शंकरदेव क़े अभेद दुर्ग कामरूप को लहूलुहान करते बिधर्मी

 भारतवर्ष की राष्ट्रीय एकात्मता  

मै आपको शंकरदेव की कर्मभूमि, तपस्थली कामरूप यानी असम ले चलना चाहता हू तीन-चार दिन क़े प्रवास क़े पश्चात् लौटा हू वैसे तो असम क़े बारे में बहुत पढ़ा था केवल असम ही नहीं जब हम सम्पूर्ण भारत वर्ष की तरफ देखते है तो राष्ट्रीय एकात्मता क़ा जो दृश्य दिखाई देता है दुनिया में शायद हो.
एक समय था जब श्री राम ने आत-ताई रावण जो लंका क़ा राजा ही नहीं बल्कि त्रिलोक बिजयी भी था, उस समय अधर्म पर धर्म की विजय हेतु भारत क़ा जागरण करके राम ने बानर, भालुओ को साथ लेकर उस अहंकारी को समाप्त किया, इसी प्रकार श्री कृष्ण ने कंश सहित पूरे भारत वर्ष क़े धर्म बिरोधियो को समाप्त ही नहीं किया बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय दिलाई, वैदिक काल क़े पश्चात् भारत राष्ट्र क़े लिए राम और कृष्ण भारतीय राष्ट्रीय एकात्मता के लिए संजीवनी महामंत्र है.

संघर्ष व् भक्ति काल 

 महाभारत क़े बाद से चन्द्रगुप्त मौर्य, पृथबिराज चौहान तक किसी बिधर्मी की हिम्मत भारत क़े तरफ आख उठाकर देखने की नहीं थी, दुर्भाग्य, पृथ्बीराज क़े पतन होने क़े पश्चात् लगातार बिधर्मियो क़े हमले, हमारी आपसी फूट और बिधर्मियो क़े धोखे क़े कारण हम पराजित होने क़े बावजूद हमने संघर्ष नहीं छोड़ा एक तरफ राणा सांगा, राणा प्रताप, शिवा जी, वीरक्षत्रशाल इत्यादि योधा लड़ते रहे तो दूसरी तरफ हमारे साधू, संत उत्तर में संत तुलसीदास, रामानंद स्वामी, रामानुजाचार्य, दक्षिण में संत तुकाराम, स्वामी रामतीर्थ, एवं स्वामी विद्यारण तो पूर्ब में चैतन्य महाप्रभु, शंकरदेव जैसे संतो ने राम और कृष्ण की संजीवनी लेकर सम्पूर्ण भारत वर्ष क़ा जागरण ही नहीं किया बल्कि बिधर्मियो को फटकने नहीं दिया, असम की सुन्दरता जहा नारियल क़े पेड़ वही सुपारी क़े बगान सोभा देते है तो चाय बागन उसमे चार-चाँद लगा देते है वहा की संस्कृति 'अतिथि देवो भव' की है अतिथि सत्कार तो उनको बिरासत में मिला है गाव-गाव में  मंदिरों क़ा भब्यता दिखाई देती है लेकिन आज इन सब पर ग्रहण लग गया है.

मुस्लिम घुसपैठ और चर्च के षड़यंत्र 

 'कामरूप प्रदेश' में तो मुस्लिम आक्रमण सफल भी नहीं हुआ सम्पूर्ण 'असम' में शंकरदेव ने भगवान राम और कृष्ण को आधार बनाकर गाव -गाव में भगवान क़े मंदिर भजन क़े माध्यम से सनातन धर्म को जगाये रखा ज्यो-ज्यो धर्म कमजोर पड़ता गया भारत राष्ट्र कमजोर पड़ता गया, आज नेहरु की नीतियों क़े कारण असम क़े कई प्रान्त बन चुके है नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, और त्रिपुरा दिन प्रतिदिन आतंकबादी गतिबिधिया जोर पकडती ज रही है वे बराबर देश बिभाजन की माग करते रहते है असम की कुल जनसँख्या ३ करोड़, ६० लाख क़े आस-पास है उसमे एक करोड 'बंगलादेशी घुसपैठी' है, मै गुहाटी से नवगाव, घोर्वादिः, तेजपुर, विस्वनात्थ चारली, मिशन चार अली इन स्थानो पर जाने से बंगलादेशी घुसपैठी स्पष्ट दिखाई देते है ब्रह्मपुत्र नदी, मुर्वाली नदी की तलहटी, कछार में वे अपना अड्डा जमाये हुए है सारे रोजगार पर कब्ज़ा किये हुए है बंगला देश क़ा आतंकबादी संगठन हूजी इन्ही क़े बीच में रहते है ये बड़ी ही योजना बद्ध तरीके से सम्पूर्ण असम की पहचान समाप्त करने पर तुले हुए है, इस समय वहा ऐसा नहीं लगता की ये प्रदेश भारत क़ा है केंद्र सरकार बंगला देश क़े चारो तरफ जिन राज्यपालों को नियुक्ति की है वे सभी मुसलमान होने क़े नाते बंगलादेश को घुसपैठ करने में सुबिधा होती है गत वर्ष एक रिपोर्ट क़े अनुसार प्रतिदिन ५००० बंगलादेशी असम में आते है यदि यही स्पीड रही तो वह दिन दूर नहीं जब सोनिया क़े सपने साकार होगे यानी असम मुस्लिम प्रदेश होगा.

मदरसे और चर्च 

  जगह-जगह मखतब, मदरसों की बाढ आयी है लगता है कि 'बंगला देश' क़ा ही कोई एक भाग है, दूसरी तरफ 'इशाई मिशनरी' अपना जाल बहुत दिनों से फैलाया है, 'नवगाव से तेजपुर' में कई स्थानों पर बड़े-बड़े चर्च मिले यह ठीक है की वहा चर्च तो है लेकिन उन्हें उतनी सफलता नहीं मिली लेकिन पादरी और नन्स अपने वेश में परिवर्तन करके भारतीय साधू, सन्यासियों क़ा वेश धारण करके हिन्दुओ को ठगने क़ा धंधा कर रहे है, इससे यह साबित होता है की इशु क़े चेले सब फ्राड यानी ४२० क़ा धंधा कर रहे है ये बेईमानो क़ा धर्म हो गया है, ईशा मशीह यदि सच्चे इश्वर क़े पुत्र रहे होगे तो ये पादरी और उनके अनुयायी उन्हें दुःख पंहुचा रहे होगे .

माँ भारती की पुकार 

 हे हिन्दुओ आपके जगने क़ा समय हो गया है यदि आज नहीं जागे तो हमेशा पछताना पड़ेगा आप किसके सहारे सो रहे है कैथोलिक सोनिया या उनके गुलाम मनमोहन ! ये तो हमारी पहचान ख़त्म करने में लगे है, इसलिए हे भारत उठो जागो और संघर्ष क़े लिए तैयार हो जाओ माँ भारती तुम्हारा आवाहन कर रही है आज आवस्यकता है की फिर से शंकरदेव की प्रेरणा से राम और कृष्ण क़ा स्मरण कर हिन्दुओ को जगाये..   

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5 टिप्पणियां

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  2. माँ भारती का आव्हान सुन कर मैने सब कुछ भुला दिया. सोते जागते बस उसका हीं ध्यान है. लेकिन यह दुनिया कितनी निर्दयी है. आज कोई अपना नही है. न जाने कब इस जीवन सुत्र तोड दिया जाएगा!!! भय भाग जाता है जब याद करता हुं माँ भारती को. माँ तुझे प्रणाम !!!

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  3. ye bahas ka mudda hai aur bahas ke liye drishti ki wyapakata bhi jaruri hai

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  4. बेनामी जी
    नमस्ते
    देश भक्ति तो सर्बश्रेष्ठ होती है
    इस टिपण्णी क़े लिए धन्यवाद.

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