कठिन तपस्या के बाद ! विजय दशमी का पर्व --हार्दिक बधाई--!.

हिंदुत्व का अर्थ---!
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आज पूरे भारत में नवरात्रि का व्रत और विजय दशमी का पर्व बड़े ही धूम-धाम से मनाया जा रहा है बहुत सारे नवजवानों को संभवतः जानकारी हो की इस भारतीय संस्कृति के लिए हमारे पूर्बजो ने कितना संघर्ष किया होगा -? हमारे पूर्बजो ने हिन्दू बने रहने के लिए जजिया कर दिया, त्यौहार मनाने के लिए जुरमाना दिया, काशी में दाह संस्कार के लिए कर भी दिया, कितने संघर्ष के बाद हमने यह शुभ अवसर प्राप्त किया।

संघर्ष ही संघर्ष--!
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कितने नादिरसाहो, औरंगजेबों, गजनियो और गोरियों को हमने झेला है, कितने मंदिरों को टूटते देखा है, कितनी बहन-बेटियों के साथ बलात्कार हमने सहन किया, भाई को बांधकर बहन के साथ बलात्कार, राणाप्रताप को जंगल में भटकते-भटकते, छापामार युद्ध करते, शिवाजी को संघर्ष करते, बन्दा बैरागी को बंद-बंद नुचवाते, सम्भा जी को जीभ और आँख निकलवाते भी देखा, और क्या-क्या गिनाये -? इस भारत माता के सुपुत्रों की स्वाभिमान गाथा ! इतना सहन- शील होकर भी हमने अपना धर्म बचाया और धरती भी बचायी.।

आज करणीय---!
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श्रीदुर्गा पूजा के ठीक पहले धर्मजागरण ने एक बैठक दुर्गा पूजा समितियों की बुलाई, जिसमे बहुत सारी समितियां आई भी कार्यक्रम बहुत अच्छा हुआ कुछ नेताओ के भाषण भी हुऐ एक समाजवादी नेता ने कहा की दुर्गा पूजा में लाखों रूपया खर्च होता है उसे बचाकर सामाजिक सेवा कार्य करना चाहिए, वहीं दूसरे पूजा समिति के कार्यकर्ता जो बैंक मे अधिकारी हैं ने अपने भाषण में बताया कि हज़ार वर्ष बाद कितनी कठिन तपस्या के पश्चात् हमने आज़ादी प्राप्त की है आज अवसर है कि हम हिन्दू समाज अपने त्योहारों पर वैभव पूर्ण प्रदर्शन करे, आज दिखाई भी देता है कि हम किसी प्रकार भगवान राम को याद कर विजय दशमी मनाकर, दुर्गा पूजा करके हिन्दू समाज की निष्क्रियता को दूर कर रहे है, दिनों-दिन पूजा पंडालो को बहुत अच्छे प्रकार से सजाया जा रहा है एक-एक पूजा पंडालो पर लाखो रूपया खर्च किया जा रहा है यह आवस्यक भी है लेकिन इसी पूजा पंडालो से ओम, दुर्गा जी इत्यादि के लाकेट भी प्रसाद के रूप में दिए जाने चाहिए, आखिर अपने धर्म के बारे में जानकारी भी हमें इन्ही स्थलों से देने का प्रयास करना चाहिए  हमें आज हजार वर्ष के पश्चात् यह मौका मिला है विश्व को दिखाना भी है की हम कुछ भूले नहीं है और अनादि काल तक हम अपनी संस्कृति को अक्षुण बनाये रखेगे हमें इस संबोधन को याद रखने की आवश्यकता है ।

सारा का सारा नवजवान धार्मिक--!
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मै कुछ निराश लोगो से सहमत नहीं हू जो यह कहते है कि हिन्दू नवजवान धर्म में श्रद्धा नहीं रखता हिन्दू कोई जड़वादी नहीं है, यह धर्म तो नित्य -नूतन शोधपरक धर्म है जो अपने को हर परिस्थितियों में ढाल लेता है, हमारा नवजवान लाखो की संख्या में कांवर लेकर शंकर जी को जल चढाने अनेक मंदिरों में जाता है सावन के महीने में तो लगता है की भगवा कपडा कम पड़ जायेगा जैसे यह भारतीय वेश ही हो गया हो, वह अमरनाथ यात्रा जैसे कठिन से कठिन यात्रा करता है आज दुर्गा पूजा और विजयदशमी में भी नव-जवान ही आगे है, प्रकार कुछ भी हो सकता है लेकिन यही नव-जवान ही हमारा धर्म और धरती भी बचायेगा ।
          सभी हिन्दू भारत वासियों को विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाये--------।।       

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