भारत के सपूतो की हत्या ---- [छत्तिसगढ़ ].


गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

      छत्तीसगढ़ दंतेवाडा हत्या कांड कायरता पूर्ण है, अब मानवाधिकार बादी कहा है, अरुंधती राय कहाँ है, तिश्ता जावेद  कहाँ है, ये सभी तो इस हत्या में मारे ८० से अधिक सी.आर.पि.ऍफ के जवानों के मरने क़ा उत्सव मना रहे होगे ।इन बिदेशी एजेंटो के बैंको के खातो की जाच होनी चाहिए, इन सबकी करतूत गुजरात में सामने आ चूका है, इन्होने दबाव डालकर गोधरा के बाद हुई हिंसा में जो गवाही दिलाई थी वह पलटी खा गई. और कहा की मेरे ऊपर गवाही के लिए दबाव डाला गया था। इनकी बिना परवाह किये आतंकबादियो से निपटना पड़ेगा, ये तो हाय तोबा मचाते रहेगे, गृहमंत्री क़ा पलटी खाने वाला बयान नुकसान दायक हो सकता है. इन सभी मानवाधिकार बादियो और आतंकबादियो के संबंधो की भी जाच होनी चाहिए। 
         ये सारी हिंसा भारत को अइस्थिर करने के लिए है, इनको समूल नष्ट करना ही श्रेयस्कर होगा। जो सुरक्षा कर्मी मारे गए है उनकी पत्निया, बच्चो और उनके परिजनों के दुखो को देखा नहीं जा रहा, पूरा देश उनके साथ है, आज पूरे देश में शोक की लहर है,ऐसा नहीं की वे किसी एक प्रान्त के थे वे भारत के बिभिन्न प्रान्तों से थे आज देश शोकाकुल है, वहां के मुख्यमंत्री को केंद्र को समझाने में ही बहुत सारा समय निकल जाता है क्यों की ये केंद्र की सरकार माओबादियो को देश भक्त समझ रही है जबकि ये देश द्रोही ही है इसके अलावा कुछ भी नहीं, यदि देश के गृहमंत्री छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के साथ मिलकर इनको समाप्त नहीं करेगे तो देश इनको माफ नहीं करेगा।
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