ़ी है २००४ के निर्वाचन में चुनाव लड़ते समय रायबरेली चुनाव अधिकारी को झूठा सपथ पत्र दिया था कि केम्ब्रिज यूनिर्सिटी से अंग्रेजी से डिप्लोमा है, सही तथ्य यह है सोनिया किसी भी कालेज से कोई डिग्री प्राप्त नहीं है .
           सोबियत संघ द्वारा शुरू से ही सोनिया गाधी और उनके इटेलियन परिवार को संरक्षण दिया जाता रहा, जब भारत के प्रधानमंत्री के यहाँ सम्बन्ध हो रहा हो तो सोबियत इसको बहुत ही महत्व दिया इस बिबाह से सोबियत संघ को प्रधानमन्त्री के घर में घुसपैठ करने में आसानी हुई, सोनिया - राजीव की शादी के बाद प्रत्येक भारतीय सोबियत रक्षा ब्यापार सोनिया मायिनो परिवार को दलाली दी गयी प्रतिष्ठित स्विज पत्रिका के नवम्बर अंक के अनुसार राजीव गाधी के खाते में करीब दो अरब डालर जमा थे जो राजीव गाधी की हत्या के बाद सोनिया को प्राप्त हुए .
       १९७७ में जनता पार्टी की सरकार में  सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ऐ.सी. गुप्ता के नेतृत्व में जाच आयोग बिठाया और इस आयोग ने गाधी परिवार द्वारा धारित मारुती कंपनी पर एक विस्तृत जाच रिपोर्ट जारी की जिसमे सोनिया गाधी द्वारा किये गए फेरा कंपनी एक्ट और फोर्नल रजिस्टेशन एक्ट के उलंघन के आठ मामले लिस्ट किये गए पर सोनिया पर आज तक कोई मुकदमा नहीं चलाया गया, १९८३ में विदेशी होते हुए भी अपना नाम मतदाता सूची में डला दिया और चार दिन बाद नागरिकता प्राप्त करने हेतु अबेदन दे दिया इससे स्पष्ट होता है कि सोनिया गाधी के मन में भारतीय कानून की कितनी ईज्जत है और उनकी मनोदसा क्या है ?.
           इन दिनों सोनिया गाधी की पार्टी की मित्रता डीएमके जैसे पार्टियों से है जो राजीव गाधी के हत्यारों की प्रसंशा करते है कोई भी भारतीय बिधवा ऐसा नहीं करेगी, सुब्रमणियम स्वामी ने राजीव की हत्या में सोनिया के रोल की जाच और सबसे अधिक बिकने वाली किताब कोणार्क प्रकाशन ने सन २००० में प्रकाशित किया इस किताब में संभावित षड्यंत्रों के संकेत दिए गए है.
            सोनिया के गुर्गे हाय-तोबा मचाने लगे संघ के लोग सीधे शरल राजनीति जानते नहीं वास्तव सुदर्शन जी के बयान ने भारत को जो दिया उसे हम समझ नहीं सकते आज सारा देश जानना चाहता है की भारत पर स्वदेशी या विदेशी शासन करेगे, आज भी भारत ईटली का गुलाम जैसा ही है मनमोहन की ताकत तो प्रियंका गाधी के बच्चे जितनी भी नहीं है सुदर्शन जी के बयान तो कांग्रेसियों के लिए ज्ञान बर्धक ही था वे बड़े प्रसन्न थे की कोई तो बोला सही -सत्य तो कडुवा होता ही है वास्तव में ये सुदर्शन जी की दवा भारत के लिए कडुई दवा थी भारत को बचाने के लिए इसी प्रकार की दवाईयों की आवस्यकता है यदि सोनिया की तरफ से मुकदमा हो जाता तो दूध का दूध -पानी का पानी अलग अलग हो जाता. एक ने पूछा की हम क्यों हाय तोबा मचा रहे है दुसरे ने कहा की अपने नेता को खुश करना है, फिर दिग्विजय क्यों बोलते जा रहे है दुसरे ने उत्तर दिया की आखिर उन्हें मंत्री नहीं बनना है क्या ? जब-तक वे हिन्दुओ को गाली नहीं देगे तब-तक मंत्री तो बन नहीं सकते, सभी जानते है की सोनिया जब भी मौका मिलता है उन्हें ईशाई ही दिखाई देता है चाहे वे गिरधर गोमंगो हो या अजित जोगी अथवा आंध्र में रेड्डी या अंटोनी हो या आस्कर फर्नांडीज--हिन्दुओ सावधान! धर्मनिरपेक्षता के नाम पर ईसाईयों और मुसलमानों का शासन, लगता ही नहीं की ये सरकार भारत की सरकार है हिन्दुओ जागो भारत को भारत बनाये रखने में सहयोग ही नहीं अपना सब -कुछ लगाने का समय गया है . 

2 टिप्‍पणियां

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

क्या करें जब तक हिन्दू जागने लगता है, आडवाणी जी थपकी देकर फिर से सुला देते है ! :)

बेनामी ने कहा…

दिग्विजय सिंह "मालिक के कुत्ते" भांति हिज मास्टर्स भ्वाइस बोलते रहते है. अब लोग उनको महत्व नही देते. बल्की मै लोगो से मिला हुं जो संघ जैसे गैर-हिंसक राष्ट्रवादी संगठन के विरुद्ध बोले जाने से कांग्रेस के प्रति बेहद नाराज है.