६-दिसंबर (अयोध्या)----शांति पर्व अथवा राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति ---!

  छः दिसंबर शांति पर्व--!

 हे ६ दिसंबर तुम भारत के जागृत होने के सबूत हो, तुम सेकुलर देशद्रोहियों के उत्तर हो, बिना तुम्हारे हम अधूरे थे, आज सम्पूर्ण हिन्दू समाज का मस्तक ऊँचा हुआ, भारत के सुप्त राष्ट्रवाद को जगाकर विश्व में हिन्दू समाज के मर्यादा की रक्षा की, भारत में शांति का मार्ग प्रसस्त किया, जिन्हें शर्म आ रही है जो सेकुलर है वे भारत के अस्मिता के साथ धोका कर रहे है, उन्हें यह नहीं पता कि एक ढाचा टूटने से उन लोगो ने कितने मंदिर तोड़े, उस पर कोई सेकुलरिष्ट क्यों नहीं बोलता-? यह तो उनकी आदत सी हो गयी है, आखिर कब हिन्दू उन्हें जबाब देगा--? उन्हें जो करना है वे तो करेगे ही --- ७१२ से ही हमारे मंदिरों को तोड़ रहे है हमारा अपमान कर रहे है, हिन्दू समाज ने तो केवल एक बार एक ढाचा को ढहाया जिसमे कभी नमाज नहीं पढ़ी गयी थी, जो हिन्दू समाज का अपमान था यह अपमान कब तक झेलते रहेगे --? क्या हिन्दुओ को हमेसा नीचा दिखाते रहने की ही परंपरा को धर्मनिरपेक्षता कहते है --? यदि सेकुलरिस्ट यही करते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब देश का एक और बिभाजन होगा जहाँ-जहाँ से धर्म गया वहां-वहां से हमारी भारत माता के अंग कटते गए, क्या किसी सेकुलरिस्ट को यह सच ध्यान में नहीं आता --?

सेकुलर नेताओ के कारनामे  

आइये हम आपको सेकुलर सरकारों की कथा बताते है अभी-अभी उ.प्र. सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने सिमी में गिरफ्तार किये गए अपराधियों को छोड़ने की पेसकस की, जिसे हाईकोर्ट ने आपत्ति जनक माना कि किस आधार पर अपराधियों को छोड़ा जा रहा है --? यदि ऐसा इस प्रकार आतंकबादियो को छोड़ते रहे तो इसका परिणाम क्या होगा हम समझ सकते है--? इतना ही नहीं ९० के दशक के पहले उ.प्र.दंगो के प्रदेश के नाते जाना जाता था अलीगढ, मुरादाबाद, मेरठ, रामपुर, टांडा, काशी, बरेली, अलाहाबाद बिहार में भागलपुर, सीतामढ़ी, पटना, राजगिरी, जमशेदपुर, मध्यप्रदेश में भोपाल, राजस्थान के तमाम शहर, दक्षिण में हैदराबाद और गुजरात कि तो हाल ही मत पूछो अधिकांश शहरो की दीवारें पुतवाई नहीं जाती थी क्योंकि दंगे होने ही है आग लगनी ही है और जब भी दंगे होते गुजरात मे कांग्रेस के सांसद रहे 'गुलबर्ग सोसायटी' के एहसान जाफरी जिसको लेकर बड़ा ही हंगामा खड़ा है मोदी को प्रतिदिन सेकुलरिष्ट गाली दे रहे है हर दंगे में वह सांसद हिन्दुओ को निशाना बनाता था गुजरात को भी दंगो का ही प्रदेश कहा जाता था। 

सामान्य मुसलमान स्वाभाव से जिहादी 

 लेकिन यह राष्ट्र-जागरण अथवा देश में शांति, सेकुलर नेताओ और पत्रकारों को पच नहीं रहा है कुलदीप नैयर जैसे प्रतिष्ठित पत्रकार लगता है की विदेशियों के हाथो विक चुके है ! उन्हें भारत की शांति, अल्पसंख्यक सुरक्षा के नाम पर राष्ट्रबाद को गाली देना अपना कर्तब्य, इण्डिया टुडे जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका ने भी अपना असली चेहरा दिखाया है उन्हें लगता है की जिस अनुपात में देश में हिन्दू देश में रहता है उसी अनुपात में मुसलमानों के साथ जेल में रहना चाहिए उन्हें यह समझ में नहीं आता की जेल में अपराधियों को बंद किया जाता है न की हिन्दू या मुसलमान को, सभी को पता है क़ि सामान्य मुसलमान स्वभाव से जेहादी होता है यदि वह जेहादी (काफिरों से युद्ध) नहीं है तो वह काफिर की श्रेणी में आता है क्यों क़ि उनका आदर्श रहीम, रसखान, एपीजे अब्दुल कलाम न होकर नादिरसाह, बख्तियार खिलजी, दाउद इब्राहीम ही है, जिन्हें इस्लाम धर्म नज़र आता है उन्हें यह समझ में नहीं आता की यह अपराधियों, ब्यभिचारियो का संगठित गिरोह के अतिरिक्त कुछ नहीं है, इसलिए चाहे कोई भी सरकार हो अपराधियो को जेल में बंद करना ही होगा, कुलदीप नैयर कहते है की गुजरात में मुसलमान असुरक्षित है इस नाते कैसे बीजेपी नरेन्द्र मोदी को प्र म. का उम्मीदवार तय करती है उन्हें यह जानकारी नहीं की मोदी भारत के स्वाभाविक नेता बन चुके है भारत उनकी प्रतीक्षा कर रहा है। 

पत्रकारों की सेकुलर  मानसिकता 

उनको पाकिस्तान के हिन्दुओ के साथ क्या हो रहा है ध्यान में नहीं आता--? क्या अब हिन्दू समाज को समाप्त कर देना चाहिए--? भारत हिन्दू राष्ट्र है इस नाते ही मुसलमान यहाँ सुरक्षित है नहीं तो आये दिन पाकिस्तान, ईरान, इराक जैसे देशों में तो सैकड़ो इस्लाम अनुयायियो को इस्लाम के नाम पर मारा जा रहा है, आज भारत में सर्वाधिक मुसलमान गुजरात में ही सुरक्षित है लेकिन यदि हिन्दू समाज कमजोर हुआ तो भारत तो कमजोर होगा ही और हिन्दू संकृति भी समाप्त हो जाएगी आज आवस्यकता है की सेकुलरो से देश को बचाया जाय कुलदीप नैयर १२ दिसंबर के दैनिक जागरण में लिख रहे है की जो गुजरात के अल्पसंख्यको की रक्षा नहीं कर सकता उसे भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर कैसे स्वीकार किया जा सकता है, क्या यह देश अल्पसंख्यको के लिए है ? क्या है कुलदीप नैयर या इस विचार धारा के लोग भारतीय समाज की अभिब्यक्ति हो सकते है-? नहीं ये केवल 'वागबिलाशी' हो सकते हैं, भारतीय संस्कृति की रक्षा का अर्थ है की हिंदुत्व की रक्षा, जिसे मुसलमानों की रक्षा की चिंता हो उन्हें १९४७ की तरफ देखना होगा की किस आधार पर देश का विभाजन हुआ, आज बर्बर इस्लाम ने हमले रूप बदल दिया है अब ये ताकते सेकुलर वेश धारण कर भारत के स्वरुप को समाप्त करना चाहते है, केवल हमलो का प्रकार बदला है इनका उद्देश्य नहीं बदला ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं इनके पीछे अरब देशो व चर्च का पैसा है आज इन्हें पहचानने की आवस्यकता है ।

 ६-दिसंबर शांति का पर्व है--!

 छः दिसंबर यानी भारत का जागरण जिससे देश द्रोहियों का मनोबल कमजोर हुआ है जब हम विचार करते है तो ध्यान में आता है कि आज दंगे बंद हो गए है, उत्तर प्रदेश, विहार और गुजरात सहित देश में शांति आई है लेकिन यह शांति इन धर्मनिर्पेक्ष बादियो को अच्छी नहीं लग रही है, वे शांति नहीं चाहते उ. प्र. में पुनः दंगे प्रारंभ हो गए है क्यों की धीरे-धीरे राष्ट्रबाद कुंद पड़ता जा रहा है, हैदराबाद में पुनः देशद्रोही सिर उठाने लगे है, लेकिन गुजरात में इन गिरोहों की एक नहीं चल रही है इस नाते क्या करना----? इसको लेकर सेकुलर राजनेता, पत्रकार और NGO बहुत परेसान है विदेशो में बैठे अपने आकाओ को क्या जबाब दे--? ऐसे में देश का नेतृत्व क्या करे-? एक तो तथा कथित सेकुलर पत्रकारों को जेल में डालना चाहिए जिससे ध्वनि प्रदूषित होने से बचाया जा सके सेकुलर नेताओ को भी जेल के भीतर होना चाहिए, यदि सरकार कुछ नहीं करती तो भारतीय जनता को खड़ा होकर इन देश द्रोही सेकुलर नेताओ को समाप्त करना होगा और भारतीय संस्कृति जो सुरक्षित रख सके ऐसी सरकार बनाने का प्रयास करना चाहिए, अब हमारे यहाँ कुछ दलों में नेताओ की कमी होने से कुछ विदेशी नेताओ अथवा विदेशी मानसिकता के नेताओ का प्रवेश हो गया है उन्हें क्या करना -? जिससे हम भारत, भारतीय संस्कृति को बचा सके हमें बिचार करना चाहिए -! कुछ लोग कहते है की हमारी प्रकृति ही सेकुलर है किन्तु ऐसा नहीं है, आदि शंकर के गुरु गौडपाद से जब कुमारिल भट्ट मिलते है और पूछते है की आचार्य ''एकं सद बिप्रा बहुधा बदंति '' तो इसका उत्तर देते हुए गौडपाद कहते है- पुत्र यह केवल भारतीय वांगमय के लिए है न की परक़ियो के लिए, जिनका विस्वास वेदों में है अथवा जो अपने पंथ की उत्पत्ति वेद से सिद्ध करते है उनके लिए यह सब है, इस नाते कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों और सेकुलर पत्रिकाओ से निवेदन है की मुस्लिम इलाको में अथवा पकिस्तान, बंगलादेश तथा अन्य इस्लामिक देशो में सकुलरवाद का पाठ पढाये और भारत को भारत बना रहने में सहायता करें, अयोध्या की घटना ने पूरे भारत को बचाया, भारत में दंगे बंद हो गए। 

मंदिर तोड़ने की मानसिकता 

 गुजरात आज सबसे शांति प्रिय प्रदेश है लेकिन कुछ सेकुलर ताकतें अरब देशो के धन द्वारा प्रायोजित धर्मनिरपेक्षता की आण में गुजरात की शांति भंग करना चाहते है वास्तव ये मुसलमानों के भी हितैसी नहीं है, इलेक्ट्रानिक मिडिया, प्रिंट मिडिया, सेकुलारिष्ट पत्रकार सभी विदेशी धन के बल पर हिंदुत्व को समाप्त करना चाहते है, लगता है इन्हें इस्लामिक मिशन की जानकारी नहीं है यदि जानकारी है तो आखिर भारत के साथ क्यों खिलवाड़ कर रहे हैं--? ''इस्लाम एक धर्म -प्रेरित मुहमम्दीय राजनैतिक आन्दोलन है, कुरान जिसका दर्शन, पैगम्बर मुहम्मद जिसका आदर्श, जिहाद जिसकी कार्य प्रणाली, मुसलमान जिसके सैनिक, मदरसे जिसके प्रशिक्षण केंद्र, गैर मुस्लिम राज्य जिसकी युद्ध भूमि और विश्व इस्लामी साम्राज्य जिसका अंतिम उद्देश्य और उसके लिए यह अंतहीन युद्ध है'', कुछ लोग यह कहते है की अयोध्या ने आतंकबाद को बढ़ावा दिया मै उनसे पूछना चाहता हूँ कि सातवी सताब्दी से भारत पर इस्लामिक हमले क्यों हुए ? सैकड़ो वर्षो से हमारी मूर्तियों मंदिरों को ताड़ना आखिर उन्हें किसने उकसाया, आइये सोमनाथ चलते है जब महमूद गजनवी सोमनाथ को तोड़ने लगा तो हमारे राजाओ, सेठो और महन्तों ने कहा की जितना धन लेना हो लेलो लेकिन भगवान की मूर्तियों को मत तोड़ो गजनवी ने उत्तर दिया की हमें धन नहीं चाहिए कुरान का आदेश है बुत को नष्ट करना और उसने भगवन की मूर्तियों को नष्ट कर डाला, क्या आठ सौ वर्षो में कोई परिवर्तन इस्लाम में आया--? नहीं--! अफगानिस्तान में तालिवानियो ने ज़ब भगवान बुद्ध की मूर्ति को तोड़ना शुरू किया तो जापान, थाईलैंड, भारत सहित विश्व के कई देशो ने यह अपील की कि जो भी धन चाहिए हम देगे लेकिन भगवान बुद्ध की मूर्ति को न तोड़े, हम कही उठा ले जायेगे, लेकिन क्या हुआ -? जो जबाब उस समय महमूद गजनवी ने दिया था ठीक वही जबाब ओसामा बिन लादेन यानी तालिबानियों ने दिया, अब कहेगे कि भारत में सूफी है जो उदार है शायद यह नहीं पता की सूफियो ने भारत में सर्बाधिक इस्लामीकरण किया है जगह-जगह उन्होंने प्रत्यक्ष युद्ध भी किया है. अगर भारत में शांति स्थापित करना है धर्मनिरपेक्ष रखना है तो हिन्दुओ को ताकतवर होना पड़ेगा। 
      काश----! भारतीय सेकुलारिष्ट इस्लाम, कुरान और चर्च को समझ पाते जिसका परिणाम कश्मीर और नार्थ ईष्ट में हम भुगत रहे है. 
सूबेदार जी  
पटना                 

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9 टिप्पणियाँ

  1. हिन्दुओं की आंखें कभी नहीं खुलने वाली.

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  2. खुदा की राह पर चलने वाले कभी मरते नही न उनके मन में कोई गलत धारणा पनपती है। हमें सर्व धर्म समभाव के आधार पर एक सुद एवं शांतिपूर्ण समाज की स्थापना हेतु प्रयासरत रहना चाहिए। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

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  3. prem ji aapka vichar ek acchhe manushya ka vichar hai kyo ki aapke andar baithi aatma hindutw ki hai aur yahi hamari kamjori hai.
    bahut-bahut dhanyabad

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  4. उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...गंभीर समस्या पर सटीक आलेख...बहुत बहुत बधाई...

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  5. श्री मान सूवेदार जी सादर प्रणाम
    वास्तव में वास्तविकता से पाठको को रुवरु कराने बाला लेख है आपका लैकिन सच बात तो यह है कि आज भी हम हिन्दुत्व बादी लेखक एक जुट होकर हिन्दुओं व हिन्दु संस्कृति तथा भारत विरोध का मुकावला नही कर रहैं हैं इसमें सबसे बड़ा कारण तो यह है कि हम हिन्दुत्व बादियों का एक मंच नही बन पा रहा है सो मैने एक मंच हिन्दु्त्ववादी ब्लागों को देने के उद्देश्य से एक हिंदुत्ववादी ब्लाग एग्रीगेटर बनाने का प्रयास अपने ब्लाग व राष्ट्रवादी ब्लाग राष्ट्रधर्म को वनाने का प्रयास किया है आपका व आपके पाठकों का सहयोग मिला तो जल्द ही हिन्दुत्ववादियों का एक अच्छा मंच बनाने का प्रयास आगे बढ़ाया जा सकता है कृपया आप भी इससे जुड़े तथा अपने साथियों व अन्य जानकारों को भी प्रेरित करें आपका व्लाग अभी जोड़े दे रहा हूँ तथा आपके व्लाग का सदस्य़ बन रहा हूँ अभी आप भी मेंरे ब्लागों के सदस्य बने तथा फेसबुक व्लाग फोलोअर भी बनें।अब आपका उम्दा ब्लाग मेरे ब्लाग एग्रीगेटर का अंग होगा।

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  6. dhanyabad gyanesh ji aaj awasyakata hai ki hindu badi takate ek jut ho nahi to bad me hame pachhatana padega.
    dhanyabad.

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  7. एकता का आधार होता है स्वार्थ अथवा निश्छल समर्पण परन्तु वेद रचित कर्म आधारित वर्ण ब्यवस्था को अवसरवाद द्वारा जातिवादी बना दिए जाने से सम्पूर्ण ढांचा बिखर कर जातिवादी लोथड़ों में बंट चुका जिसे जोड़ पाना लगभग असम्भव हो चुका और इसी बिखराव ने हमें संकुचित जातिवादी सोच की संकीर्ण सोच में समेट कायर बना डाला तथा कायरता कभी कवच नहीं बन सकती क्यों कि इतिहास गवाह है कि संख्या कम होने के बावजूद आक्रांता ही सफल रहे एवं कायरता सिमटती चली गयी।
    सर्व धर्म समभाव से ज्यादा आवशयक है सर्व जाति समभाव वरना सर्वनाश निश्चित है।

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  8. आपकी बात तो ठीक है हिन्दू धर्म मे विकास, परिवर्तन, शास्त्रार्थ सब सम्भव है सनातन युगनुकूल परिवर्तन स्वीकार करता है , समय-समय पर महापुरूषों ने हर असम्भव को सम्भव कर दिखाया है, हम समरसता के साक्षी होगे वेदानुकूल समाज होगा क्योंकि हम कार्य कर रहे हैं और अपने कार्य के प्रति हमें पूरा विश्वास है।

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