गीता--- सब धर्मो को त्यागकर तुम मेरे शरण में आओ---------भगवान श्रीकृष्ण

         जब भगवन कृष्ण गीता का उपदेश देते हुए अर्जुन को माध्यम बना मानव समाज को उपदेश करते हुए कहते है की 'सर्बधर्मानपरित्याज्यम मामेकं शरणम ब्रज' हे अर्जुन सभी धर्मो को छोड़कर यानि सभी शंकाओ को निर्मूल कर तुम मेरे शरण में आओ यानी मानव धर्म यानी हिन्दू धर्म में आओ ----- तुम शोक मत करो मै तुम्हे सभी पापो से मुक्त कर दुगा.
          हमें समझना चाहिए इसका अर्थ क्या है----?
          मै आपको गीता प्रेस के संस्थापक महांपुरुष हनुमान प्रसाद पोद्दार से संबंधित एक कथा बताता हू बहुत पहले की बात है हनुमान प्रसाद पोद्दार बम्बई में एक प्रायबेट फर्म में काम करते थे वे बड़े धार्मिक, दयालु ब्यक्ति थे कभी-कभी चौपाटी घूमने जाते रहते थे उन्हें कई बार एक क्षाया मिलती और कुछ कहना चाहती थी एक दिन साहस करके पोद्दार जी ने उससे पूछा की आप हमसे क्या चाहते है--? उसने बताया की आपकी आत्मा बहुत ही पवित्र है मै कुछ आपसे चाहता हू और फिर कहा की मै बहुत दुखी हू प्रेत योनी में होने के नाते बड़ा ही कष्ट है मुझे आप इस योनी से मुक्ति दिला सकते है, उन्होंने कहा की क्यों कष्ट है---उत्तर दिया की जो भी लोग धरती में गाड़े जाते है सभी प्रेत योनी में रहते है और बहुत दुखी होती हुई आत्मा भटकती रहती है मै मुक्ति चाहता हू, उसने कहा की मै इसाई हू मेरी कब्र फला स्थान पर है, मेरी कब्र से मेरी एक हड्डी आप गंगाजी में डाल दीजिये तो मुझे मुक्ति मिल जाएगी हनुमान पोद्दार जी उसके बताये हुए कब्रिस्तान में जाकर उसकी हड्डी गंगाजी में डालते है फिर वह आत्मा उनसे नहीं मिली, उसे मोक्ष हो गया. [कल्याण,गीता प्रेस ] इसी घटना के पश्चात् उन्हें बैराग्य हो जाता है और गोरखपुर आकर कल्याण पत्रिका शुरू करते है गीता प्रेस की स्थपाना कर मानवता के कल्याण हेतु हिन्दू धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन शुरू करते है सारा जीवन इसी काम में लगा देते है गीता प्रेस आज भारत का धार्मिक ग्रन्थ हेतु सबसे बड़ा प्रकाशन है .
          भगवन कृष्ण कहते है कि मै तुन्हें मुक्ति प्रदान करुगा क्यों जब तुम मेरे धर्म यानी हिन्दू धर्म में आवोगे यानी मानव धर्म जो प्रकृति से जोड़ता है मुक्ति के लिए अग्नि संस्कार और गंगाजी में राख जाना -------- मै ये कहता हू कि हे हिन्दुओ क्या तुम्हे अपने पुर्बजो की संतानों पर जरा भी दया नहीं आती ? ----- तुम्हारे पुर्बजो की संताने प्रेत आत्मा बनकर भटक रही है उन्हें बड़ा कष्ट हो रहा है यदि तुम बिधर्मियो को भगवन कृष्ण के धर्म यानी हिन्दू धर्म में ले आते हो तो तुम्हारे पुर्बजो की संतानों को मुक्ति मिल जाएगी, फिर कोई धरती में क़यामत के दिन का इंतजार नहीं करेगा न किसी को प्रेत आत्मा होना पड़ेगा इस कारन तुम इन सब पर दयाकर देश व राष्ट्र हित को ध्यान में रखकर सभी को समयानुसार -समयानुकूल अपने धर्म में सामिलकर मानवता का कल्याण करो, आज सारा विश्व सनातन धर्म की तरफ आशा भरी दृष्टि से देख रहा है हमारी तरफ बढ़ रहा है तो अपने बिछुड़े, भटके जिन्हें जोर, जबरदस्ती और बलात्कार द्वारा बिधर्मी हुए बंधुओ को क्यों न हम मोक्ष की धारा में ले आये उनका कल्याण तो होगा ही देश भी बचेगा.

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