धर्म विशेष

संत तुलसीदास जी --मुग़ल काल में धर्म बचाने की चुनौती को स्वीकार किया .--- ६ अगस्त उनके जन्म दिन पर विशेष.

         यह भारत माता रत्न गर्भा है समय- समय पर ऐसे सपूतो को जन्म देती है कि वे अपनी भारत माता अपने धर्म को बचाते ही नहीं सम्पूर्ण राक्षसी ताकतों को चुनौती भी देते है, उन्ही में से एक तुलसीदास जी भी थे जब सारा भारत त्राहि-त्राहि कर रहा था जजिया कर लगाये जा रहे थे, दीने -ईलाही के नाम पर हिन्दुओ को मुसलमान, बिधर्मी बनाने की मुहीम मुग़ल सत्ता चला रही थी अकबर जिसे विदेसियो ने महान कहा वह मीना बाज़ार लगवा कर हिन्दुओ की बहन -बेटियों को अपने हरम में लाने का प्रयास करता था क्या वह किसी मुग़ल लड़की की शादी किसी राजपूत के साथ करता था ?आखिर वह क्यों महान था ? राजपूत- राजकुमारों को जब वह कोड़ो से मारता था तो जोधा बायीं को अन्दर ही अन्दर बड़ा कष्ट होता था अकबर कहता कि जोधा देखो अब तुम्हारा हिन्दुओ राजाओ से कोई सम्बन्ध नहीं क्यों कि अब तुम बाबर की खान-दान की हो गयी हो तुम्हारा पिछला कुछ भी नहीं, हम सभी जानते है की जोधा ने जिसको जन्म दिया उसने गुरु अर्जुन देव तप्त तवे पर बलिदान किया था हजारो मंदिरों को ढहाया .
                 संत तुलसीदास उस समय उत्तर प्रदेश बांदा जिले के राजापुर गाव एक ब्राहमण परिवार में पैदा हुए  वे महान क्रन्तिकारी थे अकबर सभी हिन्दू राजाओ को समाप्त कर एक क्षत्र इस्लाम कि सत्ता चाहता था लेकिन राजस्थान राजपुताना ने राणाप्रताप के रूप में अकबर की एक न चलने दी महाराणा प्रताप हिन्दुओ के श्रद्धा के रूप उभरे  वे सारे भारतीयों के ह्रदय पर राज करते थे, उस कठिन काल में तुलसीदास ने राम चरित्र लिखकर राणाप्रताप को प्रोत्साहित ही नहीं किया  बल्कि उन्होंने राणाप्रताप को राम के स्वरुप में खड़ा कर दिया उत्तर प्रदेश में राम लीला शुरू कर जहा हिन्दू समाज में जागृत पैदा किया वही जगह संतो कि टोली खड़ी होनी शुरू हो गयी .
               तुलसीदास के कृत्यों से अकबर असहज होकर उनको सन्देश भेजा और कहा मै तुमको मनसबदारी दुगा लेकिन यह सब बंद कर दो, तुलसीदास ने एक चौपाई लिखकर अकबर को जबाब दिया.
      हम चाकर रघुबीर के, पट्टो लिखो दरबार ,
      अब तुलसी का होइ है, नर के मंसबदार.
           इस प्रकार तुलसीदास जी ने अकबर को जबाब भेजा और उस समय जिन हिन्दुओ को मुसलमान बनाया गया था उनको पुनः धर्म में लाने का प्रयास किया सारे हिन्दू समाज में नयी चेतना व स्वाभिमान भर दिया मुसलमानों के लिए उन्होंने मलेक्ष शब्द प्रयोग किया, ज्ञातब्य हो कि अकबर के जितने दरबारी थे चाहे बीरबल हो या राजा टोडरमल सभी मुसलमान हो गए थे केवल मानसिंह को छोड़कर.  उन्होंने भगवान श्री राम का चरित्र लोक भाषा में लिख सम्पूर्ण हिन्दू समाज पर महान उपकार किया देश -धर्म को बचाने का एक अनुपम उदाहरण खड़ा किया जिसे भारतीय समाज कभी भी भुला नहीं सकता, आज प्रत्येक हिन्दू के घर में रामचरित्र मानस नाम का ग्रन्थ अवस्य पाया जाता है जिसने हिन्दू धर्म को सुरक्षित रखा.  

3 टिप्‍पणियां

bhartiya naagrik ने कहा…

bade hi mahaan the tulsidaas baba...

Himwant ने कहा…

Have you read "Manas Ke Hans" by Shri Amrit Lal Nagar. It is a must read to Know Goswami Tulasi Das. You read Ram Charit Manas written by Tulasi Das Ji, we will see the magic in your life. It is not a story book. It provides great motivation for becoming good human being. It is not preaching, it just effects you like a magic.

दीर्घतमा ने कहा…

aap ko sukhaw ke liye bahut-bahut dhanyabad tulasidas to bharat ke nawjagran ke agradut the.