धर्म विशेष

गंगाजी केवल मोक्षदायिनी ही नहीं हमारी राष्ट्रीय एकात्मता की प्रतीक है.

         भारत नदियों का देश है दुनिया में नदियों को केवल नदी ही माना गया लेकिन यहाँ पर हमारे महापुरुषों ने इन्हें विशिष्ट स्थान प्रदान किया, प्रत्येक भारतीय, जीवन दायिनी नदियों को माता के समान समझकर आदर सम्मान ही नहीं तो बिभिन्न प्रकार से पूजा अर्चना करता है, हम केवल इसे बहने वाला नाला नहीं मानते जल ही जीवन है और इसमें गंगा जी का स्थान सबसे उचा है सबसे पवित्र, शुद्ध, पापनाशिनी, मोक्षदायिनी ऐसा स्थान भारतीय समाज जीवन में है की जो एक बार गंगा जी में स्नान करता है उसे मोक्ष मिल जाता है इसी कारन सम्पूर्ण समाज में पूज्य है और हम भारत की सभी नदियों को गंगा के समान मानकर उसकी पूजा करते है स्नान के समय गंगा जी का ही नाम लिया जाता है चाहे हम जिस पानी से स्नान कर रह हो वह गंगा जल के समान पवित्र माना जाता है, दीर्घकाल तक गंगाजल अशुद्ध नहीं होता यह उसकी विशेषता है.
           गंगा जी का उद्गम हिमालय पर्वत में गंगोत्री के २२ की.मी. ऊपर गोमुख से निकलती है बड़ा ही मनोहारी दृश्य है इसके ठीक ५कि.मी.ऊपर तपोवन है जहा सौभाग्यशाली लोग कभी- कभी पहुच पाते है, इन्हें भागीरथी, मन्दाकिनी और अलखनंदा इत्यादि नामो से जानते हुए देव- प्रयाग से हम गंगा जी के नाम से जानते है उत्तराखंड स्थित ऋषिकेश, हरिद्वार के जब वे मैदान से प्रवाहित होने लगती है तो इनका स्वरुप विशाल होता  जाता है.
             हमारे महापुरुषों ने राष्ट्रीय एकात्मता की दृष्टि से बताया की गंगा जी भगवन विष्णु जी के चरण से निकलती है ब्रम्हा जी अपने कमंडल में समां लेते है और स्वर्ग स्थित इस नदी को भगवन शंकर जी अपने जटा में धारण कर लेते है, ईक्षाकू बंश के राजाओ ने प्रचंड पराक्रम और सतत तपश्चर्या तथा राजा भागीरथ की दीर्घ कालीन तपस्या से गंगा जी प्रवाहित होने लगी उत्तर प्रदेश, विहार तथा बंगाल जैसे विशाल प्रदेशो को सिंचित करती हुई इस भू प्रदेश को समृद्धि शाली बनाया गंगाजी के किनारे भारतीय संस्कृति अत्यंत गतिमान और समृद्धि होती रही, गंगा जी के किनारे तमाम भारतीय गुरुकुलो के निर्माण हुए भारतीय इतिहास का स्वर्णध्याय गंगा किनारे लिखा गया हिन्दुओ के बहुत सारे श्रद्धा केंद्र, तीर्थ गंगा के किनारे दिखाई देते है, जहा एक तरफ गंगाजी की सहायक नदिया यमुना, सरयू, गोमती, गंडक, राप्ती इत्यादि भारत के एक बड़े भूभाग को सिंचित कर रहरी है दूसरी तरफ एक समृद्धिशाली संस्कृति का निर्माण भी कर रही है कुछ लोग हमारी संस्कृति को कभी-कभार अनजाने में गंगा- यमुनी यानी हिन्दू- मुस्लिम मिली जुली संस्कृति का वर्णन करते है उन्हें शायद नहीं पता कि जहा संगम पर यमुना जी गंगाजी में समाहित हो जाती है वही यमुना जी अपना अस्तित्व समाप्त कर देती है इस नाते संस्कृति के नाम पर केवल और केवल गंगाजी की संस्कृति यानी भारतीय संस्कृति यानी हिन्दू संस्कृति इसके अलावा कुछ नहीं.
        प्रत्येक भारतीय के मन में गंगा जी का स्थान ध्रुव तारा के समान पवित्र है, ये मोक्ष दायिनी है, हिन्दू संस्कृति की उद्धारक है, भारतीय संस्कृति के उत्तरोतर विकास इसी नदी के किनारे हुआ विश्व के मानवता का सर्बोत्कृष्ट विकाश यही से शुरू हुआ इसका पानी अमृत के समान माना जाता है प्रत्येक हिन्दू की इक्षा होती है की मरते समय उसके मुख में गंगा जल अवश्य पड़ जाय जिससे उसे मोक्ष मिल जाय ऐसी श्रद्धा मन में रहती है प्रत्येक स्वर्गीय के लिए गंगाजल अमृत के समान होता है, इसलिए सिखों के पाचवे गुरु अर्जुनदेव जी ने अमृतसर के पास गंगासागर नाम का तालाब बनवाया प्रतापी राजा चोल ने अपनी राजधानी का नाम गंगापुरी रखा अपने देश की अनेक नदियों का नाम गंगा जी जैसा ही झलकता है प्रत्येक नदी को हम गंगा मैया कहकर पुकारते है जैसे पटल गंगा, पैन गंगा, वैनगंगा, वाण गंगा, दमन गंगा, गुप्तगंगा इत्यादि, नर्मदा जी को तो हम दक्षिण की गंगा ही कहते है यह नदी दक्षिण की जीवन धारा है, गोदावरी और काबेरी को भी हम गंगा जी जैसा ही नाम लेकर महत्व पूर्ण बना देते है, हिन्दू और गंगा, भारत और गंगा ,भारतीय संस्कृति और गंगा संस्कृति ये सभी शब्द पर्यायवाची जैसे हो गए है.
         आइये इस मोक्षदायिनी, पाप नाशिनी, भारतीय संस्कृति के स्वरुप को अबिरल प्रवाहित कर हमें संस्कार, समृद्धि से युक्त करने तथा सुसंस्कृत करने वाली इस ममता मई माता के दुःख को भी समझे गंगाजी को बचाए जिससे हमारी संस्कृति भी बचेगी . 
सूबेदार जी 
मुजफ्फरपुर  

4 टिप्‍पणियां

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

मैंने गौमुख से काशी तक गंगा का हाल देखा है,
हैरत होती है इसकी दुर्दशा पर

दीर्घतमा ने कहा…

bahut hi thik kah rahe hai aap hame is mokshdayini ko bachana hi hoga nahi to hamari dharohar sanskriti bhi samapt hogi. bahut-bahut dhanyabad sandip ji

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

lekin is samay to laalach ke maare logon ne bura haal kar diya hai ganga ka, aur ham khamosh baithe hain..

दीर्घतमा ने कहा…

ganga par hame har prakar se ladayi ladni hogi nahi to ham aur hamari sanskriti samapt ho jayegi.