राष्ट्रीय एकात्मता के प्रतीक है हमारे पवित्र तीर्थ और सरोवर

       भारत माता का बिंदु-बिंदु गंगा जल है. यहाँ के कण- कण में भगवान बिराजमान है, जगह- जगह के तीर्थस्थल तथा पवित्र सरोवर भारतीयों की श्रद्धा को ललकार रहा है, भारत भाव को सुदृढ़ बना रहा है, हर एक तीर्थ स्थल का सम्बन्ध ईश्वर की कथा से जुड़ा होता है. किसी न किसी संत तपस्वी के कर्म से वह तपस्थली पवित्र और तीर्थ बन जाती है जहा बिलक्षण विभूतिया उत्पन्न महापुरुष पैदा होते है वह स्थान, तीर्थ- स्थान  समझा जाता है.  तीर्थ स्थलों के दर्शन से भक्त जनों के मन में देश व राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा जग जाती है, जैसे भगवन श्रीराम और अयोध्या, भगवन कृष्ण और गोकुल बृन्दावन, काशी और विश्वेश्वर इसी प्रकार सम्पूर्ण भारत वर्ष महापुरुषों और तीर्थो से भरा पड़ा है हिन्दू इसे अपनी भक्ति से देश को सिंचित करता रहता है ये महापुरुषों के नाम और स्थान एक-दुसरे से एकबद्ध हो गए और यी स्थान हमारे लिए पवित्र तीर्थ होकर उभर गए.
             भारत के सभी दिशाओ में तीर्थ स्थल व पवित्र सरोवर, नदिया श्रद्धालुओ की भावनाओ को पुकार रही है, प्रत्येक तीर्थस्थल से भारतीय एकात्मता का भाव जागृत होता रहता है, उत्तर दिशा में मानसरोवर, दक्षिण दिशा में पंपा सरोवर, पूर्व में बिंदु सरोवर तथा पश्चिम दिशा में नारायण सरोवर चेतनापुंज के नाम से बिख्यात है. ऐसे ही उत्तर दिशा में तप्तकुण्ड, दक्षिण में धनुश्तीर्थ, पूर्व दिशा में श्वेतगंगा और पश्चिम में गोमतीकुण्ड भारतीयों के लिए श्रद्धास्थान बने हुए है, प्रत्येक स्थल से भारतीय संस्कृति का इतिहास झलकता है, राष्ट्रीय एकात्मता भाव का प्रकटीकरण हो रहा है.           

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