धर्म विशेष

आया श्रावण दिखा राष्ट्रभक्ति का ज्वार --पूरा देश भगवामय ------!

     
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम्‌ ॥1॥  

परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्‌। 
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥ 
वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे, 
हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥3॥ 
       आने वाला सोमवार 22 जुलाई अषाढ़ पुर्णिमा है एक तो सोमवार वैसे ही शिव उपासना के लिए महत्वपूर्ण रहता है इस वर्ष सौभाग्य से उसी दिन पुर्णिमा भी है शिव ही प्रथम गुरु भी हैं (सोने मे सुहागा) दुसरे दिन से श्रावण महिना शुरू हो रहा है मै द्वादश ज्योतिर्लिंग के पुजा महत्व के तरफ नहीं जाना चाहता मै तो शंकरचार्य द्वारा रोपित-पल्लवति और पुष्पित राष्ट्र भक्ति की तरफ आपको ले जाना चाहता हूँ, यह पुजा पद्धति उनके अन्तर्मन मे बहने वाली हिन्दू राष्ट्रीयता का प्रकटी-करण ही है शिव ही शंकर, शंकर ही महादेव और उन्ही का पर्यायवाची यानी भारत वर्ष, शिव ही भारत, शंकर ही भारत और महादेव ही भारत हैं .
        श्रावण का महिना भारत वर्ष के लिए बहुत ही महत्व का है शिवलिंगों की पूजा मे पूरा भारत रत हो जाता है प्रत्येक हिन्दू जलाभिषेक कहीं न कहीं करता ही है चाहे अपने घरपर ही क्यों न हो--! यह केवल जल चढाने मात्र ही नहीं हमारे राष्ट्रियता का प्रतीक भी है आदि जगद्गुरू शंकरचार्य ने द्वादश ज्योतिलिंग की पुनर-स्थापना कर भारत के हिन्दू समाज की एकता को ही पुष्टि ही नहीं किया बल्कि हिन्दू राष्ट्र की एकात्मता को स्थापित करने का प्रयत्न किया उसका जीता-जागता भारत, भगवा रंग मे रंगा हुआ भारत, उत्तर से दक्षिण पूरब से पश्चिम जहां देखो वहीं भगवा ही भगवा दिखाई देता है बहुत सारे राजमार्ग के रास्तों को भी बदल दिया जाता है हरिद्वार-दिल्ली राजमार्ग हमेसा श्रावण में रात भर बंद रहता है लाखों की संख्या कवरियों की रहती है, झारखंड के देवघर की बात ही मत पुछो नेपल सहित आधा भारत ही उमड़ पड़ता है कहते है की लगभग एक करोण श्रद्धालु शिवलिंग पर जल चढ़ने आते है सुल्तानगंज (बिहार) से जल उठाना जो 80 किमी पैदल चलकर जाना अपने-आप मे अद्भुत है पुरा रास्ता देखते ही बनता है जिन्होंने देखा नहीं है उन्हें मेरी सलाह है कि उसे इस राष्ट्रीयता के प्रवाह को देखना चाहिए कि यह कैसी श्रधा-भक्ति है--! जहाँ देश उमड़ रहा है, आज अखबारों मे खबर छपी है की भगवा कपड़ा महगा हो गया है क्यों की उसकी मांग बढ़ गयी है बहुत सारे लोगों का ब्यापार इस समय दिन-दूना रात-चौगुना बढ़ जाता है, ये वास्तव मे ये हिन्दू राष्ट्रियता का प्रवाह है जिसे रोका नहीं जा सकता, हमारे पूर्वजों ने कुछ इस प्रकार हमारे राष्ट्र-धर्म की रचना की है जो समय-समय पर किसी न किसी रूप मे हमे जागरूक करता रहता है और हमारी राष्ट्रीयता मजबूत होती जाती है।
          वास्तव में यही है भारत -भक्ति यही है राष्ट्र- भक्ति----!


 

    

3 टिप्‍पणियां

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

सही कहा !!

Sriram Roy ने कहा…

सुन्दर ही नही अति सुन्दर ...
www.sriramroy.blogspot.in

दीर्घतमा ने कहा…

वास्तव मे यही है राष्ट्र-भक्ति, धर्म ही भारत का प्राण है धर्म जागेगा राष्ट्र अपने-आप जग जाएगा।