वामपंथी बिकृति का शिकार---!
जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है उसका पतन होना स्वाभाविक ही है और प.बंगाल के साथ यही हुआ ! बामपंथियों ने सारे देश के इतिहास को बर्बाद करने का तो काम किया ही लेकिन प.बंगाल में लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण कुछ अधिक ही बिकृति आयी, प. बंगाल में क्षात्रों को यह बताने का काम किया गया कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने कोई नुकसान नहीं किया वे तो बड़े प्रगतिशील थे, किसी बख्तियार खिलजी, काला पहाड़, मुहम्मद बिनकासिम, महमूद गजनवी और औरंगजेब इत्यादि ने हिन्दुओ के साथ क्या किया कुछ इतिहास नहीं बोलता न ही इस्लाम के बारे में कुछ बताया गया कि इस्लाम प्रेम मुहब्बत का धर्म है हिन्दू धर्म तकिया नूसी, साम्प्रदायिक ऊँच-नीच, भेद-भाव तथा फिरका-परस्ती वाला धर्म है।शिक्षा का वामपंथी करण ----!
1989 में प.बंगाल मध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एक अनुदेश जारी किया था कि "मुस्लिम शासकों द्वारा किए गए अत्याचार या मुस्लिम शासन की कोइ आलोचना नहीं की जानी चाहिए, मुस्लिम शासकों द्वारा मंदिरों के गिराये जाने का उल्लेख नहीं किया जाने चाहिए।" पश्चिम बंगाल से सम्बंधित अध्यापकों ने कृपा पूर्वक नौवीं कक्षा के पाठ्य पुस्तकों से संबधित परिपत्र (अपकी अदालत आपका फैसला) मनोज़ रघुवंशी को भेजा था जो 28 अप्रैल 1989 का था, प.बंगाल सरकार के सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों के मुख्य अध्यापकों को निर्गत कराया, मध्य काल के इतिहास को इस्लामिक इतिहास जो बड़े सहिष्णु, उदार भारत भाग्यविधाता जैसा लिखा बच्चों को नितांत झूठा इतिहास पढ़ने के लिए बाध्य किया गया, "एक तरफ कुरान और हदीस पर आधारित रूढ़िवादी सोच अंश को निकाल दिया," मुस्लिम सुलतानो द्वारा हत्याओं, "जोर जबर्दस्ती बलात धर्मपरिवर्तन" कराने का सभी निकाल दिया गया, प.बंगाल के अध्यापकों ने कक्षा 5 के पुस्तकों में रुश, चीन, वियतनाम और क्यूबा की प्रशंसा और यूरोपीय देशों की आलोचना, रुश में क्रांति के बाद शोषण मुक्त समाज की स्थापना हुई, "केवल इस्लाम और इसाई धर्म ही ऐसे धर्म हैं जो मनुष्य के साथ सम्मान और बराबरी से पेश आये", इस प्रकार यह शिर्फ लीपा-पोती ही नहीं तो कोरा झूठ भी है।बंगाल के समाज जीवन को बर्बाद करने के लिए 'सभ्यता के इतिहास में राजा राममोहन राय, केशवचंद सेन का उल्लेख मिलता है जिसने भारत के ईसाई करण का रास्ता साफ किया वहीँ राष्ट्रवादी स्वतन्त्रता सेनानी बंकिम चंद का कोई उल्लेख नहीं, जहाँ भारतीय स्वाभिमान के प्रतीक स्वामी विवेकानंद को केवल एक पंक्ति वहीँ कार्लमार्क्स को पूरी 42 पंक्तियां दी गई हैं, जितनी भी समाज में बुराई है सभी का कारण केवल हिन्दू धर्म है, इस्लाम और ईसाई हर जगह प्रगतिशील व उद्धारक के रूप मे लिखा गया है !

3 टिप्पणियाँ
Right sir
जवाब देंहटाएंवामपंथ ने पुरे देश को ही अंधेरे मे झोकने का निरंतर प्रयास किया है।
जवाब देंहटाएंइस का कारण यह भो है की हमारेही लोगो ने हमारा सपोर्ट नही किया.राजनीती hawi होती ज्या रही है हमारे इरादो पर ,काई मिट गये पर उन्हे मिटने मे भी हमारेही लोगो का हात है .
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