धर्म विशेष

चर्च के कुत्सित कारनामो ने मानवता को भी तिलांजली दे रहे है..सर्वोच्च न्यायलय ने भी फटकारा.

             मई १९३५ में एक मिशनरी नर्श ने गाधी जी से पूछा कि क्या आप मतान्तरण के लिए मिशनरियों के भारत आगमन पर रोक लगा देना चाहते है ? इसके जबाब में गाधी जी ने कहा था  'अगर मेरे हाथ में सत्ता हो और मै कानून बना सकूगा तो मै पहला कार्य करुगा ---मतान्तरण का सारा खेल बंद करा दूगा, मिशनरियों के प्रवेश से उन हिन्दू परिवारों में जहा मिशनरी पैठ है, वेश-भूषा ,रीती -रिवाज और खान -पान में अंतर आ गया है '' मिशनरियों और चर्च के कारनामे मानवता को तार-तार कर देने वाले है पूरे भारत में हिन्दू धर्म और महापुरुषों के खिलाफ अनर्गल प्रचार कर भारत के प्रति श्रद्धा भक्ति कम करने का ही काम कर रहे है .
         आखिर यह कौन सा कारण था की उड़ीसा के जंगलो में वहां के वन- वासियों ने ग्राहम स्टिन्स को उनके दो बच्चो सहित जिन्दा जला दिया, इतना नहीं जलाने के पश्चात् उसके चारो तरफ नाच-नाच कर खुसिया मनाते रहे, क्या उनकी कोई खेत या मेढ़ की दुश्मनी थी आखिर क्यों हुआ- ? इस पर हमें बिचार करना होगा, ये चर्च केवल धर्म परिवर्तन ही नहीं करते तो हमारी संस्कृति को समाप्त कर राष्ट्रीयता को समाप्त करते है, भाई- भाई में विबाद कर उनका शोषण करते है वनवासियों को अपनी धर्म संस्कृति से अत्यधिक प्रेम है उन्हें कोई छेड़े उन्हें बर्दास्त नहीं, पूरा का पूरा वनवासी समाज को मिशनरियों ने त्राहि-त्राहि कर दिया है जहा ईशायियो की संख्या बढ़ गयी है वहां आतंकबाद इतना बढ़ गया है कि हिन्दुओ के किसी भी काम में बाधा खड़ी करना आम बात हो गयी है उसी का परिणाम है उड़ीसा की घटना .
           दारा सिंह के खिलाफ कोई गवाह न मिलना इस बात का सबुत है कि जन मानस 'ग्राहम स्टिन्स' के जलाने पर कितना प्रसन्न था और है भी इसका मतलब वह बहुत बड़ा ही माफिया था, वहां की धर्म-संस्कृत का सबसे बड़ा शत्रु थ, चर्च की कार्य प्रणाली पर पिछले दिनों सर्बोच्च न्यायालय ने भी चिंता ब्यक्ति की है, सर्वोच्च न्यायालय ने 'ग्राहम स्टेंस' और उनके दो पुत्रो को जिन्दा जलाने के मामले की सुनवाई करते हुए ईशाई मत प्रचार को लेकर जो बेबाक टिप्पड़ी की थी कि चर्च द्वारा धर्मान्तरण का ही यह नतीजा था, उसे ईशाई मतावलंबी की भावनाओ को संज्ञान में लेते हुए वापस ले लिया किन्तु संसोधित फैसले में भी चर्च के मत प्रचार और कार्य शैली पर चिंता ब्यक्त की है, अपने फैसले में विज्ञ न्यायाधीश पि. सदाशिवम और बलबीर सिंह चौहान की खंड पीठ ने कहा कि ''गरीब वनवासियों का मतान्तरण करने वाले 'ग्राहम स्टेंस' को सबक सिखाने के लिए जला दिया गया था किसी के धार्मिक विस्वास के साथ किसी प्रकार का हस्तक्षेप करना गलत है, किसी के साथ जबरदस्ती करके अथवा बर्गलाकर उसका धर्म परिवर्तन कराने को सही नहीं ठहराया जा सकता, '' न्यायाधीसो ने महात्मा गाधी और पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन के विचारो को उद्धृत करते हुए कहा था की भारत की एकता 'सहिशुणता और सभी धर्मो के प्रति आदर सम्मान '' के सिद्धांत पर ही आधारित है .
      वर्तमान समय में महात्मा गाधी व बेडकर और मालवीय जी के बिचारो को तार-तार कर कांग्रेस को सोनिया यानी कैथोलिक विचारो द्वारा चला रही है, इस कारन भारत बिरोधी चर्च को प्रश्रय मिल रहा है भारत- भारत के द्वारा नहीं बेटिकन द्वारा चल रहा महसूस होता है .     



4 टिप्‍पणियां

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

विचारणीय लेख के लिए हार्दिक बधाई !

बेनामी ने कहा…

आखिर यह कौन सी बात है की उड़ीसा के जंगलो में वह के वनवासियों ने ग्राहम स्टिन्स को उनके दो बच्चो सहित जिन्दा जला दिया इतना नहीं जलाने के पश्चात् उसके चारो तरफ नाच-नाच कर खुसिया मनाते रहे, क्या उनकी कोई खेत या मेढ़ की दुश्मनी थी आखिर क्यों हुआ
विचारणीय लेख

दीपक बाबा ने कहा…

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JHAROKHA ने कहा…

aadarniy subedar ji
bahut dino baap aapka bhi mere blog par aagman hua aur main bhi pichhle kai maheene se swasthy ki aniymitata ke karan nimi a nahi hao saki abhi bhi kabhi -kabhi hi net par aati hun .mear vishwas hai ki karan jan kar aap mujhe deri se comment dalne ke liye xhma karege .
aapne jo aalekh likha uski in panktiyo ne mujhe bahut hi prabhavit kiya.
किसी के धार्मिक विस्वास के साथ किसी प्रकार का हस्तक्षेप करना गलत है . किसी के साथ जबरदस्ती करके अथवा बर्गलाकर उसका धर्म परिवर्तन करने को सही नहीं ठहराया नहीं जा सकता,
bahut hi sateek baat kahi hai aapne
hardik badhai
poonam