गुजरात नगर निगम क़े चुनाव, नरेन्द्र मोदी और सेकुलर मिडिया

        आए दिन भारतीय सेकुलर मिडिया गुजरात और नरेन्द्र मोदी क़े नाम पर हाय तोबा मचाती रहती है जैसे उसने देश क़े मुसलमानों क़ा ठेका ले रक्खा हो उसने जितना  मुसलमानों क़ा फायदा नहीं किया उससे अधिक मुसलमानों क़ा नुकसान किया आज पूरे भारत में सोहराबुद्दीन जैसे आतंकबादी को भारतीय मुसलमानों क़ा प्रतिनिधि जैसा ही मिडिया ने प्रस्तुत किया है उससे मुसलमानों की ही छबि ख़राब हुई है भारत क़ा सबसे उन्नत प्रदेश गुजरात को देखते ही लोगो को गोधरा क़े बाद क़े दंगे की याद मिडिया व कांग्रेस दिलाती है वह यह नहीं जानती की इस प्रकार सोर मचाने से हिन्दुओ को कारसेवको की गोधरा में ५९ की संख्या जिन्दा जलाने की भी घटना  याद आती है गुजरात में सुशासन है तो क्या मुसलमान इसको पसंद नहीं करता क्या उसे बिकाश अच्छा नहीं लगता ? ,ऐसा लगता है की जानबूझ कर नरेन्द्र मोदी को वोट क़े लिए आलोचना क़ा शिकार होना पड़ता है यह तब है जब मोदी अपने आलोचनाओ क़ा जबाब सुशासन और बिकाश क़े द्वारा देते आ रहे है लगता है मोदी क़े बहाने सोनिया ,राहुल गुजरात को बदनाम करना चाहते है संघ पर सिम्मी जैसा आरोप लगाकर अपने दियालिया पन क़ा परिचय दिया है कांग्रेस क़ा हाल खिसियानी बिल्ली जैसा हो गया है ,कही ऐसा न हो जाये सारा गुजरात में कोई सोनिया क़े प्रति फिलिंग हो जाये वैसे भी सभी जानते है की सोनिया चर्च क़े इशारे पर भारत को बदनाम करना चाहती है कांग्रेस में तो चर्च क़ा गिरोह ही हावी है उसका काम केवल भारत क़ा ईशाई कारण और जहा संख्या बढ जाति है वहा अलगाव की माग करना इस नाते भारत भक्तो को सावधान रहना होगा .
          गुजरात की उल्लेखनीय प्रगति अब ऐसा तथ्य है जिसकी पुष्टि बार-बार हो रही है मोदी क़े नेतृत्व में प्रदेश चमत्कारिक बिकाश कर रहा है लेकिन मिडिया को यह चमत्कारिक बिकाश दिखाई नहीं देता मिडिया दुराग्रह से ग्रस्त है उन्हें यह दिखाई नहीं देता की गुजरात की जानता क़ा समर्थन मोदी क़े साथ बढ़ता जा रहा है मै निकाय चुनाव की तरफ आपका ध्यान दिलाता हू इसलिए उसमे एक तरफा जीत क़ा महत्व और भी बढ जाता है 
         नगर निगम ----------भा.ज.पा.----कां..
         अहमदाबाद ----------------१४८-----३८
         सूरत -----------------------०९८-----१४
         राजकोट --------------------०५८-----११
         वरोदरा ----------------------०६१------११
         जामनगर -------------------०३५----१६
         भावनगर -------------------०४१------१०
         इस एकतरफा जीत क़े अनेक कारण हो सकते है लेकिन यह तय है की कांग्रेश द्वारा सोहराबुद्दीन मुठभेड़ क़े जरिये मोदी को अनावश्यक रूप से घेरना कांग्रेश पर भारी पड़ा सोनिया गिरोह ने सोहराबुद्दीन मामले में सीधे मोदी को जिम्मेदार ठहराने की कोसिस की उन्हें खलनायक बनाने क़ा प्रयत्न किया जैसे सोहराबुद्दीन ही पूरे भारतीय मुसलमानों क़ा प्रतिनिधित्वा कर रहा हो, आखिर सोहराबुद्दीन को कौन नहीं जानता की वह दाउद से जुडा एक बड़ा आतंकबादी था इसके बहाने आतंक बादियो को सोनिया सुरक्षा प्रदान करना चाहती है, कश्मीर में इसी प्रकार देश द्रोह को बढ़ावा दिया जा रहा है, एक तरफ ऊमर अब्दुल्ला भारत बिरोध की बात भारतीय कुत्तो वापस जाओ क़ा नारा लगा रहे है दूसरी तरफ राहुल गाधी गलबहिया कर ऊमर क़ा समर्थन कर रहे है जिनपर देश द्रोह पर मुकदमा चलना चाहिए वे राष्ट्रीय नेता बने हुए है ये भारत में ही हो सकता है अमेरिका,चर्च द्वारा प्रायोजित नेता--- आज कठिन समय में भारत को नयी आज़ादी की लडाई क़े तरफ जाने की जरुरत है.  
          मोदी हिंदुत्व क़े ही नहीं भारत क़ा भी चेहरा है हिंदुत्व और भारत अलग नहीं किया जा सकता, क्या भारतीय सेकुलर मिडिया को साप सूघ गया है यदि भा.ज.पा. हारती तो क्या मिडिया चुप रहती ?----- देश भक्ति हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है इसे कोई छीन नहीं सकता .   

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