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दुबई विमान घटना संपूर्ण विश्व के लिए चेतावनी
भारतीय मूल के पायलट कैप्टन "स्मित मच्छार" की बहादूरी और सूझबूझ की प्रशंसा इस समय पूरी दुनिया में हो रही है। वास्तव में उन्होंने जिस साहस और बुद्धि कौशल का परिचय देते हुए फ्लाई दुबई की फ्लाइट "एफ जेड 1073" को एक सह-पायलट द्वारा विमान को अपह्रत कर क्रैश करने के आतंकवादी षड्यंत्र को नाकाम किया वह सामान्यतः अकल्पनीय है। दुबई से तेल अवीव (इजरायल) जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट में ओमान मूल के सह पायलट जो कट्टर आतंकवादी बन चुका था, ने अचानक "कैप्टन स्मित मच्छार" पर चाकू से हमला कर दिया। हमलावर विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर उसे जमीन पर क्रैश करना चाहता था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने अदम्य साहस से उससे संघर्ष किया और अंततः कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल हुए। बाहर से कॉकपिट का दरवाजा आसानी नहीं खोला जा सकता। ऐसा हो गया इसलिए हमें सामान्य घटना लग सकती है लेकिन यह वाकई असामान्य है। अगर दरवाजा नहीं खुलता तो कुछ भी हो सकता था। दरवाजा खोलने के बाद ही ग्रुप सदस्य और यात्री अंदर आए तथा यात्री के रूप में बैठे दो पायलटो ने विमान को नियंत्रण में लिया। हमलावर को बांधने के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे की ओर मोड़ा गया और सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। पूरे देश में कैप्टन मचार के जीवन के लिए प्रार्थनाएं हो रही है।
विश्व के सभी बड़े नेताओं द्वारा प्रशंसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्कुल सही कहा कि जान की परवाह किए बिना कैप्टन स्मित मच्छार ने बहादुरी से मुकाबला किया और 9/11 जैसी एक और घटना को होने से रोक दिया। उन्होंने मच्छार को भारत का मान बढ़ाने वाला करार दिया। इसी तरह इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उन्हें बहादुर के साथ 9/11 की पुनरावृत्ति रोकने वाला बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें अदभुत सूझबूझ वाला और हीरो तक कहा। उन्होंने कहा कि कमाल की बात है कि पीछे गिरते समय घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद के लिए चिल्लाए। वास्तव में जिन्हें हवाई जहाज उड़ाने का अनुभव है वे इस घटना को असामान्य बहादूरी मानते हैं । दुर्भाग्यवश, भारत में ऐसे नैरेटिव निर्माताओं की बड़ी संख्या है जो इसे भी इजरायल का षडयंत्रपूर्वक किया गया फाल्स फ्लैग औपरेशन बताकर शर्मनाक हरकत कर रहे हैं। एक पायलट पर हमले हुए, उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया, वहां से एअर लिफ्ट कर दुबई लाया गया और नैरेटिव बिल्डरों को यहां भी अपनी कुंठा निकालनी है। खैर, इस पर यहां लंबी चर्चा की आवश्यकता नहीं। संपूर्ण विश्व के समाचार पत्रों ने इस पर अपने समाचार और टिप्पणियां छापीं हैं। विमान के कॉकपिट में हमला करने के लिए या तो वहां क्रैश जो कुल्हाड़ी जैसा होता है, उसका प्रयोग किया या फिर ओमनी पायलट छुपा कर लाया था। जांच आरंभ हो गई है और सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। जरा सोचिए, उस समय जहाज में बैठे लोगों की क्या स्थिति हुई होगी जब कॉकपिट में हिंसाक संघर्ष के दौरान विमान लगभग दो मिनट में 17,400 फीट नीचे उतर गया। फ्लाइटराडार वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, विमान ने उड़ान के दौरान अचानक ऊंचाई खो दी, जो 0521 जीएमटी पर लगभग 34,000 फीट से गिरकर 0522 जीएमटी पर 17,400 फीट से भी कम हो गई। विमान द्वारा पहला आपातकालीन संकेत प्स्क्वॉक कोड 7500 प्रसारित करने के बाद, इजरायली वायु सेना के लड़ाकू विमान विमान की ओर रवाना हो गए। आप विमान में बैठे हों, वह हिलने लगे और अचानक पूरे स्पीड में नीचे आ जाए तो आपकी क्या दशा होगी कल्पना करिए।
जितना अधिक पढ़ा उतना बड़ा आतंकवादी
इस घटना के साथ 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका पर हुई आतंकवादी हमले की स्वाभाविक ही चर्चा आरंभ हो गई है जो विश्व की दृष्टि में इस सदी की पहली सबसे बड़ी और पूरी दुनिया को हिला देने वाली आतंकवादी घटना थी जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। उस दिन आतंकवादियों ने चार विमानों का अपहरण किया था। अमेरिकी एअरलाइंस की उड़ान संख्या - 11 का पहला विमान अमेरिकी समय के अनुसार युबह 8. 25 बजे अपहृत हुआ एवं 8. 43 बजे वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर के उत्तरी टावर से टकराकर उसे घ्वस्त किया। कुछ देर बाद 9.03 बजे दूसरा अपहृत विमान वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर के दक्षिणी टावर से टकराकर उसे घ्वस्त किया। इसमें वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर के 110 मंजली दोनों टॉवर तान के पत्तों के तरह ढह गए। उस घटना में मरने वालोे की संख्या 2792 बताई गई है। शिनाख्त केवल 1521 की ही हो सकी। उसके कुछ ही समय बाद उड़ान संख्या - 77 का तीसरा विमान वाशिंगटन स्थित रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन से टकराया। इस हमले में 125 पेंटागन के कर्मचारी और विमान में सवार 59 लोग काल-कवलित हो गए। चौथा विमान पेन्सिल्वेनिया के पीट्सबर्ग में ध्वस्त हो गया। उसका निशाना कैम्प डेविड था। आप सोचिए, एक घटना घटने के बावजूद उस समय अमेरिका जैसा देश दूसरी, तीसरी और चौथी घटना को न रोक सका। कारण, किसी भी देश की इस तरह के आतंकवाद से बचाव या संघर्ष की तैयारी ही नहीं थी। विमान ऐसे हथियार होते हैं जिनसे महाविनाश के लिए आपको किसी भी विस्फोटक की आवश्यकता नहीं। इसमें शामिल ज्यादातर आतंकवादी अच्छी डिग्री वाले पढ़े- लिखे उच्च परिवारों के थे। इनका उद्देश्य अमेरिका के महाशक्ति के गुरुर को ध्वस्त करना था जिसका प्रतीक वर्ल्ड टावर, पेंटागन और कैम्प डेविड थे।
ओमानी पायलट विमान को कहां टकराना चाहता था इसकी जानकारी अभी नहीं है किंतु इसका अर्थ क्या हुआ कि सन 2001 से इन 25 वर्षों में जेहादी आतंकवाद की मानसिकता इतनी विस्तृत रूप में फैल चुकी है कि उनकी पहचान और तौर-तरीके को समझना लगभग असंभव है। इस घटना ने फिर से केवल इस बात की पुष्टि की है कि 1990 के बाद से पूरे विश्व में नये सिरे से आरंभ इस्लामी या जेहादी आतंकवाद वैचारिक रूप से खतरनाक स्तर तक फैल चुका है। ओमानी पायलट की वारदात बता रही है कि वह आत्मघाती आतंकवादी में परिणत हो चुका था। अनेक लोग इसे फरवरी में ईरान पर अमेरिकी इजरायली हमले के बाद की प्रतिक्रिया बता रहे हैं। क्या आतंकवादी हमले केवल यहूदियों और इजरायल तक सीमित हैं? क्या इसके पहले अलग-अलग रूपों में आतंकवाद के करतूत हमारे सामने नहीं आए? निस्संदेह , यहूदियों के विरुद्ध पूरे इस्लामी जगत में घृणा जनक दुश्मनी का भाव फैलाया गया है। इजरायल के विरुद्ध युद्ध को ईरान ने फतह ए खैबर का नाम क्यों दिया? सोचिए, सातवीं सदी में यहूदियों और हजरत अली के बीच युद्ध हुआ और यहूदी के किले खैबर फतह करने की बात आती है और उसे आज याद कराया जा रहा है। यानी इस्लाम मजहब का जो संघर्ष उस समय था वही आज भी है और यहूदियों का नामोनिशान हमको धरती से मिटाना है। हमने पिछले वर्ष ऑस्ट्रेलिया के एक अस्पताल में दो नर्सों की बातचीत का वीडियो देखा जिसमें वह एक यहूदी मरीज से कह रहीं हैं कि आपको जाना ही होगा और बता भी रही हैं कि उन्होंने कितने यहूदियों को मारा और इसी तरह के डॉक्टर सामने आए। पर आखिर कौन ऐसा समुदाय है जिनके विरुद्ध आतंकवादियों ने हिंसा नहीं की या नहीं कर रहे है?
ट्रंप- नेतन्याहू और मोदी
वर्तमान विश्व का दुर्भाग्य है कि सितंबर 2001 के हमले के बाद जिस अमेरिका ने अपने नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध सघन युद्ध आरम्भ कर इनके समूल नाश का संकल्प व्यक्त किया वही धीरे-धीरे भाग खड़ा हुआ तथा अब उसके सक्रिय सैन्य एजेंडा में आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक संघर्ष के प्रमाण तक नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन द्वारा आतंकवाद के सबसे बड़े केंद्र पाकिस्तान को गले लगाना विश्व के लिए खतरनाक संकेत है। जिस अबू मोहम्मद अल-जुलानी को अमेरिका ने आतंकवादी घोषित किया उसे सीरिया का राष्ट्रपति बनाया तथा ट्रंप उससे हाथ मिलाने तक पहुंच गये। मुस्लिम देशों के दबाव तथा पश्चिमी देशों में उनके हिंसक व उग्र प्रदर्शन के कारण अनेक देशों ने फिलीस्तीन को एक पक्षीय मान्यता दे दिया। बार-बार आतंकवादी वारदात झेलने के बावजूद आतंकवाद से संघर्ष के लिए खड़ा होने वाला पश्चिम व्यवहार में घुटने टेक चुका है। नाटो का भविष्य अनिश्चित है। आज संघर्षरत विश्व में आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट संघर्ष नामुमकिन है। कायदे से इस घटना के बाद अमेरिका जैसे देश को अपने पूरे रवैया पर पुनर्विचार करना चाहिए था जबकि इसका कोई संकेत नहीं। एक भारतीय मूल के पायलट ने तत्काल दूसरे 11 सितंबर की पुनरावृत्ति को भले रोक दिया किंतु अगर इसके पीछे की विचारधारा और संपूर्ण इस्लामी जगत के अंदर व्याप्त सोच को समझ कर शक्तिशाली देश खड़ा नहीं हुए तो इसके घातक परिणाम संपूर्ण मानव सभ्यता को भुगतना पड़ेगा। इजरायल के राष्ट्रपति नेतन्याहू ने कहा है कि जिस देश ने इसे यहूदियों को मारने का अथवा प्लेन हाइजैक करने के लिए इस आतंकी को भेजा था उसका हम समूल नाश करेंगे।(वरिष्ठ पत्रकार अवधेश जी के लेख पर आधारित)


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