धर्म विशेष

भारत में भगवान राम और अयोध्या को अब अपना सबूत देना पड़ेगा------?

         मुसलमान मोमिन नहीं केवल वोट--------!
         यह कैसी बिडम्बना है इस देश में भगवान राम को अपना सबूत देना पड़ रहा है ! यह सभी जानते है की ऋगुवेद से लेकर ब्रहमण ग्रन्थ, बाल्मीकि रामायण से लेकर रामचरित्र मानस तक सभी में अयोध्या क़ा वर्णन है दुर्भाग्य है की बामपंथी इतिहासकार कालमार्क्स से पीछे नहीं जाना चाहते नहीं तो दुनिया पुरानी मानी जाएगी, मुसलमान १४०० वर्ष से पीछे नहीं जाना चाहते नहीं तो मुहम्मद क़ा क्या होगा ? इसाई २००० वर्ष से पीछे नहीं जाना चाहते नहीं तो इशु क़े अस्तित्व को खतरा हो जायेगा, ये तीनो ताकते भारतीय सेकुलरिस्टो को चारा देते रहते है जिससे हिंदुत्व भारतीयता और राम जन्मभूमि पर गुलामी क़ा स्मारक बनाया जा सके! हिन्दू कोई मुहम्मद साहब क़े जन्म स्थान को तो नहीं माग रहे है न्यायालय ने भी जो निर्णय दिया है वह किसी क़े पक्ष में नहीं है वह तो निर्णय है पहले सेकुलर नेताओ की जमात न्यायालय क़े पक्ष में थी लेकिन जब हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया तो सभी एक स्वर से भारतीय संबिधान व हाईकोर्ट की धज्जी उड़ना शुरू कर दिया इन वोट बैंक क़े सौदागरों को देश व संबिधान की चिंता नहीं ये मुसलमानों को मोमिन मानने को ही तैयार नहीं केवल वोटर ही मानते है!
         निर्णय मंदिर के लिए-----
         जब तक न्यायालय ने निर्णय नहीं किया था तब तक सभी सेकुलर नेता यह कह रहे थे की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संबिधान व न्यायालय को नहीं मानता उनको लग रहा था की संघ परिवार क़ा बयान कुछ भड़काऊ आयेगा और हम वोट की रोटिया सकेगे वास्तव में सेकुलरिस्ट और कांग्रेसी हमेशा दंगे भड़काना संघ क़ा नाम लेकर मुसलमानों को डरवाकर वोट लेना यही पेशा ---- लेकिन दुर्भाग्य से संघ क़े सरसंघचालक क़ा बयान बहुत ही सटीक आया उन्होंने कहा 'ये न तो किसी की जीत है न तो किसी की हार राम मंदिर बनाने क़ा रास्ता न्यायालय ने खोल दिया है मुसलमानों को सहयोग करना चाहिए', मुसलमानों की तरफ से भी सधी-सधाई टिप्पड़ी आयी बामपंथी, कांग्रेश और सेकुलर सभी निराश होकर २-३ दिन तक चुप्पी साध लिए फिर सोच समझकर न्यायालय पर टिप्पड़ी करने लगे और तो और रोमिला थापर जैसे इतिहासकारों ने प्रधानमंत्री से मिलकर न्यायालय की आलोचना ही नहीं की बल्कि धर्मनिरपेक्षता पर खतरा बताया जैसे कोई पहाड़ टूट पड़ा हो, ये सभी 'भगवान राम' क़े अस्तित्व को चुनौती दे रहे है बाबर क़े बराबर खड़ा करने की कोशिस ----! यह कौन नहीं जानता बाबर हमलावर था उसने देश को गुलाम ही नहीं बनाया बल्कि हजारो लोगों को बलात मुसलमान भी बनाया। 
          राम यानी राष्ट्र---------!
          असल में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद दोनों क़े साक्ष्य मौजूद है न्यायालय में यह साबित हो चुका है की राम जन्म भूमि मंदिर को तोड़कर उसी स्थान पर बाबरी मस्जिद बनायीं गयी, मंदिर और मस्जिद दोनों आस्था से ही निर्माण होते है श्री राम जन्मभूमि मंदिर सहित हजारो मंदिर आस्था और राष्ट्र भाव क़े द्वारा बनाया गया है लेकिन अयोध्या में बाबरी मस्जिद, काशी और मथुरा में मस्जिद ये आस्था नहीं हिन्दुओ क़ा अपमान ही नहीं गुलामी क़ा स्मारक बनाया गया, वर्ना जैसे हजारो मस्जिद अन्य स्थानों पर बनायीं जा रही है कही भी मस्जिद बना सकते थे लेकिन ऐसा नही किया, पोलैंड रोमन कैथोलिक देश था सन १९१४-१५ में 'वारसा' पर 'रूशी' अधिकार हो गया रुशियो ने यहाँ 'इस्टर्न आर्थोडाक्स' "कैठेद्रेल" बनाया १९१८ में पोलैंड स्वतंत्र हुआ, उसने "कैठेद्रेल" गिरवा दिया ---इसके निर्माण का उद्देश्य धार्मिक न होकर राजनैतिक था, एक उपासना स्थल पर बने दुसरे उपासना स्थल राष्ट्रभाव घटाते है। 
         न्यायालय का अपमान--------!
        श्रीराम मंदिर ऐतिहासिक तथ्य साक्ष्य और आस्था भी है यह तथ्य प्रमाणित हुए है तो कोर्ट क्या करता--? क्या कोर्ट तथ्यों को ख़ारिज करता--? ऐएसआइटी क़े रिपोर्ट को नजरंदाज करता- ? वास्तव में बाबरी मस्जिद क़ा निर्माण हिंदुत्व क़ा अपमान था, वैसे ही बाबरी मस्जिद क़े शुभ चिन्तक मुसलमानों क़े हितैसी न होकर हिंदुत्व क़ा अपमान कर रहे है, अयोध्या पर उच्च न्यायालय क़ा फैसला एक ऐतिहासिक निर्णय है भारत क़े इतिहास में ५-६ सौ साल से यह मामला बिबाद में था लगभग ६० वर्ष से ये अदालत में है निर्णय १००० पृष्ठ क़ा है हाईकोर्ट ने राम और अयोध्या क़े अस्तित्व को स्वीकार ही नहीं किया बल्कि मंदिर बनाने क़ा रास्ता साफ किया, हम यह कहते है की यदि मस्जिद क़े पक्ष में फैसला आता तो क्या हाईकोर्ट मंदिर को बटवारे में जमीन देता-! यह कटु सत्य है हिन्दुओ की सहिष्णुता ही हिन्दूओं की कमजोरी हुआ करती है---! जब सभी साक्ष्य, सबूत और तर्क मंदिर क़े पक्ष में है तो फिर मंदिर परिसर क़ा एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों को देने क़ा निर्णय क्यों हुआ ? यदि मस्जिद क़े पक्ष में निर्णय आया होता तो क्या हाईकोर्ट मस्जिद क़ा कोई हिस्सा मंदिर को देता शायद नहीं-! अब समय है मुसलमान आगे आकर मंदिर में सहयोग करे आखिर उसे भी मालूम है कि वहा से मंदिर हटाया नहीं जायेगा - मंदिर था, मंदिर है और मंदिर रहेगा, इस तथ्य को सभी को स्वीकार करना चाहिए मंदिर बनाने में जितना ही देर होगा उतना ही वोट की खेती करने वालो की चाँदी रहेगी-! कुछ मुल्ला देश तोड़ने की बात कर रहे है उन्हें यह भूल जाना चाहिए कि अब १९४७ नहीं है-! अब वह भारत नहीं है अब २०१० क़ा भारत है अब हम किसी भी कीमत पर देश बिभाजन स्वीकार नहीं कर सकते-!
          राहुल पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए---!
          संघ क़े संतुलित बयान से कांग्रेश हड़बड़ी में अनाप- सनाप बोल रही है इन्हें काश्मीर में अलगाव बादी, आतंकबादी अच्छे लग रहे है राहुल देश द्रोह पर अमादा है राहुल, दिग्विजय दोनों आतंकबादी और चर्च क़े इशारे पर संघ की तुलना 'सिम्मी' से करना शुरू कर दिया है वैसे संघ को 'देश भक्ति' क़े लिए किसी से 'प्रमाण पत्र' लेने की आवस्यकता नहीं है कम से कम राहुल जैसे लोगो से तो कतई नहीं-! इन पर तो देशद्रोह क़ा मुकदमा होना चाहिए--- ये इनकी बुद्धि  क़ा दिवालियापन नहीं तो और क्या है ?

8 टिप्‍पणियां

उस्ताद जी ने कहा…

3/10

पोस्ट में नयेपन का अभाव
बहुत कुछ पहले ही लिखा जा चुका है

DEEPAK BABA ने कहा…

सूबेदार साहेब..... बढिया आलेख के लिया साधुवाद.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

हिन्दुओं का दुर्भाग्य है बस..

बेनामी ने कहा…

राम आस्था का विषय हैं। राम थे यह हमारी आस्था हीं स्वंम प्रमणित करती है। अन्य कोई प्रमाण की न तो कोई आवश्यकता है और न ही किसी को पुछने का कोई हक है।... राम की प्रमाणिकता को ले कर ज्यादा बेहतर प्रस्तुती की जा सकती है।

दीर्घतमा ने कहा…

बेनामी जी आपने बिलकुल सही कहा कि और प्रमाण दिए जा सकते है -------आस्था को किसी प्रमाण कि आवस्यकता नहीं ---बहुत-बहुत धन्यवाद.

lokendra singh rajput ने कहा…

isi baat ka to rona hai....

arunkumar vyas ने कहा…

जैसे गँगा कि पबित्रता
आग कि शक्ति
सूर्य का प्रकाश
चाद कि शीतलता
माँ कि ममता
आदी सत्य हे
बैसे ही हिन्दु ओर उनके भगबान राम
सत्य हे
""""अयोध्या तो अभी झाँकी हे मथुरा काशी बाकी हे""
बच्चा बच्चा राम का जन्म भुमि के कामका
जिस हिन्दु का खुन खोला बो खुन नही बो पानी हे
राम लला हम आयेगे मँदिर बही बनायेगे
लाढी गोली खाये गे हम मँदिर बही बनायेगे
जय महाकाल

सूबेदार जी पटना ने कहा…

राम और भारतीय राष्ट्र अलग-अलग नहीं किया जा सकता है, रावण ने राम की मर्यादा हनन का प्रयत्न किया तो आज तक हिन्दू समाज उसे क्षमा नहीं कर सका रावण का पुतला दहन प्रति वर्ष होता है , इस कारण मुसलमानों को यह ध्यान रखना होगा कि वे विदेशी अत्याचारी, बलात्कारी बाबर का पक्ष न ले नहीं तो ये भारत है यहाँ के लोग मुसलमानों को कभी माफ़ नहीं कर पायेंगे--!