धर्म विशेष

पं. दीनदयाल जी -------------------जैसा वे बोलते थे वैसा ही जीते थे. २५ सितम्बर

           दीनदयाल उपाध्याय का जन्म एक गरीब ब्रह्मण परिवार मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गाव में हुआ था वे बड़े ही मेधावी क्षात्र थे प्रत्येक कक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होते थे एक बार वे और नानाजी देशमुख आगरा में सब्जी खरीद रहे थे फुटकर पैसा नहीं होने से जिस बुढिया से सब्जी ख़रीदा धोखे से पंडित जी ने उसे खोटा सिक्का दे दिया, बाद में देखा की वह खोटा सिक्का कहा गया उन्हें लगा की वह मैंने उस बुढिया को दे दिया तुरंत उन्होंने नानाजी से कहा कि नाना खोटा सिक्का तो मेरे पास नहीं है शायद मैंने वह उस बुढिया को दे दिया उसे वापस करने गए तो वह बुढिया ने कहा की इस युग में भी ऐसे मनुष्य है, दीनदयाल जी संघ के स्वयंसेवक थे वह एक ऐसे प्रचारक थे जो केवल तीन वर्षो में ही सह प्रान्त प्रचारक बन गए और बाद में उनको डॉ मुखर्जी के मागने पर पूज्य श्री गुरु जी ने जनसंघ में काम के लिए दे दिया..
            दीनदयाल जी अपने कृत्यों से ही अपने कार्यकर्ताओ को समझाते थे प्रचारक के नाते वे अलीगढ कल्याण सिंह के गाव में गए थे प्रातः शाखा जा रहे थे अँधेरा था रास्ते में वे एक सूखे कुए में गिर गए जोर से आवाज लगायी की मै इस कुए में गिर गया हू, कल्याण सिंह दौड़े कुए के भीतर से दीनदयाल जी ने कहा तुम थोडा झुको और मै थोडा उछलता हू कल्याण सिंह ने वही किया दीनदयाल जी बाहर आ गए, उन्होंने कल्याण सिंह से कहा समाज का जो अंतिम ब्यक्ति है वह थोडा आगे बढ़ने का प्रयत्न करेगा आगे वाला थोडा उसको उठाएगा यानी सहायता करेगा तो समता- ममता अपने -आप आ जायेगी यही एकात्म मानववाद का दर्शन है ---- जो समता, ममता और बंधुत्व पर आधारित है ऐसे एकात्म मानववाद के प्रणेता थे पं दीनदयाल उपाध्याय .


4 टिप्‍पणियां

Sunil Kumar ने कहा…

सार्थक सन्देश देता हुआ आलेख आभार

बेनामी ने कहा…

RSS people only glorify Mahatma Dindayal Theory. While, they should work on it and find solutions to the problems that may come on way.This way the theory will emerge as an alternate to the British Democracy presently followed by India.

Himwant ने कहा…

महात्मा दीन्दयाल जी के सिद्धांतो के सिर्फ महिमा मंडन से कुछ न होगा. उन्हे प्रयोग कर के देखना होगा, परिमार्जन करना होगा, विचार परम्परा को आगे ले जाना होगा. तभी वह इस ब्रिटानी लोकतंत्र (वेस्ट्मिनिस्टर डेमोक्रेसी के अप्रत्य्क्ष शासन मोडल) के विकल्प के रुप मे प्रस्तुत हो सकेगा.

janardan mani tiwari ने कहा…

दीनदयाल उपाध्याय सत सत नमन