सांस्कृतिक राष्ट्रबाद के प्रणेता थे आदि जगद्गुरु शंकराचार्य------ के जन्म दिन पर--विशेष.

          यह भारत माता रत्न- गर्भा है जब-जब देश पर कोई संकट आता है तो किसी न किसी महापुरुष को जन्म देकर इसका अपने- आप उद्धार करती है कोई २८०० वर्ष पूर्व बिखरते हुए भारत को एक करने ही नहीं सिकंदर और सैल्युकश जैसे विश्व विजेता स्वप्न लेकर आये विदेशी हमलावरों को केवल पराजित ही नहीं तो भारत का राजनैतिक एक विशाल भारत आर्यावर्त  का स्वरुप देने के लिए चाणक्य और चन्द्रगुप्त को जन्म दिया जिसने एक ऐसे भारत का निर्माण किया जिसे ब्रिटिश इण्डिया भी छू नहीं सकी.
      २५२० वर्ष पूर्व [८ मई ] सुदूर दक्षिण केरल के कालडी गाव में एक विद्वान ब्रह्मण परिवार में एक बालक का जन्म हुआ जिसका नाम शंकर था चार वर्ष की अवस्था में उन्हें वेदांग तमाम शास्त्रों का ज्ञान हो गया था वे बड़े ही मेधावी थे माता के परम भक्त थे घर से थोड़ी दूर एक नदी बहती थी माँ को स्नान हेतु जाने में कठिनाई होती थी अपनी माता के कष्ट को सहन न होने के कारन  प्रार्थना की, कि हे भगवती आप हमारे घर के बगल से आने से हमारी माता को स्नान करने में सुविधा होगी वर्षा ऋतू के समय ही नदी शंकर के घर के पीछे बहने लगी ऐसे ही जब वे सात वर्ष की आयु में सन्यास लेकर अमरकंटक अपने गुरु गोविन्द पाद के पास गए एक दिन नर्मदा में बाढ़ आई ऐसा लगा की नर्मदा जी का पानी उस गुफा के अन्दर आ जायेगा शंकर ने गुरु जी का ध्यान न टूटे इस नाते एक घड़ा गुफा के मुख पर रख दिया सारा का सारा पानी उस घड़े में आ गया ऐसे माता और गुरु भक्त थे हमारे शंकराचार्य गुरु के आदेश पर देश दर्शन करते हुए, पतन होते हिन्दू धर्म को उन्होंने शास्त्रार्थ के द्वारा हिन्दू धर्म की श्रेष्ठता को सिद्ध किया और देश के चारो द्वारो पर चार पीठ स्थापित कर पूरब से पश्चिम उत्तर से दक्षिण जिस देश [अखंड राजनैतिक भारत] का निर्माड चाणक्य और चन्द्रगुप्त ने किया उसे पुष्ट सांस्कृतिक भारत का निर्माण आदि शंकर ने किया आज भी उनकी अखंड परंपरा चली आ रही है भारत का आज भी सांस्कृतिक स्वरुप उन्ही का निर्माण किया हुआ है भारतीय समाज को सर्बाधिक प्रभावित करने वाले सन्यासी हुए जिन्होंने सम्पूर्ण देश को सांस्कृतिक रूप प्रदान कर एक स्वरुप दिया, जब-तक एक भी हिन्दू रहेगा यह परंपरा अक्षुण रहेगी.

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