मा नर्मदा सामाजिक कुम्भ------धार्मिक दृढ़ता--सामाजिक समरसता और राष्ट्र की एकता ----हेतु--- चलो मंडला

    विगत दो दशक से देश में आतंकबाद -माओबाद से देश जूझ रहा है पूरे देश में आज जातिबाद बिकराल रूप धारण कर लिया है वर्ग संघर्ष ने देश के ताने- बाने को बिगड़ कर रख दिया है अनेकता में एकता जो हमारी ताकत थी आज वही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है , जहा विदेशी शक्तिया इसका लाभ उठाकर धर्मान्तरण और अलगावबाद के जरिये देश तोड़ने की साजिस कर रही है वही जाति, भाषा और प्रान्त के नाम पर झूठे स्वाभिमान ने देश में गृहयुद्ध जैसे हालत पैदा कर दिए है जाति ,पंथ और भाषा जो हिन्दू समाज ब्यवस्था के एक अंग थे आज बिकृत होकर वर्गभेद क़ा रूप ले चुके है आज समूचे हिन्दू समाज को एक धागे में पिरोना समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गयी है.
        इसी दिशा में धर्म जागरण ने सामाजिक संगठनों से बिचार- बिमर्ष, चिंतन- मनन से सामाजिक कुम्भ की परंपरा डाली गयी, प्राचीन काल में देश के १२ स्थानों पर कुम्भ क़ा आयोजन हुआ करता था [पहला कुम्भ मक्का में लगता था,]जो हमारे देश की एकता अखंडता के सुदृढ़ माध्यम थे सामाजिक मान्यताओ, परम्पराओ के मूल्याङ्कन व संसोधन की इसमें ब्यवस्था थी. इन्ही उद्देश्यों को लेकर इस कुम्भ क़ा आयोजन किया गया है.
       आदि शंकराचार्य ने मा नर्मदा के बारे लिखा ------------सविंदु सिन्धु सुश्ख्लन्त्रंग भंग रंजितम ,
द्विसत्सू पाप जात-पट कारि वारि संयुतम.
कृतान्त दूत कालभुत भीती हरी वर्मदे,
त्वदीय पादपंकजम नमामि देवी नर्मदे.
      ''' मंडला क़ा महत्व --------- मंडला नर्मदा जो दक्षिण की गंगा कही जाती है के किनारे बसा हुआ है इसे दक्षिण की काशी भी कहते है सुप्रसिद्ध शास्त्रार्थ आदि शंकर और कुमारिल भट्ट के शिष्य मंडन मिश्र क़ा यही पर हुआ था जिसमे शंकराचार्य विजय हुए और मंडन मिश्र और उनकी पत्नी दोनों ने शिष्सत्व ग्रहण किया था, महारानी दुर्गावती  तथा गढ़ मंडला के रणबाकुरे बलिदानों की स्मृति आज भी लोगो के जनमानस में भरी पड़ी है.
         हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व है यदि हिन्दू समाज भारत से समाप्त हो जाता है तो भारत ही समाप्त हो जायेगा जहा-जहा हिन्दू कम हो गया वह-वह भाग भारत नहीं रहा, मध्य प्रदेश में रविशंकर शुक्ल मुख्यमंत्री थे जवाहर लाल नेहरु क़ा जशपुर के आस -पास प्रवास पर आए थे ईशाई बने वनवासियों ने नेहरु जी को काला झंडा दिखाया ही नहीं नेहरु वापस जावो के नारे लगाये उसी समय रविशंकर जी ने नियोगी कमीशन गठित किया, जाच में आयोग ने बताया की ईशाई होने के बाद सभी को अंग्रेजो क़ा भारत से जाना उन्हें अच्छा नहीं लगा, वास्तव में धर्मान्तरण ही राष्ट्रान्तरण है वनवासी  बंधुओ को ईशाई बना चर्च भारत में अराष्ट्रीय गतिबिधि फैला रही है इस कुम्भ के द्वारा जनजातियो में जागरण करना, सामाजिक कुरीतियों को दूर करना, समरसता क़ा भाव और धर्म के प्रति सजगता पैदा कर राष्ट्र भाव जगाकर, जिससे भारत -भारत बना रहे .
          भारतीय संस्कृति क़ा विकाश हमारी पवित्र नदिया- गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, गंडक और सिन्धु जैसी नदियों के किनारे सम्पूर्ण विश्व को आलोकित करने वाली सनातन संस्कृति को जन्म दिया इन्ही नदियों के तटों पर पवित्र वेद और पवित्र ब्रह्मण ग्रंथो की रचना हुई इन्ही नदियों के किनारे महाकुम्भो क़ा आयोजन जिसमे महान संतो ने देश के कोने-कोने से आकर समय, काल, परिस्थितियों पर विश्लेषण कर समाज क़ा पथ प्रदर्शन करते रहे है. इन्ही आयोजनों से ''हिन्दवः सोदरा सर्वे न हिन्दू पतितो भवेत '' क़ा सन्देश देते रहे है. 
        चार साल पहले सबरी कुम्भ लगाकर वन वासियों  में एक सकारात्मक सन्देश दिया गया मंडला में सामाजिक सदभाव, समरसता और राष्ट्रयता को आधार बनाया गया है आइये हम एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खड़े हो मा नर्मदा जयंती के शुभ अवसर पर मा नर्मदा सामाजिक कुम्भ क़ा आयोजन १०-११-१२ फ़रवरी, २०११ को मंडला में किया गया है हम सभी पुण्य के भागी बने.
           ----------हर-नर्मदे --------------   

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