विजय दशमी-- भारत क़ा सौर्य दिवस हार्दिक बधाइ----!


रविवार, 17 अक्तूबर 2010

हिन्दू समाज के शौर्य का पर्व--!
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आज भगवान श्री राम को लंका पति रावण पर विजय क़े लगभग १६ लाख वर्ष हो गए, नवरात्रि पर दुर्गा ने महीसासुर क़ा बध कर मानव कल्याण किया था पूरे भारत में बिभिन्न प्रकार से यह विजय पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है ----सर्व प्रथम सभी भारत बासियो को इस अवसर पर हार्दिक बधाई देना चाहता हू .समय-समय पर भारत ने अपना सौर्य प्रदर्शन किया है महाभारत युद्ध में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता क़ा उपदेश देते हुए कहा कि मै शास्त्र धारियों में राम हू इससे हम राम क़े महत्व को समझ सकते है, महाभारत क़े युद्ध में भगवान कृष्ण ने बिना हथियार उठाये ही अपना सौर्य प्रदर्शन किया और अधर्म पर धर्म कि विजय हुई,  २८०० वर्ष पहले चन्द्रगुप्त मौर्य और आचार्य चाणक्य ने सिकंदर और सैल्युकश को पराजित कर भारतीय सौर्य क़ा प्रदर्शन किया इस अर्याबर्त को राजनैतिक इकाई आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने द्वादस ज्योतिर्लिंग चारो धाम, बावन शक्ति पीठ पुनर्स्थापित कर भारतीय राष्ट्र को शास्कृतिक राष्ट्राबाद क़ा दर्शन देकर दिग्विजय किया इतना ही नहीं मुग़ल काल में अकबर क़े समय रामानंद स्वामी ने सभी जातियों में बड़े-बड़े संत खड़े कर दिए जैसे संत रविदास, कबीरदास, पीपा, दाऊ, खम्हन दास, तुलसीदास जैसे संतो को खड़ा कर धर्मान्तरण को रोक लगाया तुलसीदास ने लोक भाषा में रामचरित्र मानस लिखकर रामलीला शुरू कर पूरे भारत में क्रांति पैदा कर दी, तुलसीदास को अकबर ने मंसबदारी क़ा लालच दी इसपर तुलसी  दास ने उत्तर दिया .---
         हम चाकर रघुवीर क़े पट्टों लिखो दरबार,
         अब तुलसी क़ा होइहैं नर क़े मनसबदार।
ऐसी चौपाई लिख कबिता क़े माध्यम से जबाब दिया और मनसबदारी को ठुकरा दी, भारतीय जानता पर संतो क़ा ही वास्तविक शासन रहा, आजाद भारत में १९६५ हो या १९७२ अथवा कारगिल युद्ध सभी में भारतीय सौर्य प्रदर्शन किया जिसे सारा विश्व जानता है ।

भगवान श्रीरामजी के प्रति श्रद्धा द्वारा जागरण-!
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आज में झारखण्ड क़े वनवासी क्षेत्र लोहरदगा  से सिमडेगा होते हुए राची तक लगभग ३५० कि.मी. की यात्रा किया रास्ते भर देखा सैकड़ो स्थानों पर हिन्दू समाज के लोग राम- रावण को मारने की तयारी में थे, रावण जलाया जाने वाला था हजारो की संख्या सडको पर थी,वास्तव में राम ने उत्तर से दक्षिण यात्रा में सभी वन बासियो को साथ लाकर समरस समाज क़ा निर्माण किया था वह आज भी वनबसियो में दिखाई दे रहा था कि भगवान राम क़े प्रति कितनी श्रद्धा है, ये केवल हिन्दू क़ा नहीं बल्कि भारत वर्ष क़ा सौर्य, विजय दिवस है आइये हम सभी बिना किसी भेद -भाव क़े इस पर्व को सौर्य दिवस के रूप में मनाये ये भारत क़ा राष्ट्रीय पर्व है इस नाते इस प्रबल को राष्ट्रीय महत्व मिलना ही चाहिए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क़े संस्थापक पूज्य डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार ने इसी विजय दिवस क़े दिन १९२५ नागपुर में संघ की स्थापना की थी इस कारण इस दिन का भारतीय राष्ट्रबादियो क़े लिए और भी महत्व हो जाता है', संघ इस दिन शस्त्र पूजन कर सौर्य दिवस को याद करता है ।
          इस अवसर पर सभी को विजय दशमी की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाये ।।
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