---- पृथ्वीराज की आंखें ---
कमोवेश यह सभी जानते हैं कि पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को 17 बार छोड़ दिया? और 18 वें बार में मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान की आंखें निकाल ली?
लेकिन कभी इस पर विचार किया कि पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी को 17 बार क्यों छोड़ दिया? और एक बार मौका मिला तो गौरी ने पृथ्वीराज की आंखें क्यों निकलवा ली? जानना जरूरी है कि प्रत्येक घटना की कोई न कोई वजह होती है। जिसे नजर अंदाज कर देना वजह और साक्ष्यों की हत्या के समान है। हमें किताबों में भी यह कभी नहीं पढ़ाया गया कि आखिर आंखें ही क्यों निकाल ली गई? देश में गद्दारी करने वाले जयचंद के विषय में भी कभी विस्तार से नहीं पढ़ाया गया? हमारे इतिहास की किताबों में ऐसा इसलिए नहीं पढ़ाया गया ताकि आने वाली पीढ़ी को यह पता नहीं चले कि पृथ्वीराज चौहान कितने बड़े शूरवीर और पराक्रमी योद्धा थे? जिसे पढ़कर आम जनमानस में मुसलमानों के प्रति घृणा का भाव उत्पन्न नहीं हो और दासता में जीता रहे? कपटी विध्वंसक विनाशकारी मुगलों को तो THE GREAT MUGHAL बताकर हम भारतीयों को परोसा गया, लेकिन हमारे शूरवीरों को हमसे छुपाया गया? इसी काम के लिए तो जवाहरलाल नेहरू ने मक्का में जन्मे मौलाना अबुल कलाम आजाद को भारत का पहला शिक्षामंत्री बनाया? और 1977 तक इस देश का शिक्षामंत्री मुसलमान रहा ? कहीं भारत के बच्चे अपने पूर्वजों को जान कर उनके अंदर का शौर्य न जाग जाए, इसलिए हमसे हमारा इतिहास छुपाता रहा?
आईए पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी पर !
पृथ्वीराज चौहान अपने काल के सबसे बड़े शक्तिशाली, निडर, पराक्रमी और वचन की बाध्यता वाले अजमेर का राजा थे। पृथ्वीराज जैसा पूरी पृथ्वी पर एक भी राजा नहीं था। कन्नौज का राजा जयचंद जो पृथ्वीराज का रिश्तेदार भी था, मन ही मन पृथ्वीराज से जलता था। पृथ्वीराज का नाना अनंगपाल ने दिल्ली में लाल किले का निर्माण कराया और जब अंत समय आया तो अपने शूरवीर नाती पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का राज सोंप दिया। इससे जयचंद और भी चिढ़ गया क्योंकि वह भी राजा अनंगपाल का नाती लगता था। उपर से जयचंद की बेटी संयोगिता ने महल के द्वार पर बने द्वारपाल पृथ्वीराज की मूर्ति के गले में वरमाला डाल कर पृथ्वीराज को अपना वर चुन लिया। जब अजमेर में पृथ्वीराज को इस बात का पता चला तो वह कन्नौज आया और संयोगिता को घोड़े पर बिठाकर ले चला गया। कन्नौज में जयचंद सहित किसी की इतनी हिम्मत नहीं हुई जो पृथ्वीराज को रोक सके ? पृथ्वीराज से बदला लेने के लिए जयचंद ने अफगानिस्तान के मोहम्मद गौरी से संपर्क किया और युद्ध करने के लिए प्रेरित किया। तय हुआ कि जयचंद की सेना और मोहम्मद गौरी की सेना दोनों मिलकर युद्ध करेगी।
तय यह भी हुआ कि दिल्ली राज्य और अजमेर राज का धन दौलत और सुंदर स्त्रियां लेकर गौरी वापस हो जाएगा और दिल्ली लालकिला जयचंद को सुपुर्द कर देगा?
कहते हैं कि युद्ध शुरू होने से पहले शत्रु अपने प्रतिद्वंद्वी की ताकत का पता लगाता है और उसी हिसाब से युद्ध करता है। यही नियम आज भी है। दुश्मन प्रतिद्वंद्वी के स्वभाव विचार का भी आकलन करता है। युद्ध शुरू होने से पहले सभी मापदंडों को बारीकी से परख लिया जाता है। दिल्ली पहुंचने से काफी दूर गौरी ने लश्कर सहित डेरा डाल दिया जो हरियाणा में आज भी सबूत है। जब गौरी ने पृथ्वीराज चौहान की जानकारी ली तो गौरी का कलेजा दहल गया। जान जाने के डर से गौरी लौटकर अफगानिस्तान जाने लगा तो जयचंद ने एक युक्ति सुझाई। जयचंद ने गौरी को बताया कि पृथ्वीराज वचन का पक्का है। वह क्षत्रिय है और क्षत्रिय सूरवीर के साथ अपने वचन का भी पक्का होता है। जैसा कि हमारे धर्मग्रंथों में भी वर्णन है -
* रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई*
जयचंद मोहम्मद गौरी को समझाने में सफल रहा कि पृथ्वीराज यदि गौरी की पत्नी को यह वचन दे दे कि उसके पति की हत्या नहीं करेगा तो पृथ्वीराज गौरी को कभी नहीं मारेगा ? इसके लिए गौरी की बीवी को अजमेर जाकर पृथ्वीराज चौहान को राखी बांधनी होगी और पृथ्वीराज द्वारा पूछे जाने पर पृथ्वीराज से पति की रक्षा का वचन लेना होगा? योजना कारगर रही और गौरी ने अपनी बीवी को अफगानिस्तान से बुलाकर पृथ्वीराज को राखी बांधने अजमेर भेजा। गौरी की बीवी ने कुटिलता पूर्वक पृथ्वीराज चौहान को राखी बांधी। जब चौहान ने बदले में कुछ मांगने कहा तो सिखाए गए तोते की तरह गौरी की बीवी ने कहा कि मेरा पति मेरे मना करने के बाद भी आपसे युद्ध करना चाहता है। मुझे वचन दीजिए कि आप मेरे पति की हत्या नहीं करेंगे? पृथ्वीराज ने वचन देकर उपहार देकर सम्मानपूर्वक गौरी की बीवी और तथाकथित बहन को विदा किया। गौरी की बीवी लौटकर लश्कर में आई और सारी बातें बताई। अब जयचंद और गौरी आस्वस्थ था कि गौरी मारा नहीं जाएगा। गौरी ने दिल्ली पर हमला कर दिया। गौरी का सामना चौहान से हुआ तो कहते हैं कि चौहान की आंखें देखकर ही गौरी के हाथ पैर फूल गए। गौरी पृथ्वीराज की आंखें देखकर इतना डर गया कि पेशाब हो गया? गौरी चौहान के सामने बंदी बना खड़ा था। चौहान ने मोहम्मद गौरी की बीवी को दिए गए वचन के कारण नसीहत देकर छोड़ दिया। लेकिन कहते हैं ना कि यह कौम धूर्त होता है? गौरी ने एक के बाद एक कुल 17 हमले किए और पराजित होकर बचता चला गया। हर बार वह चौहान की आंखों के सामने जाकर डर जाता था। गौरी ने देखा कि सौ बार में भी वह पृथ्वीराज को पराजित नहीं कर सकता है तो जयचंद की सलाह से उसने योजना बनाई कि अब वह सामने से युद्ध नहीं करेगा। उसने पूरी तैयारी के साथ मध्य रात्रि में पृथ्वीराज के सोते हुए शिविर पर जोरदार हमला किया और धोखे से पृथ्वीराज को बंदी बना लिया। पृथ्वीराज को बंदी बना कर गौरी के शिविर में लाए गए। पृथ्वीराज चौहान की आंखों से इतना भय था कि जल्लाद से पृथ्वीराज की आंखें निकाल ली गई। बताना जरूरी है कि मोहम्मद गौरी ने गद्दार जयचंद की भी हत्या यह कह कर कर दी कि जब तुम अपने रिश्तेदार, अपने कौम के नहीं हुए तो मेरा क्या होगे? लश्कर में दरवारी कवि चन्द्र वरदाई को भी चौहान के विषय में अतिरिक्त जानकारी के लिए बुलाया गया। मोहम्मद गौरी को पृथ्वीराज का डर इतना था कि उसने अपना सिंहासन काफी ऊंचा बना रखा था ताकि पृथ्वीराज पहुंच नहीं सके। कवि से पूछे जाने पर चन्द्र वरदाई ने बताया कि पृथ्वीराज बिना नेत्र के भी शब्दभेदी बाण चला सकते हैं? गौरी को आश्चर्य हुआ। उसने जीत का दंभ भरते हुए अट्टहास किया और बाण चलाने की अनुमति दी। तब चन्द्र वरदाई ने कहा -
चार बांस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण, ता ऊपर सुल्तान है मत चूको चौहान ।
पृथ्वीराज ने धनुष बाण उठाया और मोहम्मद गौरी को मार गिराए। मोहम्मद गौरी मर चुका था। गौरी के सेनापति ने पृथ्वीराज चौहान की भी हत्या कर दी, जिसे अफगानिस्तान ले जाकर मोहम्मद गौरी की कब्र की सीढ़ी के नीचे दफनाया गया।
अफ़गानी पृथ्वीराज के ताबूत पर बने सीढ़ियों पर जूता चप्पल खोलकर जाया करते थे जिसे हाल में हमारे साहसी सूरवीर शमशेर सिंह राणा जी ने हड्डियों को निकाल कर लाए और उचित सम्मान के साथ उनकी समाधि बनाई गई है।
उम्मीद है कि अब मोहम्मद गौरी को पृथ्वीराज चौहान ने 17 बार क्यों छोड़ा और मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान की आंखें क्यों निकलवाई?
इन्हीं सब सच्चाई का पुनर्लेखन अभी NCERT किताब में चल रहा है जिस कारण शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और प्रधानमंत्री मोदी जी कांग्रेस वो वामपंथी इतिहासकारों की आंखों में कांटे की तरह चुभ रहे हैं?
वन्दे मातरम् ।


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