नववर्ष वि.स. 2067 मंगलमय हो,


सोमवार, 15 मार्च 2010

        आज के दिन को हम श्रृष्टि के प्रथम दिन यानि श्रृष्टि सम्बत के नाते जानते है आज के दिन ब्रम्हांड की रचना हुई, ब्रम्हा पुराण में बर्णित है की ब्रह्मा जी ने चैत्र मास के प्रथम दिन प्रथम सूर्योदय पर श्रृष्टि की रचना की।
    भारत के  सरकारी कलंदर भले ही ग्रेगेरियन हो लेकिन राष्ट्रीय आज भी बिक्रम सम्बत ही है ,सम्राट विक्रमादित्य द्वारा बर्बर शको पर विजय की ख़ुशी में बिक्रम सम्बत शुरू किया ,उस समय बिक्रमादित्य क़ा शासन इरान- इराक तक फैला हुआ था। आज पूरे भारत में तीज त्यौहार या कोई शुभ कार्य ईसी पंचांग से किया जाता है।
      देश आज़ादी के पश्चात् १९५२मे वैज्ञानिक व औद्दोगिक परिषद् ने पंचांग सुधारसमिति की स्थापना की ,समिति ने १९५५ में अपनी रिपोर्ट दी जिसमे बिक्रम सम्बत को राष्ट्रीय सम्बत घोषित किया, पंडित नेहरू ने ग्रेगेरियन कलंदर को ही सरकारी कामकाज हेतु उपयुक्त मानकर १९५७-२२मार्च को राष्ट्रीय कलंदर के रूप में स्वीकार किया।
           विज्ञानिक दृष्टिकोण
१-आज के ही दिन बसंत शुरू होता है. पेड़ पौधों में फूल आते है चारो तरफ फूलो की सुगंध आती है।
२-फसल पकना प्रारंभ होती है ,ख़ुशी के नाते नव-वर्ष के स्वागत में नवरात्री क़ा बारात व पूजा होती है।      ऐतिहासिक महत्व
-ब्रम्हांड की रचना एक अरब 97 करोर, ३९ लाख, ४९ हज़ार, 109 वर्ष, यही श्रृष्टि सम्बत है .
-भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त कर आज के उनका राज्याभिषेक हुआ .
-वर्ष प्रतिपदा के दिन गुरु अंगद देव क़ा जन्म हुआ था .
-आज के दिन संत झुलेलाल क़ा प्राकट्य हुआ था .
-कलियुगाब्द 5112 वर्ष पूरब वर्ष प्रतिपदा के दिन प्रारंभ .
-सम्राट बिक्रमादित्य ने शको पर विजय प्राप्त कर बिक्रम सम्बत की स्थापना की .2067
-नवरात्री क़ा प्रथम दिन
-युधिष्ठिर क़ा राज्याभिषेक॥
-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संस्थापक डाक्टर केशव बलिराम हेडगेवार क़ा जन्म दिन॥
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