धर्म विशेष

मावोबादियों से वार्ता देश हित में नहीं----------!

       आखिर केंद्र की कांग्रेस सरकार चाहती क्या है ? जो हमारे देश के संबिधान को ही नहीं मानते, जिन्हें लोकतंत्र में विस्वास ही नहीं, जो मानवता को तार-तार करने को उतारू हैं, जो हमारे मूल्यों -मान्यताओ को मानने को तैयार नहीं फिर उनसे वार्ता क्यों--? ये मावोबादी सुधरने वाले जीव नहीं, आखिर हजारों करोड़ की लेवी जंगलों में बना आसियाना जहाँ सूरा-सुंदरी की ब्यवस्था, बिना कम्पटीशन के ही नौकरी, बिना ट्रेनिंग के कमांडर और सैनिक, पैररल सरकार चलाना, जनता को लगातार मुर्ख बनाते रहना, विकाश कार्य अवरुद्ध करते रहना, बिना काम किये धन उगाही, इतनी सुबिधा कहाँ मिलेगी--? तथा-कथित प्रगतिशील पत्रकार, स्वामी अग्निवेश, अरुंधती राय जैसे (देशद्रोही) समाज सेवी द्वारा इनकी वकालत, फिर ये क्यों नियम-कानून मानेगे ? आरएसएस के सरसंघचालक मा.मोहन भागवत ने आज कहा है की मावोबादियों से कोई वार्ता नहीं करनी चाहिए यह बहुत ही उपयुक्त और समयानुकूल है सरकार को उनकी बात पर अमल करनी चाहिए.
       अभी-अभी २५ मई को छतीसगढ़ में कांग्रेस के जुलुस पर हमला हुआ जिसमे २७ लोग मारे गए यह शोध का विषय है की अंत समय में आधे घंटे पहले अजीत जोगी अपने पुत्र सहित हेलीकाप्टर से क्यों चले गए ? जब हजारों मावोबादियों ने जब सबको घेर लिया तो एक स्वर से आवाज आई की यही हैं 'कर्मा' आखिर कर्मा कौन हैं ये वह ब्यक्ति हैं जो जड़वा-सलम के अगुवा थे वहां के वनबासियों को मावोबादियों से निजात दिलाते थे, उनके आगे मावोबादी कहीं टिकते नहीं थे, कहीं कोई योजना तो नहीं थी की कर्मा को रास्ते से हटाया जाय क्यों की कांग्रेस उनको लेकर असहज थी वे मावोबादी बिरोधी और कांग्रेस मावोबादी पक्षधर तभी तो सभी एक स्वर से यही है कर्मा कहा--! सोनिया को चाहिए ईसाई नेता, कर्मा का कद बढ़ रहा था वह सोनिया को बर्दास्त नहीं आखिर अजीत जोगी ईसाई नेता हैं जो सोनिया के प्रिय हैं और अंत में वही हुआ .
          आखिर मावोबादियों की दवाई क्या है इनसे कैसे निपटा जाय ? कहते हैं की गाव में जब कुत्ता पागल हो जाता है तो उसे गोली मारनी पड़ती है, इन मावोबदियो को हराम खोरी की आदत पड़ गयी है कोई भी लोफर -लफंगा कमांडर बन जाता है कोई भी गवार हाई स्कूल पास-फेल जज बन जाता है इनको मन-माना बेतन दिया जाता है उन्ही को आम जनता से जबरदस्ती चन्दा वसूलना, अत्याधुनिक हथियारों से लैस, सूरा-सुंदरी की ब्यवस्था, बिना काम किये इतनी सुन्दर ब्यवस्था कहाँ मिलेगी-? वनवासी इनसे उब चुके हैं वे एक टमाटर के पौधे पर १०रु. टेक्स देकर थक चुए है इनके भय से वे रातभर सो नहीं पाते, इस कारन ये वार्ता से मानने वाले नहीं, वार्ता का बहाना कर शक्ति संचय करना ही इनका काम है, क्या जहाँ मार्क्स-बादियों का शासन है वहां शांति है, सुख है-? नहीं-! रसिया भुखमरी के कारन टूट गया, चीन टूटने वाला है माओ की समाधी से चीन वासियों को घृणा हो गयी है लेनिन, स्टालिन की कबर खोदने को उतारू हैं रूशी, करोणों की लॉस पर बना साम्राज्य टूट कर तहस-नहस हो गया चीन भुखमरी का शिकार है, पुरे विश्व में ये समाप्त हो रहे है बगल में नेपाल को ही ले जनता को तबाह किया जनता को कुछ नहीं मिला लेकिन मावोबादी के सभी नेता करोण-पती हो गए सबको काठमांडू में बड़े-बड़े मकान हो गए देश का विकाश तो नहीं हुआ, लेकिन मावोबादियो का विकाश हो गया, इनका कोई बैचारिक मिशन नहीं है, ये मावोबादी नहीं आतंकबादी हैं इनके साथ आतंकबादियों जैसे ही ब्यवहार होना चाहिए, इसलिऐ इनकी दवा या तो जेल में या तो इन्हें समाप्त कर दिया जाय, बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय ने मुठभेड़ दिखाकर कोई एक हज़ार नक्सल बादियों को मारा था वहां लम्बे समय तक शांति थी, पुरे देश इनके साथ यही करना पड़ेगा, इन्हें किसी आयोग का सदस्य बना पुरस्कृत करना देश हित में नहीं वास्तव में कांग्रेस के बस का रोग भी नहीं ये कोई इक्षा शक्ति रखने नेतृत्व देने वाला ही कर सकता है जो किसी का न सुने केवल देश हित में काम करे--!
           

2 टिप्‍पणियां

दीर्घतमा ने कहा…

आज अख़बारों में समाचार है की पूर्व लोकसभा के अध्यक्ष संगम माओबादियों और केंद्र सरकार बीच मध्यस्थता करने को तैयार हैं, लगता है माओबादी उनकी स्वच्छ का उपयोग करना चाहते हैं, इनसे वार्ता करना देश हित में नहीं ये शांति वार्ता से सुलझने वाला मामला नहीं, लात के देवता बात से नहीं सुनते-----!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बहुत कठिन है ये सब। क्योंकि करने वाले कितने ईमानदार हैं ये भी एक मुद्दा है।